एलन मस्क ने SpaceX की Starship रॉकेट के साथ मंगल पर स्थायी मानव बस्ती स्थापित करने की योजना को आधिकारिक तौर पर तेज किया है। कंपनी ने पहले ही अंतरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक बुनियादी तैयारियां शुरू कर दी हैं, जबकि नासा ने पिछले 50 सालों में कुल नौ स्पेसक्राफ्ट मंगल पर उतारे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी बस्ती नहीं बना पाया।
जापान ने इस माह में अपने मार्शियन मून एक्सप्लोरेशन (MMX) मिशन को लॉन्च किया, जिसका लक्ष्य मंगल के बड़े चंद्रमा फोबोस से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल लेकर धरती पर वापस लाना है। अगर सफल रहा तो जापान पहला देश बन जाएगा जो मंगल के चंद्रमा से नमूना लाएगा।
MMX मिशन में लगभग पाँच टन वजन वाला एक अनमैन्ड स्पेसक्राफ्ट मंगल की ओर जाएगा, जहाँ वह फोबोस के निकट पहुँचेगा और इडेफिक्स नामक एक छोटा रोवर उतारेगा। रोवर फ्रांस‑जर्मनी के सहयोग से बना है और लगभग माइक्रोवेव ओवन के आकार का है।
इडेफिक्स चार पहियों वाले, एक मिलीमीटर प्रति सेकंड की गति से चलने वाला रोवर फोबोस की सतह पर लगभग 100 दिन तक काम करेगा। इसका मुख्य काम सतह की जाँच करना, संभावित ड्रिलिंग साइट ढूँढ़ना और सैंपल संग्रहण के लिए उपयुक्त स्थान तय करना है।
मुख्य स्पेसक्राफ्ट 2028‑2029 में फोबोस पर उतरने के बाद दो घंटे तक ड्रिल और अन्य उपकरणों की मदद से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी‑पत्थर के सैंपल इकट्ठा करेगा। इसके बाद वह फोबोस से दूर होकर दूसरे चंद्रमा डीमोस के पास से गुजरेगा और उसकी भी जाँच करेगा।
सैंपल को 2030 में अंतरिक्ष में वापस भेजा जाएगा और 2031 में ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी क्षेत्र में लैंडिंग के बाद पृथ्वी पर पहुँचाया जाएगा। इस पूरे मिशन की लागत लगभग 578 मिलियन डॉलर अनुमानित की गई है।
वैज्ञानिक इस सैंपल के माध्यम से यह पता लगाना चाहते हैं कि फोबोस और डीमोस कैसे बने – चाहे वह मंगल से टकराए बड़े पिंड के मलबे से बने हों या छोटे एस्टरॉइड्स को ग्रह ने अपने गुरुत्वाकर्षण से पकड़ लिया हो। फोबोस के सैंपल में मंगल की सतह के निशान मिलने की संभावना भी है, जिससे दोनों चंद्रमा के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।
जापान के साथ इस मिशन में NASA, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) भी सहयोग कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साझेदारी का एक नया उदाहरण स्थापित हो रहा है।
जापान के अलावा चीन भी 2028 में अपना सैंपल‑रिटर्न मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसका लक्ष्य भी 2031 तक सैंपल को धरती पर लाना है। वहीं नासा अपने Perseverance रोवर के माध्यम से मंगल की सतह से इकट्ठा किए गए सैंपल को वापस लाने की योजना पर काम कर रहा है।
यदि जापान का MMX सफल हो जाता है, तो यह मानव को मंगल के चंद्रमा से सीधे नमूना लेकर पृथ्वी पर विश्लेषण करने का पहला अवसर देगा, जिससे मंगल के गठन, उसके चंद्रमा और पूरे सौरमंडल के विकास को समझने में नई रोशनी पड़ेगी।
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