हाल ही में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की चर्चा बढ़ी है, जब उनके एक शिष्य, रसिक दुलारी उर्फ दीपक लोधी, आश्रम की चौथी मंज़िल से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया। पुलिस ने प्रारम्भ में इसे आत्महत्या माना, परन्तु नई जांच में कई नए पहलू सामने आए हैं।
प्रेमानंद महाराज का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है, और उनका जन्म 1969 में उत्तर प्रदेश के एक धार्मिक परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे भक्ति में डूबे रहे, मंदिरों में बैठकर रामायण और भगवद्गीता सुनते थे।
पाँच वर्ष की आयु से ही भजन‑कीर्तन और धार्मिक कथाओं में उनकी गहरी रुचि दिखती थी। अन्य बच्चे खेल‑कूद में व्यस्त रहते, अनिरुद्ध मंदिर में बैठकर भक्ति के सवालों पर विचार करते। जीवन, मृत्यु और ईश्वर के बारे में उनके मन में गहरी जिज्ञासा उभरती रही।
किशोरावस्था में ही वैराग्य की भावना प्रबल हो गई, और 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी माँ के सामने घर छोड़कर भगवान की खोज में निकलने का निर्णय लिया। परिवार ने इसे भावुक अवस्था माना, पर अनिरुद्ध का संन्यास का विचार अडिग रहा।
घर छोड़ने के बाद उनकी यात्रा काशी पहुँची, जहाँ गंगा स्नान, ध्यान और भक्ति की कठोर दिनचर्या ने उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियों से रूबरू कराया। इस दौरान उनकी भक्ति और वैराग्य की भावना और गहरी हुई।
काशी में एक संत के आग्रह पर रासलीला देखने जाने पर, राधा‑कृष्ण की लीला और भक्ति संगीत ने उनके मन पर गहरा असर डाला। लगभग एक महीने तक रोज़ रासलीला देखने जाने के बाद, वे वृंदावन की यात्रा पर निकल पड़े।
वृंदावन पहुँचकर उन्होंने राधावल्लभ परंपरा से संपर्क स्थापित किया और मोहित गोस्वामी जी से शरणागति मंत्र की दीक्षा प्राप्त की। बाद में गुरु श्री गौरांगी शरण जी महाराज के साथ लगभग दस वर्ष तक सेवा की, जिससे उनकी आध्यात्मिक परिपक्वता और संत के रूप में पहचान बनी।
प्रेमानंद महाराज के सत्संग में राधा‑कृष्ण की भक्ति, भगवद्गीता और जीवन के आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा होती है। वे जटिल आध्यात्मिक विचारों को साधारण भाषा में समझाने में माहिर हैं, और प्रेम, भक्ति तथा सेवा को प्रमुख विषय बनाते हैं।
2016 में उन्होंने श्रीहित राधा केली कुंज ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके माध्यम से धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ भोजन सेवा, स्वास्थ्य सहायता और भक्ति साहित्य का प्रसार भी किया जाता है।
सोशल मीडिया पर उनके सत्संग और जवाबों के वीडियो वायरल होने से उनकी लोकप्रियता बढ़ी। विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, हेमा मालिनी और ग्रेट खली जैसी हस्तियाँ भी उनके साथ जुड़ी हैं, जिससे उनके सत्संग का दर्शक वर्ग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत हुआ।
प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) की समस्या है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद वे अपने आध्यात्मिक कार्यों को जारी रखते हैं और अपने अनुयायियों को प्रेरित करते हैं।
कई भक्तों ने उन्हें किडनी दान करने का प्रस्ताव दिया, पर महाराज ने शरीर और बीमारी को ईश्वर की इच्छा में समर्पित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शारीरिक परेशानियों के बावजूद विश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना संभव है।
सत्संग और आध्यात्मिक कार्यों में लगे रहते हुए, प्रेमानंद महाराज ने स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद अपने अनुयायियों के साथ संवाद जारी रखा है, जिससे वे दर्शाते हैं कि आध्यात्मिक शक्ति शारीरिक सीमाओं से परे है।
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