इमेज स्रोत, Getty Images
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर मुंबई में रविवार को 'गर्जना मोर्चा' निकाला गया. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में यह मोर्चा निकाला गया.
इस मोर्चे में सभी दलों से शामिल होने की अपील की गई थी. किसी भी पार्टी का झंडा न लेकर हाथ में तिरंगा लेकर यह मोर्चा निकाला गया.
रविवार सुबह दस बजे से इस मोर्चे में कई वोटर भी शामिल हुए जिनके नाम को लेकर एसआईआर की प्रक्रिया में समस्याएं पैदा हुई थीं.
मुंबई के मेट्रो सिनेमा इलाक़े में इस मोर्चे के लिए बड़ी संख्या में लोगों के मौजूद रहे.
इमेज स्रोत, Shivsena YT Screengrab
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे इस मोर्चे के लिए इलाक़े के एक होटल में पहुंचे थे.
इसके अलावा कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं के साथ महाविकास अघाड़ी के कुछ अन्य नेता भी मोर्चे के लिए मौजूद थे.
इमेज स्रोत, ANI
प्रदर्शन में पहुंचे राज ठाकरे ने कहा, "मैं 2017-18 से बता रहा हूं कि वोट चोरी हो रही है. चुनाव आयोग को ईवीएम और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को लेकर कदम उठाना चाहिए. मैं कह रहा था कि इसके लिए चुनावों का बहिष्कार किए बिना दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा."
उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में बीजेपी की जीत हुई, तब लोगों में कोई उत्साह नहीं था. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव तक छह महीने में 40 से 60 लाख मतदाता बढ़ा दिए गए. सत्ता में और विपक्ष में किसे बैठाना है, यह मतदाताओं को तय करना है, चुनाव आयोग को नहीं."
राज ठाकरे ने आरोप लगाया, "सत्ता जाने पर क्या होगा, इसका डर ही उनमें दिखाई नहीं देता. सभी अदालतों, मीडिया और चुनाव आयोग को अपने क़ब्जे में ले लिया गया है. आपके सत्ता से जाने के बाद जो सत्ता में आएंगे, अगर वे भी ऐसा ही व्यवहार करें तो क्या करेंगे?"
राज ठाकरे ने मांग की कि महाराष्ट्र में अब तक हुए एसआईआर को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए.
उन्होंने मांग की, "वोटिंग मशीन बंद होनी चाहिए और चुनाव बैलेट पेपर पर होने चाहिए. तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा. फिर किसी की भी सत्ता आए, कोई आपत्ति नहीं है."
इमेज स्रोत, Shivsena YT Screengrab
देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
मुख्य चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ इस प्रदर्शन में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिव सेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता उद्धव ठाकरे ने कहा, "यह लड़ाई देश की यानी आज़ादी की लड़ाई है. देशभर के 13 करोड़ मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया."
उन्होंने कहा, "यह लड़ाई किसी एक पार्टी, व्यक्ति या जाति की नहीं है. ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पक्षपातपूर्ण तरीके से हुई है. राहुल गांधी ने नियुक्ति का विरोध किया था."
उद्धव ठाकरे ने इस मंच से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की भी चर्चा की.
उन्होंने कहा, "सरदार वल्लभभाई पटेल ने मराठवाड़ा को देश में शामिल करने के लिए सेना भेजी थी. अमित शाह ने बंगाल में एक महिला के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी को जिताने के लिए सेना भेजी."
उद्धव ठाकरे ने कहा, "वोट की चोरी की ही, लेकिन राम मंदिर की दानपेटी और पार्टियों की भी चोरी की. महाराष्ट्र से हटाए गए दो करोड़ मतदाताओं में कितने बांग्लादेशी हैं, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए. अगर बांग्लादेशियों के नाम पर मतदाताओं का अधिकार छीना जा रहा है तो आवाज़ उठानी पड़ेगी."
उद्धव ठाकरे ने कहा, "हिटलर के जाने के बाद उसके साथ पाप करने वालों को ढूंढ-ढूंढकर सज़ा दी गई. बीजेपी और उनके साथ के अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए."
