अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस को जल्द ही ‘मुस्लिम शहर’ कहकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आव्रजन नीति की तीखी आलोचना की और कहा कि फ्रांस की सीमाएँ खुली रहने के कारण यह गलती हो रही है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब फ्रांस में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं से असंतोष के बीच प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। छात्रों के भी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण विरोध हो रहे हैं।
ट्रंप ने फ्रांस को अपने देश का आईना बताया और कहा कि अमेरिका ने अपनी सीमाएँ बंद कर ली हैं, जबकि फ्रांस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने मैक्रों को ‘बहुत पहले ही अपनी सीमाएँ बंद कर देनी चाहिए थीं’ का आरोप लगाया।
क्या ट्रंप के इस दावे का कोई ठोस जनसांख्यिकीय आधार है? पेरिस के मुस्लिम बहुल होने का दावा आँकड़ों से समर्थित नहीं है।
फ्रांस के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान INSEE के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, 2019‑2020 में फ्रांस की 18‑59 वर्ष की आयु वर्ग में लगभग 10% ने खुद को मुस्लिम बताया, जबकि 29% कैथोलिक और 51% किसी भी धर्म से नहीं जुड़ा बताया। ये आंकड़े पूरे फ्रांस के लिए हैं, पेरिस के लिए नहीं।
प्यू रिसर्च के अनुसार फ्रांस में मुस्लिम आबादी 8‑9% के आसपास है, कुल संख्या 5‑7 मिलियन के बीच बताई जाती है। फ्रांस में धर्म के आधार पर आधिकारिक जनगणना नहीं होने के कारण सटीक संख्या बताना कठिन है।
हालाँकि पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में उत्तरी अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से आए प्रवासियों की बड़ी मौजूदगी है, परंतु किसी शहर में मुस्लिम समुदाय का होना और उस शहर का मुस्लिम बहुल हो जाना दो अलग बातें हैं।
पेरिस की आबादी लगभग 22.2 लाख है, जिसमें अनुमानित 10‑15% मुस्लिम है, यानी लगभग 2,20,000 मुसलमान पेरिस में रहते हैं।
पेरिस के उपनगर, विशेषकर Île‑de‑France क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का अनुमान अक्सर 15% या उससे अधिक लगाया जाता है, और यहाँ फ्रांस की कुल मुस्लिम आबादी का लगभग एक‑तिहाई हिस्सा रहता है।
सीन‑सेंट‑डेनिस जैसे उपनगरों में मुस्लिम आबादी 30‑40% के बीच है, और यहाँ नवजात शिशुओं के नामों में अरबो‑मुस्लिम नामों का अनुपात 58‑62% तक पहुँचता है।
फ्रांस की राजनीति में धर्म और पहचान का सवाल जटिल है। फ्रांसीसी संविधान धर्मनिरपेक्षता (laïcité) पर आधारित है, परंतु सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रतीक, हिजाब, आव्रजन और राष्ट्रीय पहचान को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है।
ट्रंप का बयान इस बहस के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। फ्रांस में दक्षिणपंथ की राजनीति इमिग्रेशन पर सख्त रुख को राष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा से जोड़ती है, जबकि आलोचक कहते हैं कि आर्थिक संकट, सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली और युवाओं की नाराजगी जैसी समस्याओं को केवल प्रवासियों या किसी धर्म के साथ जोड़ना वास्तविक कारणों से ध्यान भटका सकता है।
फिलहाल पेरिस के जल्द मुस्लिम बहुल शहर बनने के ट्रंप के दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय जनसांख्यिकीय प्रमाण नहीं है। परंतु पेरिस के समाज में इस पर गहरा मंथन हो रहा है।
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