7 अक्टूबर 2023 को गाज़ा पट्टी से इज़राइल पर बड़े पैमाने पर रॉकेट और सैन्य हमले हुए, जिससे संघर्ष की शुरुआत हुई। तब से तीन वर्ष बीत चुके हैं, और इस अवधि में दोनों पक्षों ने कई चरणों से गुजरते हुए युद्ध की दिशा बदल दी है।
गाज़ा में भारी तबाही हुई, जहाँ लाखों लोग विस्थापित हुए और हजारों की जान गई। इज़राइल ने भी आर्थिक रूप से बड़ी कीमत चुकाई, 2023‑2026 के बीच युद्ध की लागत 350 अरब शेकेल (लगभग 115 अरब डॉलर) तक पहुँचने का अनुमान है।
पहले सप्ताह में इज़राइल ने गाज़ा पर कड़ी नाकाबंदी लगाई और 13 अक्टूबर को उत्तरी गाज़ा के निवासियों को दक्षिण की ओर जाने का आदेश दिया। 27 अक्टूबर को इज़राइल ने बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य हमास की सैन्य क्षमता को समाप्त करना और बंधकों को वापस लाना था।
इस दौरान हमास के कई प्रमुख नेता मारे गए: सालेह अल‑अरूरी (जनवरी 2024), मारवान ईसा (मार्च 2024), मोहम्मद दाइफ (जुलाई 2024), इस्माइल हानिया (जुलाई 2024) और याह्या सिनवार (17 अक्टूबर 2024)।
कई युद्धविराम हुए: नवंबर 2023 का पहला, 19 जनवरी 2025 का दूसरा, 10 अक्टूबर 2025 का तीसरा। प्रत्येक विराम में बंधकों की रिहाई, कैदियों का आदान‑प्रदान और मानवीय सहायता शामिल थी, परंतु गाज़ा में सैन्य गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं।
कुल मिलाकर 1,671 इज़राइली और विदेशी नागरिकों की मौत हुई, जबकि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 71,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए और 1,71,000 से अधिक घायल हुए।
इज़राइल की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ा: 2024 में महंगाई 3.2% रही, 2025 में 2.6% पर आ गई, परंतु बढ़ा हुआ रक्षा खर्च और कर्ज‑जीडीपी अनुपात 68.5% तक पहुँच गया।
गाज़ा की अर्थव्यवस्था 84% सिकुड़ गई, 35.2 अरब डॉलर का भौतिक नुकसान और 22.7 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। कुल अनुमानित प्रभाव 57.9 अरब डॉलर है।
पुनर्निर्माण के लिए अगले 10 वर्षों में लगभग 71.4 अरब डॉलर की आवश्यकता है, जिसमें शुरुआती 18 महीनों के लिए 26.3 अरब डॉलर की माँग है।
अक्तूबर 2025 के युद्धविराम के दौरान ‘पीली रेखा’ तय की गई, जिससे इज़राइली सेना गाज़ा के लगभग 53% हिस्से में तैनात हुई। जून 2026 में संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार इज़राइल का नियंत्रण 64.9% तक बढ़ गया।
गाज़ा में 19 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए, 12 लाख से अधिक (लगभग 60%) अपने घर खो चुके हैं।
संघर्ष केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहा: इज़राइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई की, जून 2025 में ईरान के साथ 12 दिन की सीधी जंग हुई, और 2026 में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाई। यमन में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के जहाजों को निशाना बनाया, जिससे इज़राइल ने हूती ठिकानों पर हमले किए। सीरिया और इराक में भी ईरान समर्थित समूह सक्रिय रहे।
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