हाल ही में इंडिगो की एक घरेलू फ्लाइट में पावर‑बैंक फट गया, जिससे विमान में आग लग गई और इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन वीडियो में दिखता भयावह दृश्य इस बात की याद दिलाता है कि बैटरी‑आधारित डिवाइस को सही तरीके से न रखने से बड़े हादसे हो सकते हैं।
पावर‑बैंक छोटे होते हैं, पर इनके अंदर लिथियम‑आयन या लिथियम‑पॉलिमर बैटरियों में बड़ी मात्रा में ऊर्जा संग्रहीत रहती है। सही उपयोग पर ये बैटरियां सुरक्षित रहती हैं, लेकिन अगर बैटरी में शॉर्ट सर्किट, ओवरहीट या निर्माण दोष हो तो ‘थर्मल रनअवे’ प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जिससे बैटरी फूलती, धुआँ निकलता और अंत में आग लग सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई यात्रा में पावर‑बैंक को लेकर जाने के नियम कड़े होने चाहिए। IATA के अनुसार 100 Wh तक की बैटरियां हैंड‑बैगेज में ले जानी अनुमति है, जबकि 100‑160 Wh की बैटरियों के लिए एयरलाइन की मंजूरी जरूरी है। 160 Wh से अधिक वाली बैटरियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।
पावर‑बैंक खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें
• बहुत कम कीमत पर अनजान ब्रांड के उत्पाद न खरीदें। कंपनी का नाम, बैटरी क्षमता, इनपुट‑आउटपुट वोल्टेज और सुरक्षा प्रमाणपत्र स्पष्ट रूप से लिखे हों, तो बेहतर है।
• भरोसेमंद रिटेलर या आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर से खरीदें। नकली या रीपैक्ड पावर‑बैंक अक्सर सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते।
• भारत में लागू सुरक्षा मानकों (IS 16446, BIS‑सर्टिफिकेशन आदि) की जाँच करें, पर केवल सर्टिफिकेट देखकर यह न मानें कि डिवाइस कभी खराब नहीं होगा।
• अपनी जरूरत के अनुसार सही कैपेसिटी चुनें। बड़ी क्षमता खुद में जोखिम नहीं बढ़ाती, लेकिन बैटरियों की गुणवत्ता और सुरक्षा फीचर महत्वपूर्ण हैं।
चार्जिंग के दौरान आम गलतियाँ
• निर्माता द्वारा सुझाए गए केबल और चार्जर का ही उपयोग करें। खराब या असंगत चार्जर से ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ती है।
• पावर‑बैंक को बिस्तर, तकिए, कंबल या किसी ऐसी जगह पर न रखें जहाँ गर्मी बाहर नहीं निकल सके। सीधे धूप या गरम कार में छोड़ना भी जोखिमपूर्ण है।
• चार्जिंग के दौरान डिवाइस को नजर में रखें। यदि असामान्य गर्मी, अजीब गंध या चटकने की आवाज़ सुनाई दे, तो तुरंत चार्जिंग बंद कर दें।
• चार्जिंग के समय पावर‑बैंक के ऊपर कोई वस्तु न रखें, और यदि डिवाइस फूल गया, दरार आ गई या गिरकर टूट गया हो, तो उसे फिर से चार्ज न करें।
डिस्पोज़ल और रख‑रखाव
बढ़ी हुई बॉडी, दरार या सूजन वाले पावर‑बैंक को दबाना, खोलना या खुद मरम्मत करने की कोशिश न करें। इन्हें सामान्य कचरे में न फेंके; निर्माता, अधिकृत सर्विस सेंटर या बैटरी‑ई‑वेस्ट संग्रह केंद्र से सुरक्षित निपटान की जानकारी प्राप्त करें।
यदि पावर‑बैंक पानी में गिर गया हो, तो केवल सुखाने से फिर से उपयोग नहीं करना चाहिए। अंदर नमी रह सकती है, इसलिए निर्माता या आधिकारिक सर्विस सेंटर की सलाह लें।
बैग या जेब में रख‑रखाव
पावर‑बैंक को धातु की चाबियों, सिक्कों या अन्य गैजेट्स के साथ न रखें, क्योंकि टर्मिनल शॉर्ट सर्किट कर सकते हैं। अलग पाउच या कवर में रखें और भारी सामान के नीचे दबने से बचें।
गर्मियों में बंद कार, डैशबोर्ड या सीधे सूर्य की रोशनी में पावर‑बैंक न रखें; इसे ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें।
हवाई यात्रा में पावर‑बैंक का सही स्थान
पावर‑बैंक को कभी भी चेक‑इन बैगेज में नहीं रखना चाहिए। इसे हैंड‑बैगेज में रखें ताकि कोई समस्या होने पर क्रू तुरंत कार्रवाई कर सके। IATA के नियमों के अनुसार, बैटरी को ओवरहेड लैगर कम्पार्टमेंट में रखने से बचें; जरूरत पड़ने पर आसानी से पहुँच सकें, यही सबसे सुरक्षित तरीका है।
इंडिगो की हालिया घटना ने इस बात को फिर से उजागर किया है कि पावर‑बैंक को सही तरीके से न रखने से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि पूरे विमान की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने डिवाइस की बैटरी क्षमता, स्वास्थ्य और एयरलाइन के नियमों को पहले से ही जांच लें, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोक सके।
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