दिग्गज टेक कंपनियों ओपनएआई और एंथ्रोपिक के सीईओ को ऑस्ट्रेलियाई सीनेट ने पूछताछ के लिए तलब किया है। हाल ही में एक बेलगाम एआई बॉट ने ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल डेटाबेस में सेंध लगाई थी। इस बड़ी सुरक्षा चूक के बाद सरकार सख्त नियम लाने की तैयारी में है।
ऑस्ट्रेलिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चल रही संसदीय जांच के बीच ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई को सीनेट के सामने पेश होने के लिए कहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ओपनएआई के एक एआई एजेंट द्वारा ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मेडिकेयर सिस्टम के एक पोर्टल तक अनधिकृत पहुंच का मामला सामने आया है।
ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन्स पार्टी की सीनेटर सारा हैनसन-यंग की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने दोनों कंपनियों के प्रमुखों को लिखित अनुरोध भेजा है। समिति की सार्वजनिक सुनवाई 1 अक्तूबर को राजधानी कैनबरा में प्रस्तावित है। इस जांच में एआई और डेटा सेंटरों के ऑस्ट्रेलियाई समाज, उद्योग, सुरक्षा, डेटा पारदर्शिता, पानी और ऊर्जा पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की जा रही है।
हैनसन-यंग के कार्यालय के अनुसार, सैम ऑल्टमैन से ऑस्ट्रेलियाई सरकारी वेबसाइटों से जुड़े ओपनएआई एजेंट के मामले पर सवाल पूछे जाने हैं। समिति का कहना है कि एआई कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था और इस तेजी से विकसित हो रही तकनीक के लिए प्रभावी नियमों पर सार्वजनिक रूप से जवाबदेही तय करना जरूरी है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने 24 सितंबर को बताया था कि जून में ओपनएआई का एक एआई एजेंट सरकारी मेडिकेयर स्टैटिस्टिक्स रिपोर्टिंग सर्विस पोर्टल तक पहुंच गया था। प्रधानमंत्री के मुताबिक, एजेंट ने पोर्टल की सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक दोनों तरह की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाई थी। मामले की फोरेंसिक जांच ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल्स डायरेक्टोरेट की मदद से की जा रही है।
हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि मरीजों की निजी मेडिकल जानकारी तक पहुंच बनाई गई थी। जांच अभी जारी है। यह पोर्टल मुख्य रूप से मेडिकेयर से जुड़े आंकड़ों और खर्च जैसी गैर-संवेदनशील जानकारी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार को घटना की जानकारी तुरंत नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई को एजेंट की गतिविधि के बारे में अगस्त में पता चला था। कंपनी ने 10 सितंबर को एक सामान्य सरकारी ईमेल पते पर इसकी जानकारी भेजी, जिसे अगले दिन पढ़ा गया। इसके बाद 15 सितंबर को सर्विसेज ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल्स डायरेक्टोरेट को इसकी सूचना दी।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कंपनी की ओर से सरकार को जानकारी देने में हुई देरी पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने सैम ऑल्टमैन से भी इस मामले पर बातचीत की थी। अल्बनीज के मुताबिक, घटना जून में हुई थी, जबकि सरकार को इसकी जानकारी काफी बाद में मिली।
ओपनएआई की समीक्षा में ऑस्ट्रेलिया की कई सरकारी वेबसाइटों और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां सामने आईं। कंपनी के अनुसार, उसके मॉडल कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश के दौरान इन सरकारी वेबसाइटों के साथ इंटरैक्ट कर रहे थे। रिपोर्टों में मेडिकेयर के अलावा ऑस्ट्रेलियाई इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर, विक्टोरिया डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थऑफ क्राइम स्टैटिस्टिक्स एंड रिसर्च का भी उल्लेख किया गया है।
ओपनएआई ने कहा है कि यह गतिविधि जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं थी और उसकी शुरुआती जांच में निजी जानकारी के प्रभावित होने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, कंपनी की जांच और सरकारी जांच दोनों जारी हैं।
पारंपरिक चैटबॉट के मुकाबले एआई एजेंट ज्यादा स्वायत्त तरीके से काम कर सकते हैं। वे किसी काम को पूरा करने के लिए जानकारी खोजने, फैसले लेने और अलग-अलग डिजिटल टूल्स या सिस्टम के साथ इंटरैक्ट करने जैसे कदम खुद उठा सकते हैं। इसी क्षमता के कारण इनके इस्तेमाल के साथ सुरक्षा और निगरानी से जुड़े सवाल भी बढ़ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया की सीनेट जांच ऐसे समय में हो रही है, जब सरकार एआई और टेक्नोलॉजी से जुड़े नियमों को और मजबूत करने पर काम कर रही है। मेडिकेयर मामले ने इस बहस को एक वास्तविक घटना का उदाहरण दे दिया है, जिसमें एक एआई एजेंट ने सरकारी सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाई।
सीनेट की सुनवाई में दोनों कंपनियों से एआई एजेंट्स की सुरक्षा, डेटा तक उनकी पहुंच, निगरानी व्यवस्था और किसी घटना की जानकारी मिलने के बाद उसे सरकार तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल हो सकते हैं। इसके अलावा, समिति एआई कंपनियों के लिए भविष्य में लागू किए जाने वाले नियमों और जवाबदेही के ढांचे पर भी चर्चा कर सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई खुद सुनवाई में शामिल होंगे या नहीं। दोनों कंपनियों की ओर से अनुरोधों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
मेडिकेयर मामले के बाद ऑस्ट्रेलिया में एआई की सुरक्षा, डेटा पारदर्शिता और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। देश में एआई को लेकर पहले से कई सरकारी और संसदीय जांच चल रही हैं। सीनेट की मौजूदा जांच में सिर्फ एआई मॉडल ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटरों की वजह से पानी और ऊर्जा की खपत जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
मेडिकेयर पोर्टल की घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि ज्यादा स्वायत्त एआई एजेंट्स को सरकारी और संवेदनशील डिजिटल सिस्टम से दूर रखने के लिए किस तरह के सुरक्षा मानक जरूरी होंगे। आने वाली सीनेट सुनवाई में इस मुद्दे पर एआई कंपनियों से सीधे जवाब मांगे जाने की उम्मीद है।
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