भारत में लोकसभा या विधानसभा चुनावों के परिणाम आमतौर पर मतदान समाप्त होने के कुछ घंटे बाद ही दिखने लगते हैं, क्योंकि वोट सीधे EVM में दर्ज हो जाते हैं। अमेरिका में प्रक्रिया अलग है: मतदाता कागज़ी बैलेट पर उम्मीदवार के सामने निशान लगाते हैं, फिर बैलेट को मशीनों द्वारा पढ़ा जाता है।
बैलेट को स्कैनर में डालते ही मशीन उस निशान को पहचानकर संबंधित उम्मीदवार के खाते में वोट जोड़ देती है। कुछ क्षेत्रों में स्कैनर मतदान केंद्र पर ही स्थापित होते हैं, जबकि बड़े क्षेत्रों में बैलेट को अलग काउंटिंग सेंटर ले जाया जाता है। इन केंद्रों में हाई‑स्पीड स्कैनर एक घंटे में हजारों बैलेट पढ़ सकते हैं, इसलिए हाथों से गिनती की जरूरत नहीं पड़ती।
अमेरिका के इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन (EAC) के एक सर्वे के अनुसार, अधिकांश चुनावी क्षेत्रों में ऐसा इलेक्ट्रॉनिक गिनती सिस्टम लागू है, जिसमें बैलेट का कागजी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाता है। गड़बड़ी या ऑडिट की स्थिति में इन कागजों को फिर से जांचा जा सकता है।
वोट गिनती जल्दी शुरू होने का एक बड़ा कारण यह है कि कई राज्यों में मतदान के दिन से पहले ही एडवांस वोटिंग और डाक द्वारा बैलेट जमा करने की सुविधा उपलब्ध है। इससे मतदाता मतदान दिवस से पहले अपना वोट डाल सकते हैं, और चुनाव अधिकारियों को बैलेट की जाँच, हस्ताक्षर मिलान, लिफाफा खोलना और स्कैनिंग की तैयारी पहले ही कर लेनी पड़ती है।
इन तैयारियों के बाद, चुनाव के बाद गिनती का काम कई हजार स्थानीय केंद्रों में एक साथ शुरू हो जाता है। लगभग 10 हजार से अधिक क्षेत्रों में अलग‑अलग टीमें और मशीनें एक साथ वोट गिनती करती हैं, और जैसे ही किसी क्षेत्र की गिनती पूरी होती है, परिणाम स्थानीय अधिकारियों के पास पहुँच जाता है और फिर राष्ट्रीय स्तर पर संकलित होते हैं।
अमेरिकी मीडिया अक्सर सभी वोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही विजेता की घोषणा कर देता है। वे अब तक गिने गए वोटों के अंतर और बाकी बचे बैलेटों की संभावित प्रभाव का विश्लेषण करके अनुमान लगाते हैं। यह अनुमान आधिकारिक परिणाम नहीं माना जाता; आधिकारिक नतीजे सभी बैलेटों की अंतिम गिनती, जाँच और प्रमाणन के बाद घोषित होते हैं, जिसके लिए कुछ मामलों में कई दिन या हफ्ते लग सकते हैं।
भारत में EVM के कारण वोट तुरंत दर्ज हो जाता है, जबकि बैलेट‑आधारित मतदान में हाथों से गिनती की आवश्यकता होती है, जिससे समय अधिक लग सकता है। हाल ही में कुछ राज्य चुनावों में बैलेट गिनती में कई दिन या यहाँ तक कि कई घंटे लग गए हैं। इसलिए गिनती की गति केवल तकनीक से नहीं, बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था, पूर्व‑तैयारी और गिनती केंद्रों की संख्या पर भी निर्भर करती है।
संक्षेप में, अमेरिका में बैलेट पेपर के बावजूद तेज़ गिनती का कारण हाई‑स्पीड स्कैनर, व्यापक पूर्व‑तैयारी और हजारों समानांतर गिनती केंद्र हैं, जबकि भारत में EVM से वोट तुरंत दर्ज होते हैं और बैलेट‑आधारित मतदान में गिनती का समय अलग‑अलग हो सकता है।
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