अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की यात्रा को एक संवेदनशील मोड़ पर तय किया है, जहाँ अमेरिका वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच डीजल डिप्लोमेसी को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।
मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं, जबकि वैश्विक सप्लाई में रुकावटें और रूसी रिफाइनरियों पर हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
मुंबई में अपने स्वागत समारोह के दौरान रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ कहा, यह उल्लेख करते हुए कि पिछले वर्षों में अमेरिका ने भारत की एनर्जी ऑटोनॉमी को प्रतिबंधों और टैरिफ के माध्यम से चुनौती दी थी।
21 अक्टूबर को वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी का दौरा करेंगे, जो दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और लगभग 14 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन प्रोसेस करती है।
रुबियो के दौरे का मुख्य उद्देश्य वेनेजुएला से आयी भारी कच्ची तेल को भारत में रिफाइन कर अमेरिकी बाजार में डीजल की आपूर्ति बढ़ाना, साथ ही भारतीय डीजल निर्यात को प्रोत्साहित करना है। इस सिलसिले में वे रिलायंस के साथ ऊर्जा सहयोग को मजबूत कर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करेंगे।
‘डीजल डिप्लोमेसी’ का अर्थ है तेल और उसके उत्पादों की खरीद‑बिक्री को कूटनीतिक और रणनीतिक हितों से जोड़ना। भारत कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन अपनी विशाल रिफाइनिंग क्षमता के बल पर उसे डीजल, पेट्रोल और एवीएफ जैसे उत्पादों में बदलकर वैश्विक बाजार में बेचता है। इस क्षमता को अमेरिका अब अपने ऊर्जा सुरक्षा के साधन के रूप में देख रहा है।
रुबियो ने कहा, भारत की भारी (Heavy) और अति‑भारी (Extra‑heavy) कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता पहले भी सिद्ध हो चुकी है और जैसे‑जैसे वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ेगा, भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
वेनेजुएला से मुख्य रूप से भारी और अति‑भारी कच्चा तेल निकलता है, जो सामान्य कच्चे तेल की तुलना में अधिक गाढ़ा, सल्फर‑समृद्ध और प्रोसेस करने में कठिन होता है। भारत में यह कार्य मुख्यतः रिलायंस की गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी में किया जाता है।
रुबियो का दौरा राजनयिक नहीं, बल्कि व्यावसायिक पहल पर केंद्रित है; इसलिए वह दिल्ली नहीं, बल्कि मंगलवार मुंबई में और बुधवार गुजरात में जामनगर रिफाइनरी में समय बिताएंगे।
उन्होंने कहा, ‘हम एक ऐसी कंपनी के पास जा रहे हैं जिसके पास रिफाइनिंग की जबरदस्त क्षमता है, इसलिए उनसे मिलना बिल्कुल सही रहेगा।’
अमेरिका के लिए भारत की रिफाइनिंग क्षमता कई कारणों से महत्वपूर्ण है। वैश्विक संघर्षों और सप्लाई में रुकावटों के बीच डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता रणनीतिक रूप से आवश्यक हो गई है, और जामनगर जैसी रिफाइनरियां विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करके बड़े पैमाने पर तैयार ईंधन उपलब्ध करा सकती हैं।
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