एसीपी विवेक भगत दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) हैं, जिनका नाम जंतर‑मंतर के दो अलग‑अलग प्रदर्शनों के बीच चर्चा में आया। एक बार वे खुद भीड़‑हिंसा में घायल हुए, और दूसरी बार उनके खिलाफ तीन महिला पत्रकारों के आरोप सामने आए।
विवेक भगत कनॉट प्लेस के उपमंडल पुलिस अधिकारी के रूप में तैनात हैं और DANIPS कैडर से आते हैं। 2017 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास कर 967वीं रैंक हासिल की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग में है, उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की।
जुलाई 2024 में जंतर‑मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान, भगत स्वयं घायल हो गए। उस दिन वे कनॉट प्लेस के एसीपी के रूप में ड्यूटी पर थे और जंतर‑मंतर के इलाक़े में कार्यरत थे। भीड़ ने पानी की बोतलें फेंकीं और पुलिस के खिलाफ नारे लगाते हुए उन्हें मारपीट की। भगत ने बताया कि उन्हें सिर से खून बहने लगा और हाथ‑पैर में चोटें आईं।
अक्टूबर 2024 में जंतर‑मंतर के पास फिर से प्रदर्शन हुआ, इस बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ। तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ बदसलूकी और मारपीट का दावा किया। एक पत्रकार ने तो एसीपी को अनुचित तरीके से छूने का आरोप भी लगाया। इन शिकायतों को अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने 5 अक्टूबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने के बाहर जुटकर मांग की कि घटना पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जाए। उनका दावा था कि उन्हें घटना के दिन ही फुटेज मांगा गया था, पर 24 घंटे बाद ही मिलने का कहा गया। कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसी बीच दिल्ली सरकार ने 12 DANIPS अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद का वर्तमान कार्यभार देने का आदेश जारी किया, जिसमें विवेक भगत का नाम भी था।
भगत ने अनुरोध किया कि महिला पत्रकारों से जुड़े आरोपों की पूरी जांच होने तक वह यह अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। इसके बाद सरकार ने आदेश में बदलाव किया और शेष 11 अधिकारियों के लिए कार्यभार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
सरकार ने स्पष्ट किया कि 12 अधिकारियों को वर्तमान कार्यभार देने का प्रस्ताव 25 अगस्त से शुरू हुआ था, अर्थात् यह निर्णय आरोपों के सामने आने से पहले ही चल रहा था। यह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिससे कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता और अधिकारी नियमित पद पर तैनात अधिकारी के वैधानिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते।
सोशल मीडिया पर एसीपी विवेक भगत से जुड़ा एक फर्जी पोस्टर सामने आया, जिसमें उन्हें एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी करते हुए दिखाया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह पोस्टर AI की मदद से तैयार किया गया था और कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर साझा किया गया। पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, और जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोस्टर किस खाते से साझा किया गया और पीछे कितने लोग हैं।
जुलाई के प्रदर्शन के दौरान, भगत ने खुद भीड़‑हिंसा में घायल होने की बात कही। उस समय वे कनॉट प्लेस के एसीपी थे और जंतर‑मंतर के इलाके में ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि दिन की ड्यूटी के बाद वे शाम की पाली में भी ड्यूटी कर रहे थे, और वे रीगल भवन से संसद मार्ग होते हुए टॉल्स्टॉय मार्ग पर जा रहे थे। उनके साथ पाँच‑छह पुलिसकर्मी, प्रशिक्षु एसीपी रोहित और परिचालक नवनीत भी थे।
पानी की बोतलें फेंकी गईं, पुलिस के खिलाफ नारे लगे, और एक पुलिसकर्मी भीड़ में फंस गया। भगत ने बताया कि उन्हें काफी मारा‑पीटा गया, सिर से खून बहने लगा, और चेहरे पर चोटें आईं। अस्पताल की रिपोर्ट में उनके दोनों हाथों, पैरों और कंधे पर कई चोटें और सिर के पीछे सूजन पाई गई।
इस प्रकार, एसीपी विवेक भगत की कहानी जंतर‑मंतर के प्रदर्शनों के बीच दो अलग‑अलग घटनाओं से जुड़ी है—पहली में वे स्वयं घायल हुए, और दूसरी में उनके खिलाफ महिला पत्रकारों के आरोप लगे। वर्तमान में पुलिस और सरकार दोनों ही इस मामले की जाँच और संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
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