अमेरिका के इस साल के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने बड़ी सफलता दर्ज की। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों में छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जीत हासिल करके अमेरिकी संसद में भारतीय‑अमेरिकी आवाज़ को और मजबूत किया।
1. अमी बेरा – कांग्रेस में आठवीं बार डेमोक्रेटिक नेता अमी बेरा ने कैलिफ़ोर्निया के 3‑वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर अपना आठवां कार्यकाल शुरू किया। 61‑वर्षीय बेरा, जो लॉस एंजिलिस में गुजराती प्रवासी माता‑पिता के घर जन्मे, यूसी इरविन से बायोलॉजिकल साइंस में ग्रेजुएशन और मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बन गए। 1999‑2004 तक सैक्रामेंटो काउंटी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवा करने के बाद यूसी डेविस स्कूल ऑफ मेडिसिन में अकादमिक जिम्मेदारियाँ संभाली। बेरा अब विदेश मामलों की समिति की उपसमिति और हाउस इंटेलिजेंस कमेटी दोनों की सदस्य हैं और भारत‑अमेरिका संबंधों, स्वास्थ्य और विदेश नीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
2. प्रमिला जयपाल – पहली दक्षिण एशियाई महिला सांसद चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के 7‑वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत कर इतिहास रचा। 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका आईं, जॉर्जटाउन और नॉर्थवेस्टर्न से शिक्षा हासिल की। अंतरराष्ट्रीय जन‑स्वास्थ्य और प्रवासी अधिकारों के क्षेत्र में काम करने के बाद 2016 में पहली बार प्रतिनिधि सभा में चुनी गईं। वह कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में हाउस ज्यूडिशियरी, विदेश मामलों और बजट समितियों की सदस्य हैं। 14 अक्टूबर 2026 को भारत में चल रहे SIR को लेकर उन्होंने तीखी टिप्पणी की थी, जिससे भारत‑अमेरिका संबंधों में हलचल मची।
3. पिया दांडिया – पहली बार कांग्रेस में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22‑वें डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन केसी अस्कर को हराकर कांग्रेस में प्रवेश किया। पाम बीच काउंटी में जन्मी पिया के माता‑पिता भारत से आए थे। राजनीति में आने से पहले वह हाई स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षिका थीं, साथ ही व्हाइट हाउस फेलो और एप्पल में काम कर चुकी हैं। उनके अभियान का मुख्य उद्देश्य कम‑आय वाले छात्रों को उच्च शिक्षा और आर्थिक अवसर दिलाना रहा।
4. अरुणा मिलर – मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर दोबारा भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर दोबारा जीत हासिल की। आंध्र प्रदेश में जन्मी अरुणा सात साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका आईं और मिसौरी यूएसटी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। उन्होंने 25 साल तक मोंटगोमरी काउंटी के परिवहन विभाग में सिविल और ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियर के रूप में काम किया, जहाँ सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन सुधार पर ध्यान केंद्रित किया। 2010‑2018 तक मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलीगेट्स की सदस्य रह चुकी हैं। वह राज्य की दूसरी महिला लेफ्टिनेंट गवर्नर और पहली अश्वेत एवं पहली प्रवासी महिला हैं।
5. रो खन्ना – सिलिकॉन वैली से फिर जीत कैलिफ़ोर्निया के 17‑वें डिस्ट्रिक्ट से रो खन्ना ने डेमोक्रेटिक टिकट पर दोबारा जीत हासिल की। फिलाडेल्फिया में जन्मे रो के माता‑पिता भारत से आए थे; पिता केमिकल इंजीनियर और माँ विशेष जरूरतों वाले बच्चों के साथ काम करने वाली शिक्षिका थीं। उनका दादा अमरनाथ विद्यालंकार भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे। रो कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस के वाइस‑चेयरमैन हैं और 2020 में बर्नी सैंडर्स के राष्ट्रपति अभियान में सह‑अध्यक्ष रहे। हाल ही में उन्होंने रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी के साथ मिलकर जेफ़्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग की।
6. सुहास सुब्रमण्यम – वर्जीनिया में दूसरी बार जीत डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10‑वें डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन डेव बेकविथ को हराकर दूसरा कार्यकाल सुरक्षित किया। टेक्सास के ह्यूस्टन में जन्मे सुहास वकील और उद्यमी हैं; उन्होंने टेक्नोलॉजी स्टार्ट‑अप में काम किया और व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर के रूप में सेवा की। 2019‑2023 तक वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स और 2023‑2024 तक राज्य सीनेट के सदस्य रहे। उन्होंने टुलाने यूनिवर्सिटी से स्नातक और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है।
इन छह जीतों से स्पष्ट होता है कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय‑अमेरिकी प्रतिनिधित्व न केवल बढ़ रहा है, बल्कि नीति‑निर्माण में उनका प्रभाव भी गहरा हो रहा है।
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