अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प को बड़े राजनीतिक झटके मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी टैरिफ नीति है। क्या मतदाताओं की नाराज़गी और कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत ट्रम्प को व्यापार‑नीति पर दोबारा सोचने पर मजबूर करेगी? क्या इससे भारत‑अमेरिका की लंबी अवधि की ट्रेड डील भी प्रभावित होगी?
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजीव श्रीवास्तव का मानना है कि चुनाव के परिणाम ट्रम्प पर आर्थिक नीतियों में बदलाव का दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे भारत के साथ FTA (मुक्त व्यापार समझौता) की बातचीत को नई गति मिल सकती है।
इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में जीत हासिल की है, जिसे ट्रम्प की आर्थिक रणनीति के खिलाफ बड़ा संदेश माना जा रहा है। महंगाई, रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और जीवनयापन की लागत अमेरिकी मतदाताओं की प्रमुख चिंता बन गई है। ट्रम्प की आक्रामक टैरिफ नीति ने भारत सहित कई मित्र देशों के साथ व्यापारिक तनाव को भी तेज किया है।
ट्रम्प को टैरिफ नीति पर पुनर्विचार क्यों करना पड़ सकता है? श्रीवास्तव बताते हैं कि चुनावी परिणामों के बाद राष्ट्रपति को अपनी आर्थिक नीतियों को मतदाताओं की उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाना पड़ेगा। इससे भारत‑अमेरिका के बीच FTA की बातचीत में सकारात्मक बदलाव की संभावना बनती है।
भारत‑अमेरिका ट्रेड डील की अब तक की प्रगति: फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम फ्रेमवर्क घोषित किया, जिसमें कुछ भारतीय उत्पादों पर 18 % रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। लेकिन यह प्रस्ताव कानूनी अड़चनें और सुप्रीम कोर्ट के ‘Learning Resources Inc. बनाम ट्रम्प’ फैसले के कारण लागू नहीं हो सका, जहाँ कोर्ट ने कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
इसके बाद जुलाई 2026 में सेक्शन 301 के तहत कुछ भारतीय वस्तुओं पर 10 % अतिरिक्त ड्यूटी लागू की गई, साथ ही कई छूट भी दी गई। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, लगभग 45 % निर्यात (जैसे जेनेरिक दवाइयाँ, स्मार्टफ़ोन) इस अतिरिक्त ड्यूटी से मुक्त रखे गए हैं, जबकि बाकी 55 % पर यह शुल्क लागू है।
रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 % दंडात्मक टैरिफ को फरवरी 2026 में हटा दिया गया। अक्टूबर में ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों को लक्षित सेकेंडरी टैरिफ और Graham Act के तहत कुछ छूट दी गई।
इन बदलावों के बावजूद भारत‑अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट अभी भी अधूरा है। बाजार पहुँच, कृषि निर्यात, टैरिफ छूट और अमेरिकी व्यापार नीति जैसे मुद्दों पर मतभेद बना हुआ है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते का पहला चरण अब अंतिम कानूनी ड्राफ्टिंग स्तर पर है, लेकिन भारत निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बराबर टैरिफ लाभ दिलाने पर ज़ोर दे रहा है।
रक्षा साझेदारी पर असर? श्रीवास्तव का मानना है कि ट्रम्प की घरेलू राजनीति का रक्षा सहयोग पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। भारत‑अमेरिका के रणनीतिक हितों के चलते रक्षा सहयोग की गति जारी रहने की संभावना है, विशेषकर तेजस एमके‑1ए के लिए GE इंजन की समय पर आपूर्ति को दोनों पक्ष महत्वपूर्ण मानते हैं।
अमेरिकी चुनाव का भारत के लिए महत्व: डेमोक्रेटिक पार्टी की कांग्रेस जीत का मतलब यह नहीं कि ट्रम्प की व्यापार नीति तुरंत बदल जाएगी, लेकिन महंगाई और जीवनयापन की लागत से बढ़ते दबाव से ट्रम्प प्रशासन को अधिक व्यावहारिक और सहयोगी रुख अपनाना पड़ सकता है। भारत को अब उम्मीद है कि अमेरिकी टैरिफ नीति में लचीलापन आएगा, जिससे निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में स्थिर और प्रतिस्पर्धी अवसर मिलें।
निष्कर्ष: अब सवाल यह है कि चुनावी झटके के बाद ट्रम्प अपनी टैरिफ नीति में बदलाव करेंगे या नहीं, और वह बदलाव भारत‑अमेरिका ट्रेड डील तथा रक्षा सहयोग की दिशा को कैसे प्रभावित करेगा।
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