हाइपरसोनिक मिसाइलें आज की सैन्य तकनीक में सबसे तेज़ और घातक मानी जाती हैं। ये ध्वनि की गति से पाँच गुना या उससे अधिक तेज़ उड़ती हैं और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती हैं, जिससे प्रतिद्वंद्वी के एंटी‑मिसाइल सिस्टम को उन्हें ट्रैक करना कठिन हो जाता है। चीन, रूस, अमेरिका, भारत, फ्रांस, उत्तर कोरिया, ईरान और ब्रिटेन जैसी प्रमुख शक्ति इन तकनीकों पर तेज़ी से काम कर रही हैं।
1. ईरान – फत्तह : ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, जिसे हाइपरसोनिक कहा जाता है, 1,400 km की रेंज और 18,522 km/h की अधिकतम गति का दावा करती है। यह ठोस‑और‑लिक्विड‑स्टेज दोनों का उपयोग करती है और अपनी मैन्युवरेबिलिटी के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है, हालांकि विशेषज्ञों में इसकी वास्तविक ग्लाइड क्षमता पर बहस चल रही है।
2. चीन – हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) बैलिस्टिक मिसाइल : 1,800‑2,500 km की रेंज और 12,348 km/h तक की गति वाली यह मिसाइल ठोस ईंधन से चलती है, मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है और पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जा सकती है। इसकी मुख्य ताकत ग्लाइड स्टेज में दिशा बदलने की क्षमता है।
3. रूस – जिरकॉन : एंटी‑शिप हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, 1,113 km/h की गति और 1,000 km की रेंज के साथ, स्क्रैमजेट या रैमजेट इंजन से सुसज्जित है और जहाज़ व पनडुब्बी दोनों से लॉन्च की जा सकती है। इसे आधुनिक नौसेना के लिए बड़ा खतरा माना जाता है।
4. रूस – एरोबैलिस्टिक मिसाइल (नाम नहीं दिया) : यह एयर‑लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल मिग‑31 या टीयू‑22एम3 से दागी जाती है, 12,348 km/h की गति और लगभग 2,000 km की संयुक्त रेंज रखती है। कुछ रिपोर्टें इसे पूरी‑हाइपरसोनिक ग्लाइडर नहीं, बल्कि एरोबैलिस्टिक मानती हैं।
5. अमेरिका – एजीएम‑183A ARRW : एयर‑लॉन्च्ड बूस्ट‑ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल, 1,600 km की रेंज और 6,174 km/h से अधिक गति के साथ, बी‑52 बॉम्बर से लॉन्च होती है। वर्तमान में खरीद प्रक्रिया चल रही है और यह समय‑संवेदी लक्ष्यों पर तेज़ हमला करने के लिए विकसित की गई है।
6. अमेरिका – CPS (Conventional Prompt Strike) : नेवी और आर्मी के लिए बूस्ट‑ग्लाइड हाइपरसोनिक प्रणाली, 6,174 km/h से ऊपर गति और कई सौ से हजारों किलोमीटर की रेंज रखती है। जमवाल्ट‑क्लास डिस्ट्रॉयर और वर्जीनिया‑क्लास पनडुब्बी से लॉन्च होगी, काइनेटिक एनर्जी वारहेड पर आधारित।
7. भारत‑रूस – ब्रह्मोस‑2 : संयुक्त हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, स्क्रैमजेट इंजन के साथ 9,878 km/h की गति और 1,000‑1,500 km की रेंज लक्ष्य करती है। यह जहाज़, जमीन, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च हो सकेगी, जिससे भारत की स्ट्राइक क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।
8. फ्रांस – एएसएन4जी : एयर‑लॉन्च्ड न्यूक्लियर हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, 8,643 km/h की गति और 1,000 km से अधिक रेंज के साथ, राफेल‑F5 पर स्थापित होगी। 2035 के आसपास सेवा में आने की उम्मीद है, जिससे फ्रांस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी।
9. उत्तर कोरिया – ह्वासोंग‑8 : हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल‑आधारित मिसाइल, 2,000‑4,000 km की रेंज और लिक्विड फ्यूल से चलने वाली, रोड‑मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है। 2021 में परीक्षण हुआ था और यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का कारण बनती है।
10. ब्रिटेन – स्टॉर्म शैडो : यद्यपि यह मूलतः सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल (1,173 km/h, 250‑560 km रेंज) है, इसकी स्टेल्थ और सटीकता को देखते हुए इसे अक्सर हाइपरसोनिक सूची में शामिल किया जाता है।
इन सभी प्रणालियों से युद्ध के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। तेज़ गति, दिशा‑बदलने की क्षमता और लंबी रेंज पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को चुनौती देती है। भारत जैसे देश स्वदेशी विकास पर फोकस कर रहे हैं, लेकिन कई बड़े खिलाड़ी पहले से ही आगे हैं, और भविष्य में हाइपरसोनिक तकनीक की भूमिका और बढ़ेगी।
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