बिहार में सरकारी बाबुओं के खिलाफ बिहार पुलिलगातार कार्रवाई कर रही है। इस साल निगरानी के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने जब कुछ आंकड़ें सार्वजनिक की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। 2025 में रिश्वत लेते हुए 101 मामले सामने आए थे, वहीं इस साल यह मामले बढ़ गए। 16 अक्तूबर तक ही 113 लोग रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। इतना ही नहीं 2025 में 236 कार्य दिवस में 122 प्राथमिकी भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज की गई थी। इस साल 30 सितंबर तक ही महज 188 कार्य दिवस में ही 124 प्राथमिकी दर्ज की गई। यानी हर डेढ़ दिन पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई। निगरानी के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामलों से लेकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों और अदालतों में सजा तक के मामलों पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं। वर्ष 2025 में आय से अधिक संपत्ति के 15 मामले दर्ज किए गए, जबकि विशेष निगरानी न्यायालयों ने 30 मामलों में सजा सुनाई। वर्ष 2026 में 15 अक्टूबर तक 22 मामलों में सजा सुनाई गई है।
अगर सरकारी बाबुओं की ओर रिश्वत लेने के मामलों को देखें तो पहले नंबर पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग है। इस विभाग के अफसर और कर्मियों के खिलाफ 20 मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरे नंबर पर बिहार पुलिस है। 17 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के केस दर्ज किए गए हैं। तीसरे नंबर पर पंचायती राज विभाग है। 12 अफसर और कर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में सात, परिवहन विभाग में चार और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में तीन मामले दर्ज किए गए। ग्रामीण विकास, समाहरणालय और सहकारिता विभाग में भी तीन-तीन मामले सामने आए। वहीं खनन, कृषि, बाल विकास परियोजना, बिजली तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग में दो-दो मामले दर्ज किए गए। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, आयुक्त कार्यालय, विश्वविद्यालय, नगर विकास एवं आवास विभाग, माप-तौल, उद्योग और समाज कल्याण विभाग में एक-एक मामला सामने आया। शिक्षा विभाग में ट्रैप मामलों की संख्या शून्य दर्ज की गई है।
जानिए किस विभाग से कितने ट्रैप के मामले सामने आए
10 हजार रुपये तक की रिश्वत के सबसे अधिक 34 मामले
ने वर्ष 2026 में 16 अक्टूबर तक दर्ज ट्रैप कांडों का रिश्वत की राशि के आधार पर भी विवरण जारी किया है। इसमें 10 हजार रुपये तक की रिश्वत के सबसे अधिक 34 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 10 हजार से 20 हजार रुपये की श्रेणी में 27 मामले सामने आए। वहीं 20 हजार से 30 हजार रुपये की रिश्वत के सात मामले और 30 हजार से 50 हजार रुपये की रिश्वत के 15 मामले दर्ज किए गए। 50 हजार से 75 हजार रुपये की श्रेणी में दो मामले सामने आए। वहीं, 75 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक की रिश्वत के तीन मामले दर्ज हुए। वहीं एक लाख से दो लाख रुपये तक की रिश्वत के पांच और दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रिश्वत के चार मामलों में ट्रैप की कार्रवाई की गई। इस तरह जारी विवरण की आठ श्रेणियों में कुल 97 मामले शामिल हैं। इनमें 10 हजार रुपये तक और 10 हजार से 20 हजार रुपये तक की रिश्वत के कुल 61 मामले हैं। यहकी ओर से दर्ज ट्रैप मामलों में कम रकम की रिश्वत वाले मामले अधिक हैं। हालांकि, यह केवल दर्ज मामलों का विवरण है, राज्य में होने वाली कुल रिश्वतखोरी का अनुपात नहीं।चार अधिकारियों-कर्मचारियों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले
की ओर से जारी विवरण में वर्ष 2026 के दौरान विभिन्न विभागों के चार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता बालेश्वर राम, तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार, पर्यटन विभाग के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा और भोजपुर के पशु चिकित्सालय में कार्यरत कार्यालय परिचारी शिवानन्द कुमार सिंह शामिल हैं। निगराणी की ओर से बताया गया कि इन मामलों में कथित अतिरिक्त संपत्ति की राशि 90 लाख रुपये से लेकर 2.57 करोड़ रुपये से अधिक तक है। ये प्राथमिकी में दर्ज आरोप हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।कार्यपालक अभियंता बालेश्वर राम पर 90.65 लाख रुपये का मामला