ठाकरे बंधुओं की ओर से आयोजित प्रदर्शन के मौक़े पर एसआईआर की प्रक्रिया और ज्ञानेश कुमार के विरोध में आए कुछ नागरिकों ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए विरोध के अपने कारण बताए.
उन्होंने कहा कि वे मतदाता सूची में नाम से जुड़ी समस्याओं के कारण इसमें शामिल हुए हैं.
बीबीसी मराठी से बात करते हुए उन्होंने अपने नाम से जुड़े कुछ दावे किए हैं. (हालांकि बीबीसी ने अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है.)
प्रदर्शन में पहुंचे हर्षल चिपलूणकर ने कहा, "एसआईआर से मेरा नाम हटाने के लिए फॉर्म भरा गया. मैंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से शिकायत की तो उनके दबाव के बाद बीएलओ को नाम जोड़ना पड़ा. जब सभी दस्तावेज़ थे, तब भी मेरा नाम हटा दिया गया था. मेरे इलाक़े के ढाई हज़ार मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं."
इमेज स्रोत, BBC/Shahid Sheikh
वहीं कृष्णन नाम के शख़्स का दावा है, "मेरे पिता के नाम में ग़लती है. यह छोटी बात है. लेकिन कई लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है. अगर आडवाणी, केजरीवाल, नीलकेणी के नाम में दिक्कतें आती हैं तो शोषित और वंचित लोगों का क्या होगा. इसलिए मैं विरोध जताने आया हूं."
जबकि प्रदर्शन में शामिल प्रशांत गुप्ते का दावा है, "एसआईआर के फॉर्म भरने के बाद मां का नाम पुरानी सूची में नहीं था, तो हमारे नाम ही नई सूची में नहीं आए. अब फॉर्म 6 भरने के लिए कहा जा रहा है."
"पहले हमारा राशन कार्ड सरेंडर करने के लिए कहा, गैस सब्सिडी हटा दी. यानी देश में हमारी पहचान ख़त्म होती जा रही है. हम महाराष्ट्र के हैं, भारतीय हैं या बांग्लादेशी हैं, इसका जवाब ज्ञानेश कुमार को देना चाहिए."
इमेज स्रोत, ANI
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में सामने आई कुछ बातों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर हैं. विपक्षी दल उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
हालाँकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाते रहे हैं.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं.
रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन मुद्दे उठाए गए थे.
पहला, एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम शामिल करने और हटाने को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाई गई आपत्ति.
दूसरा, फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर दर्ज की गई आपत्ति.
तीसरा, ईसीआईनेट (ECINet) के केंद्रीकरण को लेकर आपत्ति. रिपोर्ट के मुताबिक़, इसकी वजह से स्थानीय चुनाव अधिकारियों को इसका एक्सेस नहीं मिल रहा था.
इमेज स्रोत, ANI
इसके अलावा, 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में गोवा का उदाहरण दिया गया था. इसमें कहा गया था कि 97 मतदाता पात्र पाए जाने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए थे.
इस रिपोर्ट के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, वामपंथी दलों, आम आदमी पार्टी के नेताओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया. वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी शुक्रवार को मुंबई में प्रदर्शन किया.
शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क मैदान इलाक़े में प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत 400 से 500 अज्ञात सीजेपी समर्थकों के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
इन लोगों के ख़िलाफ़ बिना अनुमति ग़ैरक़ानूनी तरीके से भीड़ जमा करने, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने, भीड़ जमा करके नारेबाज़ी करने, यातायात में बाधा डालने और पुलिस के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है.
महाराष्ट्र में किसी मुद्दे को लेकर ठाकरे बंधुओं का एक साथ आना सियासी तौर पर अहम घटना मानी जाती है. इससे पहले भी शिक्षा मंत्री रह चुके धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में ठाकरे बंधु एक साथ आकर आंदोलन कर चुके हैं.
अब इंडिया गठबंधन की ओर से 6 अक्तूबर को सभी विपक्षी दलों के नेता और सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
शॉर्ट वीडियो का अंत
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!