अगर आपके फोन पर बार-बार अनचाही प्रमोशनल या स्पैम कॉल आती हैं, तो आने वाले समय में इन पर लगाम लग सकती है। ट्राई ने स्पैम कॉल को लेकर नए नियम जारी किए हैं। अब टेलीकॉम कंपनियों के एआई और मशीन लर्निंग सिस्टम से अगर किसी कॉलर को संदिग्ध स्पैमर के तौर पर पहचाना जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए ग्राहक की शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा। आइए जानते हैं TRAI के नए नियम के बारे में विस्तार से...
लगातार बढ़ती स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने एक बड़ा कदम उठाया है। टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 (05 ऑफ 2026) जारी करते हुए ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) बेस्ड कॉलर आईडी सिस्टम की ओर से पहचाने गए स्पैमर्स के खिलाफ सीधे कार्रवाई करें। अच्छी बात यह है कि असके लिए अब किसी ग्राहक को औपचारिक शिकायत का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। नए नियमों में संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान, केवाईसी जांच, टेलीकॉम रिसोर्स बंद करने, ब्लैकलिस्ट करने और जरूरत पड़ने पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों को शिकायत देने जैसी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
अब अगर सेंडर दोबारा नियमों का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई और सख्त हो सकती है। ऐसे मामलों में सभी एक्सेस प्रोवाइडर सेंडर के सभी टेलीकॉम रिसोर्स, जैसे पीआरआई या एसआईपी ट्रंक, सिम आदि को एक साल के लिए बंद कर देंगे। यह कार्रवाई इस बात से अलग होगी कि इन संसाधनों का इस्तेमाल उस खास कम्युनिकेशन के लिए हुआ था या नहीं। साथ ही, टेलीकॉम ऑपरेटर या OAP को सेंडर को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट कैटेगरी में डालना होगा। इस अवधि में कोई भी टेलीकॉम ऑपरेटर उसे नया टेलीकॉम रिसोर्स नहीं देगा।
नियमों के तहत ब्लैकलिस्ट किए गए सेंडर को टेलीफोन नंबर दिया जाएगा, लेकिन उसकी आउटगोइंग सर्विस बंद की जा सकती है। हालांकि, उस टेलीफोन कनेक्शन को नोटिफाइड इमरजेंसी आउटगोइंग सर्विस से जुड़ने की अनुमति होगी।
अगर कोई ग्राहक सभी कैटेगरी की टेलीमार्केटिंग कॉल को ब्लॉक करना चाहता है तो अब 1909 पर ब्लॉक प्रोमो (BLOCK PROMO) कोड टेक्स्ट किया जा सकता है।
ट्राई के अनुसार यह विकल्प सभी तरह के कंटेंट, मोड, टाइम बैंड और दिन के हिसाब से सिर्फ प्रमोशनल कमर्शियल कम्युनिकेशन को ब्लॉक करेगा। इससे ट्रांजैक्शन और सर्विस से जुड़े कमर्शियल कम्युनिकेशन और सरकारी कम्युनिकेशन ब्लॉक नहीं होंगे।
मौजूदा नियम के तहत पूरी तरह ब्लॉक किए गए कैटेगरी में रजिस्टर सभी प्रेफरेंस को नोटिफिकेशन जारी होने के 15 दिनों के भीतर ब्लॉक प्रोमो कैटेगरी में बदल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि प्रमोशनल कम्युनिकेशन को ब्लॉक करने के लिए नया वर्गीकरण लागू किया जाएगा, जबकि ट्रांजैक्शन, सर्विस और सरकारी कम्युनिकेशन इससे प्रभावित नहीं होंगे।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की वेबसाइट पर टेलीकॉम कर्मिशियल कम्यूनिकेशन कस्टमर (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की रिलीज डेट 18 सितंबर 2026 दी गई है। संशोधित नियम गैजेट नोटिफिकेशन के एक महीने बाद लागू होंगे, लेकिन इनके अलग-अलग प्रावधान 60 से 90 दिनों के चरणबद्ध समय में लागू किए जाएंगे।
वहीं, 90 दिनों बाद ब्लॉकचेन तकनीक लेयर के जरिए अपील सिस्टम, एआई से संदिग्ध और ज्यादा संभावना वाले यूसीसी भेजने वालों के डेटा से शिकायतों की पुष्टि और कंटेंट टेम्पलेट की गलत कैटेगरी बताने पर सेंडर की सर्विस सस्पेंड करने से जुड़े नियम लागू होंगे।
नए नियमों का बड़ा बदलाव यह है कि स्पैम कॉल के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिर्फ ग्राहक की शिकायत पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। टेलीकॉम ऑपरेटर्स के एआई और मशीन लर्निंग सिस्टम से संदिग्ध कॉल की पहचान होने पर भी तय प्रक्रिया के तहत जांच और कार्रवाई शुरू हो सकती है। ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट पर यह संशोधन 18 सितंबर 2026 को जारी नियमों के रूप में दर्ज है।
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