भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लेकर लॉन्च में देरी की चर्चा के बीच अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने लोगों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे बड़े कार्यक्रम में देरी होना सामान्य बात है और इसे चुटकी भर नमक के साथ यानी बहुत गंभीर चिंता के तौर पर नहीं लेना चाहिए। उनका कहना है कि मिशन कुछ महीने या एक-दो साल देर से भी हो सकता है, लेकिन जब उड़ान हो तो उसकी सफलता सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है।
अंगद प्रताप ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री बनने के बाद यह समझना पड़ता है कि खासकर प्रोटोटाइप कार्यक्रमों में देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे अंतरिक्ष यात्री इस सोच के साथ नहीं चुने गए थे कि वाहन और रॉकेट पहले से तैयार हैं और उन्हें पहले से तय तारीख पर सीधे अंतरिक्ष में भेज दिया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन मुख्यालय की ओर से तय समयसीमा के अनुसार सभी अंतरिक्ष यात्री लगातार प्रशिक्षण और तैयारी कर रहे हैं। प्रताप ने कहा कि भारत का कार्यक्रम केवल अंतरिक्ष में उड़ान भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी बड़ी मात्रा में काम पूरा किया जाना है।
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट रहे प्रताप ने कहा कि अमेरिकी या रूसी अंतरिक्ष यात्री जब किसी अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो आम तौर पर उन्हें एक निश्चित समय के भीतर उड़ान मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के मामले में स्थिति अलग है। वे ऐसे प्रोटोटाइप कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जिसमें उनका काम केवल अंतरिक्ष में जाकर लौटना नहीं, बल्कि उस पूरे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित करने में योगदान देना भी है। प्रताप ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री लगातार इस निर्माण प्रक्रिया में अपना योगदान दे रहे हैं। यानी उनके लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ कार्यक्रम को तैयार करने का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
गगनयान कार्यक्रम के तहत छह और टेस्ट पायलटों तथा विमानन क्षेत्र से बाहर के चार लोगों को चुनने की योजना है। प्रताप ने बताया कि वह खुद प्रयोगात्मक टेस्ट पायलट रहे हैं और चयन के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग तथा चिकित्सा से जुड़ी कई चीजें सीखीं। इसी तरह अगर कोई डॉक्टर अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना जाता है तो उसे विमानन और इंजीनियरिंग सीखनी होगी। इंजीनियर को भी चिकित्सा और विमानन की जानकारी हासिल करनी होगी। इसका मकसद यह है कि अंतरिक्ष यात्री मिशन से जुड़ी अलग-अलग तकनीकी और मानवीय जरूरतों को समझ सकें।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा था कि मौजूदा कैलेंडर वर्ष में मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण के लिए गतिविधियां तेजी और व्यवस्थित तरीके से चल रही हैं। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है और अभी इसका विकास किया जा रहा है। योजना के मुताबिक तीन सदस्यीय दल को तीन दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और उन्हें सुरक्षित वापस धरती पर लाया जाएगा। इसरो के मुताबिक गगनयान कार्यक्रम 2027 के लिए नियोजित है। इससे पहले तीन मानवरहित मिशन किए जाने हैं और पहला मानवरहित मिशन मौजूदा कैलेंडर वर्ष में पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है। ऐसे में अंगद प्रताप का संदेश साफ है कि तारीख से ज्यादा जरूरी यह है कि भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान पूरी तरह सुरक्षित और सफल हो।
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