ग्रामीण कार्य विभाग में बिरौल, दरभंगा के कार्यपालक अभियंता बालेश्वर राम के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 14/26 दर्ज किया गया। प्राथमिकी तीन फरवरी 2026 को दर्ज हुई थी। उनके खिलाफ 90,65,333 रुपये यानी 90 लाख 65 हजार 333 रुपये के प्रत्यानुपातिक धनार्जन का मामला दर्ज किया गया। यह राशि उनकी कुल वैध एवं ज्ञात आय से लगभग 72 प्रतिशत अधिक बताई गई है। उनका मूल निवास पश्चिमी चंपारण और वर्तमान पता जगदेव पथ, पटना बताया गया है।
तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार पर 2.57 करोड़ रुपये से अधिक का आरोप
मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा सुधीर कुमार के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 32/26 दर्ज किया गया। यह मामला 11 मार्च 2026 का है। निगरानी के अनुसार, उनके खिलाफ 2,57,44,132 रुपये यानी दो करोड़ 57 लाख 44 हजार 132 रुपये के प्रत्यानुपातिक धनार्जन का मामला दर्ज किया गया। यह राशि उनकी कुल ज्ञात आय से लगभग 77.10 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ 1.41 करोड़ रुपये का केस
पर्यटन विभाग, पटना में अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 84/26 दर्ज किया गया। प्राथमिकी 16 जुलाई 2026 की है। निगरानी के अनुसार, उनके खिलाफ 1,41,90,000 रुपये यानी एक करोड़ 41 लाख 90 हजार रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से 75 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। इस मामले में 17 जुलाई 2026 को पटना स्थित तीन ठिकानों पर तलाशी ली गई। इनमें आवास और कार्यालय से संबंधित ठिकाने शामिल थे। अवधेश कुमार सिन्हा का निवास राजीव नगर, पटना बताया गया है।
कार्यालय परिचारी शिवानन्द कुमार सिंह के खिलाफ 1.06 करोड़ रुपये का मामला
भोजपुर जिले के गड़हनी अंचल स्थित पशु चिकित्सालय में कार्यरत कार्यालय परिचारी (प्रथम वर्गीय) शिवानन्द कुमार सिंह के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 87/26 दर्ज किया गया। प्राथमिकी 20 जुलाई 2026 को दर्ज हुई थी। उनके खिलाफ 1,06,62,770 रुपये यानी एक करोड़ छह लाख 62 हजार 770 रुपये के प्रत्यानुपातिक धनार्जन का मामला दर्ज किया गया। यह राशि उनकी ज्ञात आय से लगभग 253.8 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इस मामले में 22 जुलाई 2026 को भोजपुर स्थित तीन ठिकानों पर छापेमारी की गई। इनमें आवास और कार्यालय से जुड़े ठिकाने शामिल थे। आरोपी और उनकी पत्नी के नाम पर कुल 34 अचल संपत्तियां पाई गईं, जिनका मूल्य 1,11,76,250 रुपये यानी एक करोड़ 11 लाख 76 हजार 250 रुपये बताया गया है। इसके अलावा, 17,24,187 रुपये मूल्य के तीन वाहन खरीदे जाने और बैंक खातों में 68,233 रुपये जमा होने की जानकारी दी गई है। निगरानी ने उनकी ज्ञात आय से लगभग 253.8 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने का आरोप लगाया है।
विशेष निगरानी न्यायालयों में सजा के मामलों में बढ़ोतरी भ्रष्टाचार के मामलों में प्राथमिकी और ट्रैप कार्रवाई के साथ अदालतों में सजा की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।की ओर से जारी विवरण के मुताबिक, वर्ष 2000 से 2026 तक विशेष निगरानी न्यायालयों में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की संख्या में हाल के वर्षों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में विशेष निगरानी न्यायालयों ने भ्रष्टाचार के 30 मामलों में सजा सुनाई। वर्ष 2026 में 12 अक्टूबर तक 22 मामलों में सजा सुनाई जा चुकी थी। वर्ष 2000 से 2024 तक प्रतिवर्ष औसतन 5.6 मामलों में सजा सुनाए जाने की जानकारी दी गई है। वर्ष 2024 में 18 मामलों में सजा हुई थी। इसके बाद 2025 में संख्या बढ़कर 30 हो गई और 2026 में 12 अक्टूबर तक 22 मामलों में सजा सुनाई गई।
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