Starlink Ban Countries: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का सैटेलाइट इंटरनेट 'स्टारलिंक' दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन कई देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कड़े नियमों के चलते इसे बैन या प्रतिबंधित कर रखा है। चीन, रूस, ईरान से लेकर नॉर्थ कोरिया तक इसे हरी झंडी नहीं मिली है। आइए जानते हैं उन देशों की पूरी लिस्ट जहां स्टारलिंक पर पाबंदी है और भारत में इसे अबतक मंजूरी न मिलने की असली वजह क्या है।
भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा 'स्टारलिंक' (Starlink) के लॉन्च में हो रही देरी से बौखलाए एलन मस्क लगातार तीखे बयान दे रहे हैं। मस्क का आरोप है कि भारत में मौजूद कुछ कॉर्पोरेट कंपनियां स्टारलिंक की राह में कांटा बन रही हैं। मस्क के हाल ही के बयानों को देखें तो उन्होंने इशारो-इशारों में भारतीय टाइकून मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Jio) पर निशाना साधा है। हालांकि, भारत सरकार ने भी साफ शब्दों में कहा है कि सुरक्षा मापदंड और नियम सभी कंपनियों के लिए समान हैं और उनका पालन करना अनिवार्य है।
लेकिन इस बहस के बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारत ही ऐसा देश है जहां स्टारलिंक का रोड़ा अटका है? जवाब है- नहीं। स्टारलिंक के अपने अवेलिबिलिटी मैप को देखें तो दुनिया के कई देशों में यह पूरी तरह बैन है या कंपनी स्थानीय सरकार से अप्रूवल मिलने का इंतजार कर रही है।
स्टारलिंक की वेबसाइट पर मौजूद अवेलिबिलिटी मैप में इसकी सर्विस का पूरा लेखा-जोखा मिलता है, जिसे कोई भी देख सकता है। इसके मुताबिक, दुनिया के अधिकांश देशों में स्टारलिंक की सर्विस उपलब्ध है। इसमें नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका के साथ-साथ यूनिइटेड किंगडम, फ्रांस, स्पेन, पौलैंड, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, यूक्रेन, कजाकस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जापान और साउथ कोरिया समेत कई देश शामिल हैं। भारत से सटे पड़ोसी देशों जैसे भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश में भी कंपनी अपनी सर्विस दे रही है।
दक्षिण पूर्व एशिया की बात करें तो वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिय और फिलिपींस में भी स्टारलिंक की सेवाएं उपलब्ध हैं। दक्षिण अफ्रिका में सेनेगल, चैड, केन्या, सोमालिया और जिंबावे में भी स्टारलिंक उपलब्ध है। खाड़ी देशों की बात करें तो ओमान, इराक और यमन में भी स्टारलिंक सर्विस दे रही है। वहीं, दर्जनों देश ऐसे भी हैं जहां स्टारलिंक को 'पेंडिंग रेगुलेटरी अप्रूवल' यानी सरकारी मंजूरी के इंतजार वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें भारत, पाकिस्तान, साऊदी अरब, तुर्किए और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं।
अब जानते हैं उन देशों के बारे में जहां एलन मस्क के स्टारलिंक पर पूरी तरह बैन है। स्टारलिंक पर चीन, रूस, ईरान और अफगानिस्तान में पूरी तरह पाबंदी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन देशों और क्षेत्रों में इसकी सर्विस पर रोक या सख्त प्रतिबंध है:
चीन में इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं पर सरकार का सख्त पहरा है। चीन ने स्टारलिंक को अपनी कमर्शियल सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने के लिए कोई कानूनी मंजूरी नहीं दी है।
रूसी प्रशासन ने अनधिकृत सैटेलाइट संचार सेवाओं पर कड़ी रोक लगा रखी है। इसलिए रूस में स्टारलिंक आधिकारिक तौर पर घरेलू कमर्शियल सर्विस के रूप में उपलब्ध नहीं है।
यहां कम्युनिकेशंस और इंटरनेट पर सरकार का 100% कंट्रोल है, जिसके चलते आम नागरिक कानूनी तौर पर स्टारलिंक का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
ईरान के सख्त सिक्योरिटी और टेलीकम्युनिकेशन फ्रेमवर्क के तहत वहां सैटेलाइट इंटरनेट टर्मिनल्स पर भारी प्रतिबंध है।
क्यूबा में भी टेलीकॉम सेक्टर पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है, जो स्टारलिंक के इस्तेमाल में सबसे बड़ी बाधा है।
यहां के सुरक्षा और रेगुलेटरी नियमों के कारण स्टारलिंक को नॉर्मल कमर्शियल एक्सेस नहीं मिला है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और स्थानीय टेलीकॉम नियमों के चलते यहां सैटेलाइट इंटरनेट देना बेहद जटिल है।
सैन्य शासन के कड़े टेलीकॉम कंट्रोल्स ने यहां अनधिकृत सैटेलाइट इक्विपमेंट्स पर रोक लगा रखी है।
भले ही ये चीन का हिस्सा हों, लेकिन इनके रेगुलेटरी नियम मेनलैंड चीन से अलग हैं। हालांकि, यहां भी स्टारलिंक की उपलब्धता को कानूनी कसौटी पर परखा जा रहा है।
सरकारों द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट पर बैन लगाने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
स्टारलिंक सीधे सैटेलाइट से जुड़ता है, जिससे यह लोकल ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर को बायपास कर देता है। जिन देशों में इंटरनेट सेंसरशिप बहुत सख्त है (जैसे चीन और ईरान), वहां सरकारें इसे अपने सूचना नियंत्रण सिस्टम के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखती हैं।
युद्ध या संघर्ष के समय सैटेलाइट इंटरनेट गेम-चेंजर साबित होता है, खासकर जब जमीन पर मौजूद फाइबर नेटवर्क तबाह हो जाएं। सरकारें विदेशी तकनीक और बिना परमिशन वाले कम्युनिकेशन सिस्टम से घबराती हैं, क्योंकि इसका इस्तेमाल मिलिट्री ऑपरेशन्स में भी हो सकता है।
किसी भी देश में कमर्शियल सर्विस शुरू करने के लिए स्टारलिंक को स्पेक्ट्रम परमिशन, लोकल कंपनियों के साथ साझेदारी या घरेलू निवेश के नियमों का पालन करना होता है। इन शर्तों को पूरा किए बिना सर्विस शुरू नहीं की जा सकती।
भारत में स्टारलिंक बैन नहीं है, लेकिन इसके कमर्शियल लॉन्च में रेगुलेटरी पेंच फंसे हुए हैं। भारत का सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट सरकारी लाइसेंसिंग, स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और सख्त सुरक्षा नियमों के अधीन है। एलन मस्क की कंपनी को अभी टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) से फाइनल सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार है।
स्टारलिंक अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की बहुचर्चित कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क है। यह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स के जरिए दुनिया के दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाता है। तकनीकी रूप से स्टारलिंक का नेटवर्क लगभग पूरी दुनिया को कवर करने में सक्षम है, लेकिन किसी भी देश में इसकी सर्विस शुरू होने के लिए सिर्फ तकनीक काफी नहीं है। इसके लिए सरकारी मंजूरी, टेलीकॉम नियमों का पालन और स्थानीय ऑपरेटिंग लाइसेंस का होना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि दुनिया के कई बड़े देशों ने स्टारलिंक पर पाबंदी लगा रखी है या इसके कमर्शियल इस्तेमाल को रोक रखा है।
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