उत्तर प्रदेश के बिजनौर में शनिवार को तेज बारिश के दौरान सड़क पर पानी भरने के कारण खुले नाले का अंदाजा नहीं होने से नाले में गिरकर 13 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। करीब 500 मीटर दूर किशोर को पाइप में अटका देख लोग दौड़े, लेकिन तब तक किशोर दम तोड़ चुका था। हादसे का पता लगते ही परिवार में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों ने खुले नाले को ढंकने और जल निकासी की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है। इसके पहले जुलाई महीने में बुलंदशहर में भी ऐसा ही एक हादसा सामने आया था। वहां भारी बारिश के दौरान स्कूल से घर लौट रही 11 साल की एक छात्रा चारू कश्यप खुले नाले के तेज बहाव में बह गई थी। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, नगर पालिका की टीमें 5 दिनों तक 30 किलोमीटर के दायरे में सर्च ऑपरेशन चलाती रहीं। हादसा 28 जुलाई को हुआ था जिसके पांचवें दिन काली नदी में गांव चावली के पास से चारू की लाश मिली थी। बच्ची की लाश जलकुंभी में फंसा हुई थी।
किरतपुर के मोहल्ला अंसारियान निवासी अफजल का पुत्र 13 वर्षीय हम्माद शनिवार को घर से ईदगाह रोड की ओर जा रहा था। इस्लामिया इंटर कॉलेज के गेट के सामने तेज बारिश के कारण सड़क पर पानी भरा हुआ था। इसी दौरान हम्माद खुले नाले में गिर गया और तेज बहाव होने के चलते वह पानी में बह गया। कॉलेज गेट के सामने सब्जी की ठेली लगाने वालों ने किशोर को नाले में गिरते देखा तो शोर मचा दिया। लोगों ने तलाश शुरू की तो करीब 500 मीटर दूर नाले में एक पाइप से हम्माद अटका मिला। लोगों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक हम्माद की मौत हो चुकी थी।
बताया गया है कि हम्माद दो भाइयों में एक था। उसके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाला ढंका होता और जल निकासी की उचित व्यवस्था होती तो हादसा टल सकता था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से खुले नाले को ढंकने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की।
बुलंदशहर में मासूम चारू के बाद अब बिजनौर में हम्माद की जान इसी तरह के हादसे में गई है। ये दोनों बच्चे तो अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी मौत कई ऐसे सवाल छोड़ गई है जिनका जवाब बुलंदशहर और बिजनौर ही हर जिले के लोग जानना चाहते हैं। आखिर खुले नाले को सुरक्षित क्यों नहीं बनाया गया? अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो क्या आज चारू और हम्माद अपने परिवार के बीच होते? बारिश के दौरान खुले नाले मौत का जाल बन गए, लेकिन जिम्मेदार विभाग समय रहते उन्हें ढकने या बैरिकेडिंग करने में क्यों विफल रहे?
नगर पालिका हर साल नालों की सफाई और सुरक्षा पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती है, फिर भी ऐसी नौबत क्यों आई कि दो बच्चे खुले नाले में बह गए। लोगों के बीच चर्चा है कि यदि नाले पर मजबूत ढक्कन, रेलिंग या पर्याप्त चेतावनी के इंतजाम होते तो शायद यह हादसा टल सकता था। अब लोग यह भी पूछ रहे हैं कि इस घटना की जिम्मेदारी कौन तय करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!