जेल में बंद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी की लड़ाई अब जंतर-मंतर पहुंचाने की कोशिश हो रही है। आजम खान समर्थकों ने रविवार को तीन घंटे के आंदोलन का ऐलान करते हुए लोगों से अधिक से अधिक संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने का आह्रवान किया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि रविवार यानी 30 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन होगा।
आजम खान अनऑफिशियल एंड अब्दुल्ला आजम अनऑफिशियल नाम से बने इंस्टाग्राम अकाउंट, जौनपुर सदर से पूर्व विधायक अरशद खान के फेसबुक अकाउंट और अब्दुल्ला आजम खान फैन्स पेज जैसे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स से इसे लेकर पोस्ट और आह्रवान किए जा रहे हैं। इन अकाउंट्स से आजम खान और उनके परिवार पर लगातार अपडेट आते रहते हैं। हालांकि ‘लाइव हिन्दुस्तान’ ऐसे किसी वायरल हो रहे पोस्ट की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
आजम खान अनऑफिशियल एंड अब्दुल्ला आजम अनऑफिशियल नाम से बने इंस्टा अकाउंट से की गई एक पोस्ट में लिखा है कि 30 अगस्त को जंतर-मंतर पर हम अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से बुलंद करेंगे। मकसद किसी से टकराव नहीं, बल्कि इंसाफ़, न्याय और हक़ की आवाज़ को मज़बूत करना है। अब्दुल्ला आजम खान फैन्स पेज से की गई पोस्ट में भी आजम, उनकी पत्नी डॉ.तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम की फोटो लगाकर 30 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का आह्वान किया गया है। पोस्ट में लिखा है-‘यह सिर्फ़ दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि न्याय, शिक्षा, अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई है।’
आरोप है कि आजम खान ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम को कम उम्र में चुनाव मैदान में उतारा था। दो जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड प्रकरण में उन्हें सजा हुई है। दरअसल, दो पैनकार्ड दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों से ही बनवाए गए थे जो अदालत में साबित हो गया। 2017 के चुनाव में विधानसभा उपचुनाव में आजम खान ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम को रामपुर की स्वार सीट से चुनाव लड़ाया था। तब अब्दुल्ला की उम्र कम थी। यहीं से आजम खान के बुरे दिन शुरू हो गए थे। अब्दुल्ला के नामांकन दाखिल करते ही सियासी विरोधियों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। नामांकन के अगले दिन ही अब्दुल्ला की जन्मतिथि पर विवाद हो गया था। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सजा हो गई।
पिछले दिनों रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी में बिना नक्शा पास कराए बनाए गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। हालांकि मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाकर उन्हें थोड़ी राहत दे दी थी। आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कही जाने वाली जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से लगातार सुर्खियों में है। ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी ने अपना डेलीगेशन भी भेजा था। उसी दौरान जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्रवान पर छात्रों-युवाओं का प्रदर्शन भी चल रहा था। मंडलायुक्त द्वारा ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगाए जाने से मामले में थोड़ी राहत तो मिल गई लेकिन यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर अब भी तलवार लटक रही है।
हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के ड्यूल पैन कार्ड मामले से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं छह अगस्त को टॉप-10 मामलों के रूप में सूचीबद्ध थीं। इसके पहले पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और एनआई जाफरी और एडवोकेट शाश्वत आनंद और अंकुर आजाद की ओर से आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान का पक्ष सुना था। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्रों पर जल्द सुनवाई का अनुरोध करते हुए यह दलील दी थी कि दोनों पुनरीक्षणकर्ताओं को मामले में सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए। इसके बाद न्यायालय ने दोनों मामलों को छह अगस्त को टॉप-10 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। एडवोकेट शाश्वत आनंद ने बताया कि छह अगस्त सुबह न्यायालय की कार्यवाही शुरू होने पर आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से मामले की सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख किया गया। इसी दौरान न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करते हुए निर्देश दिया जाए कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के सामने पेश किया जाए।
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