कोलकाता में दुर्गापूजा का मौसम चल रहा था, शहर के कई पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही थी। लेकिन उत्तर कोलकाता के चोरबागान में शनिवार शाम की भीड़भाड़ ने कई परिवारों के उत्सव को मातम में बदल दिया।
विकास भट्टाचार्य, 64 वर्ष, जो हर साल अकेले ही दुर्गा दर्शन के लिए पंडालों में जाते थे, शनिवार दोपहर लगभग साढ़े‑तीन बजे घर से निकले। उन्हें नहीं पता था कि इस बार उनका सफर आखिरी हो जाएगा। उनका छोटा भाई तापस भट्टाचार्य को देर शाम एक कॉल आया कि विकास की तबीयत बिगड़ रही है, और वह अस्पताल पहुँचा। अस्पताल में सफ़ेद चादर से ढका शरीर मिला – वही विकास था।
भट्टाचार्य परिवार ने कहा कि विकास हमेशा दुर्गापूजा के दौरान पंडाल घूमना पसंद करते थे और इस बार भी वही इरादा था। लेकिन पंडाल के भीतर भीड़ नियंत्रण, संकरे रास्ते और कम रोशनी ने दुर्घटना को जन्म दिया, उनका आरोप है। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की माँग की है।
शाम को तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे पंडाल के आसपास की गलियों में भीड़ और अधिक फँसी। कुछ लोग बारिश से बचने के लिए पंडाल से बाहर निकलने लगे, जबकि एंट्री गेट से भीड़ अंदर धकेलती रही। दो तरफ़ से दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, कई लोग गिर पड़े और आगे‑पीछे धक्का‑मुक्की होने लगी।
नदिया जिले के राम सरकार और उनकी पत्नी भी इस भीड़ में फँसे। बारिश के कारण अफरा‑तफ़री के बीच दोनों अलग हो गए। कुछ देर बाद पत्नी को लोगों के नीचे दबी पाया गया और एंबुलेंस नहीं होने के कारण उन्हें तुरंत अस्पताल नहीं पहुँचा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस ही शाम 17‑साल की बरनाली हलदर भी अपने दो दोस्तों के साथ पंडाल देखने निकली थीं। बरनाली और उसकी एक दोस्त साकू को भीड़ में चोटें आईं और बरनाली की मृत्यु हो गई। परिवार ने कहा कि पंडाल निर्माण और भीड़ प्रबंधन में सुरक्षा मानकों का पालन न किया गया तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी।
परिवारों ने पंडाल के आयोजकों पर भीड़ नियंत्रण, पर्याप्त पुलिस, एंबुलेंस और मेडिकल सहायता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संकरे रास्तों के हिसाब से एंट्री‑एक्ज़िट की योजना नहीं बनाई गई थी, जिससे भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हुई।
चोरबागान के प्रमुख दुर्गापूजा आयोजक सजल घोष ने कहा कि यह एक दुखद हादसा है, कोई पक्ष नहीं ले रहे और जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
अब जांच के दायरे में कई सवाल हैं: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कौन‑से उपाय किए गए थे, बारिश के दौरान वैकल्पिक एंट्री‑एक्ज़िट की व्यवस्था थी या नहीं, और मौके पर पर्याप्त पुलिस और मेडिकल टीम मौजूद थी या नहीं। इन सवालों के जवाब ही इस त्रासदी की जड़ तक पहुँचेंगे।
दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुनः समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है। परिवारों के लिए न्याय और जिम्मेदारी तय होना ही सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि अगली बार कोई और परिवार इस तरह के दर्दनाक फोन का इंतज़ार न करे।
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