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राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के मामले में मंदिर परिसर के भीतर हुई कार्रवाई को लेकर पूर्व महासचिव चंपत राय की गोपनीय डायरी में कई गंभीर सवाल दर्ज हैं। डायरी में उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तक घटना की जानकारी पहुंचने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि “हमारे बीच में छिद्र कहां है, कौन भेदिया है?”
डायरी के अनुसार, छह जून की सुबह गोपाल राव अयोध्या से बाहर चले गए। चंपत राय को इटावा जाना था लेकिन उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी और रामजन्मभूमि परिसर स्थित यात्री सुविधा केंद्र भवन पहुंच गए। गणना कक्ष के पास कमरा नंबर एक में डॉ. अनिल मिश्र, एसपी सुरक्षा, आरएमओ और परिसर चौकी प्रभारी भी मौजूद थे। रात में तीनों युवकों को दोबारा बुलाया गया। उन्हें समझाया गया कि चोरी के मामले में कार्रवाई होने पर उनका भविष्य खराब हो सकता है। इसके बाद युवकों ने अपने घरों से रकम मंगानी शुरू की। पूछताछ में सामने आए नामों के आधार पर अन्य लोगों को भी बुलाया गया। जिनके खिलाफ मामला स्पष्ट नहीं रहा, उन्हें उनके पिता को बुलाकर सौंप दिया गया। रात करीब नौ बजे तक बरामद रकम को अलग-अलग झोलों में रखा गया। प्रत्येक झोले पर संबंधित व्यक्ति का नाम, रकम लाने वाले का नाम, तारीख और बरामद धनराशि दर्ज की गई। सात जून को फिर यात्री सुविधा केंद्र में बैठक और पूछताछ का दौर चला। सीसीटीवी में कुछ अन्य लोग भी कथित तौर पर चोरी करते दिखाई दिए थे। उन्हें बुलाकर पूछताछ की गई और उनसे भी घर से रकम मंगाई गई। एक युवक के रुदौली के पास स्थित गांव में पांच-छह लोगों को भेजा गया, जहां उसने खुद घर से रकम का थैला निकालकर सौंप दिया। इसी दौरान एक अन्य संदिग्ध का नाम सामने आया, जो घर पर नहीं मिला। परिसर की पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसकी तलाश की। डायरी के अनुसार, वह बहराइच जिले में नेपाल सीमा के करीब एक गांव में मिला और एसपी सुरक्षा के स्तर से उसे पकड़वाया गया।
बरामद रकम के सभी झोलों को एक बड़ी तिजोरी में रख दिया गया। इसी बीच लखनऊ में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने घटना को लेकर तीखा बयान दिया। इसके बाद मामले को लेकर मंदिर प्रबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई। डायरी के अनुसार, उसी शाम करीब आठ बजे डॉ. अनिल मिश्र, एसपी सुरक्षा और चंपत राय तत्कालीन एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के आवास पहुंचे। वहां चर्चा के बाद चंपत राय ने चार-पांच पंक्तियों का एक वक्तव्य तैयार कर प्रेस को दिया। यहीं से डायरी में दर्ज सबसे अहम सवाल सामने आता है। चंपत राय ने लिखा कि अखिलेश यादव तक घटना की जानकारी किस माध्यम से पहुंची और यह सूचना किसने दी? उनके शब्दों में, “हमारे बीच में छिद्र कहां है, कौन भेदिया है?” यह सवाल सिर्फ चोरी की रकम की बरामदगी तक सीमित नहीं था, बल्कि मंदिर परिसर के भीतर की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचने को लेकर भी था।
इसके बाद 11 जून को लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें चंपत राय, गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्र, स्वामी गोविंद देव गिरी, नृपेंद्र मिश्र, कृष्ण मोहन और क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सिंह मौजूद थे। बैठक में पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखी गई। शुरुआत में उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने पर विचार हुआ। हालांकि, बाद में इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया और मामले की जांच विशेष जांच दल यानी एसआईटी से कराने का निर्णय लिया गया।
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