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शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर फ़्लाइट में ही हिरासत में ले लिया.
दीपके ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, "आप देख सकते हैं कि देश किस दिशा में जा रहा है. हमें फ़्लाइट में ही हिरासत में लिया जा रहा है, ऐसा तो कभी इंदिरा गांधी ने भी नहीं किया था. यह तानाशाही है, लेकिन हम इनसे डरते नहीं हैं."
अभिजीत दीपके ने हिरासत में लेने आए पुलिसकर्मियों से कहा, "मैं आपसे डरता नहीं हूं, हम गिरफ़्तारी के लिए तैयार हैं."
अभिजीत, सौरव और आशुतोष को हिरासत में लेने के लिए महिला पुलिसकर्मी आगे आई थीं. इस पर दीपके और उनके साथियों ने पुरुष पुलिसकर्मियों को भेजने की मांग की.
यह कार्रवाई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले की गई थी.
रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया.
दिल्ली पुलिस ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्तूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था. सभी आवश्यक क़ानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें दिनांक 11 अक्तूबर को दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट न्यायालय के सामने पेश किया गया."
"शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर एक साल की अवधि के लिए 50 हज़ार का सिक्योरिटी बॉन्ड भरा गया, इसके बाद एसईएम कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया."
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दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके और उनके साथियों नई दिल्ली के इंदिया गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के अंदर जाकर डिटेन किया तो पुलिस की इस कार्रवाई के वीडियो को कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिन्दू' की एक रिपोर्ट के मुताबऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी से स्पष्टीकरण मांगा है कि पुलिस को एयरक्राफ़्ट के अंदर कैसे जाने दिया गया और इस मामले में संबंधित एयरलाइंस को जानकारी क्यों नहीं दी गई.
क्या पुलिस किसी को विमान के अंदर घुसकर डिटेन कर सकती है? हमने इसका जवाब जानने के लिए पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बात की.
पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''लॉ ऑफ़ द लैंड कहता है कि पुलिस या जांच एजेंसी भारत की सीमा में कहीं भी जाकर कार्रवाई कर सकती है. उनके पास बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता), बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) और बीएसए (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के तहत ऐसे अधिकार हैं."
उनका कहना है, "हम कार, ट्रेन या घर से लोगों को हिरासत में लेते हैं. फ़्लाइट भारत की धरती पर है तो इस मामले में वह अलग नहीं है."
वहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार कहते हैं, "अगर कोई अंतरराष्ट्रीय नियम या स्थानीय स्तर पर कोई निर्देश हों तो वह अलग बात है. लेकिन मामला भारत के अंदर हो तो पुलिस कहीं भी अपनी कार्रवाई कर सकती है. इसके लिए कोई रोक नहीं है."
वह कहते हैं, "मान लिया जाए कि पुलिस को सूचना मिले कि कोई अपराध हो सकता है तो पुलिस बैठी नहीं रह सकती. पुलिस जो कुछ करती है वह क़ानून के मुताबिक़ अपराध को रोकने, अपराधी को पकड़ने या सुरक्षा के लिहाज से की गई कार्रवाई होती है."
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भारत में एयरपोर्ट और एयरलाइंस की सुरक्षा के लिए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने 'एयरक्राफ़्ट (सिक्योरिटी) नियम-2023' नोटिफ़ाई किए हैं. जबकि भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 अलग-अलग निकायों के बीच काम के बंटवारे के बारे में बताता है.
एयरक्राफ़्ट सिक्योरिटी रूल्स के 22वें नियम में बताया गया है कि मान्य एंट्री पास के साथ फ़्लाइट के मुसाफ़िरों, विज़िटर्स (प्रऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के महानिदेशक या केंद्र सरकार की ओर से लिखित अनुमति के बाद एयरोड्रोम में प्रवेश किया जा सकता है.
अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स को नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए शनिवार को पुलिस अधिकारियों को स्पेशल पास दिए गए थे.
एक एयरलाइन अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, "उड़ान भरने से पहले विमान के दरवाजे बंद होने से लेकर विमान के पार्क होने के बाद दरवाज़े खुलने तक विमान को उड़ान की स्थिति में माना जाता है. इस दौरान विमान के कमांडिंग पायलट के पास सर्वोच्च अधिकार होते हैं."
उन्होंने आगे कहा कि दरवाज़े खुल जाने के बाद गंभीर मामलों में कोई भी सुरक्षा एजेंसी विमान के भीतर प्रवेश कर सकती है.
अभिजीत दीपके की गिरफ़्तारी के दौरान एक और मुद्दे पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या पुलिस किसी एयरलाइंस से किसी फ़्लाइट के मुसाफ़िरों की सूची मांग सकती है.
अरुण कुमार कहते हैं, "जांच एजेंसी कभी भी ज़रूरत पड़ने पर ऐसी जानकारी मांग सकती है. हमने कई मामलों में ऐसा क्या है. चाहे ट्रेन हो या फ़्लाइट पुलिस ने हज़ारों मामलों में ट्रेन के अंदर या एयरपोर्ट जाकर गिरफ़्तारी की है."
वह कहते हैं, "इसके लिए किसी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर होना ज़रूरी नहीं है. पुलिस प्रिवेंटिव (अपराध की रोकथाम) के लिहाज से भी ऐसी सूचना मांग सकती है."
अभिजीत दीपके ने विमान के अंदर महिला पुलिसकर्मयों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए.
राजेश पांडेय का कहना है, "सीआरपीसी में पुलिस को महिला या पुरुष के रूप में नहीं लिखा गया है. समय-समय पर राज्य सरकारों, मानवाधिकार संगठनों या कोर्ट के निर्देश पर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा के लिए कई मामलों में महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी रखी जाती है."
"पुलिस या जांच एजेंसियों की कार्रवाई समाज के व्यापक हित, किसी असामान्य हालात से निपटने या अपराध की रोकथाम के लिए होती है. अगर दहेज़ हत्या के किसी मामले की जांच महिला अधिकारी कर रही हैं तो क्या वह पुरुष अभियुक्त को गिरफ़्तार नहीं करेगी?"
पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार इस मुद्दे पर कहते हैं, "क़ानून इस मामले में पुलिस को केवल पुलिस मानता है- महिला या पुरुष नहीं. अगर ऐसा होने लगे तो भारत में महिलाओं की आबादी क़रीब 50 फ़ीसदी है, जबकि महिला पुलिस महज़ 13% है, तो पुलिस कैसे काम करेगी."
उनका कहना है, "पुरुष या महिला पुलिस अधिकारी कोई भी जांच के संबंध में किसी को भी गिरफ़्तार कर सकती है, उससे पूछताछ कर सकती है. महिलाओं के मामले में अगर रात के वक़्त कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं हो तो पुलिस को बताना पड़ता है कि किन हालात में ऐसी कार्रवाई की गई."
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