राजस्थान के मशहूर लोक और प्लेबैक सिंगर मामे खान ने मणिपुरी संगीतकार और गिटारिस्ट चोंगथम विक्रम सिंह की मौत पर दुख जताया है. दिल्ली में विक्रम सिंह की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने की खबर ने म्यूजिक इंडस्ट्री को झकझोर दिया है. 55 साल के विक्रम सिंह की मौत के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकार उन्हें याद कर रहे हैं और परिवार के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं.
मामे खान ने सिंगर चिन्मयी त्रिपाठी की इंस्टाग्राम स्टोरी को रीशेयर किया. पोस्ट में विक्रम सिंह की मौत पर विरोध और उनके परिवार को न्याय दिलाने की अपील की गई थी. चिन्मयी ने लिखा था कि यह घटना बेहद चौंकाने वाली है और विक्रम सर को हमेशा याद किया जाएगा. मामे खान ने भी इस पोस्ट को शेयर कर अपनी संवेदना जाहिर की.
मामे खान के साथ किया था यादगार काम
चोंगथम विक्रम सिंह सिर्फ एक गिटारिस्ट नहीं थे, बल्कि मणिपुर के रॉक म्यूजिक सीन का जाना-पहचाना नाम थे. साल 2018 में उन्होंने राजस्थान के मशहूर लोक गायक मामे खान के साथ भी काम किया था.
दोनों एक म्यूजिक वीडियो में साथ नजर आए थे, जिसमें राजस्थानी लोकगीत 'लाल पीली अंखियां' को नए अंदाज में पेश किया गया था. गाने में राजस्थानी लोक संगीत के साथ फ्लेमेंको और वेस्टर्न म्यूजिक का फ्यूजन देखने को मिला था. वीडियो में विक्रम सिंह गिटार बजाते नजर आए थे, जबकि मामे खान ने अपनी खास आवाज से गाने को रंग दिया था.
आज वही म्यूजिक वीडियो दोनों कलाकारों की दोस्ती और साथ काम करने की एक याद बनकर रह गया है.
आखिर कौन थे चोंगथम विक्रम सिंह?
चोंगथम विक्रम सिंह मूल रूप से मणिपुर के इम्फाल वेस्ट के थांगमेइबंद लौरुंग पुरेल लीकाई इलाके से थे. उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में मणिपुर के उभरते रॉक म्यूजिक सीन से अपने करियर की शुरुआत की.
विक्रम सिंह ने अपने म्यूजिकल सफर की शुरुआत अल्ट्रा वायर्स के साथ की. इसके बाद वह फीनिक्स के लीड गिटारिस्ट बने. फीनिक्स को उस दौर के मणिपुर के प्रभावशाली रॉक बैंड्स में गिना जाता था. बाद में उन्होंने एक और चर्चित स्थानीय बैंड इस्टर्म डार्क के साथ भी परफॉर्म किया. जिस दौर में मणिपुर में रॉक म्यूजिक अपनी अलग पहचान बना रहा था, उस दौर के विक्रम सिंह एक अहम हिस्सा थे.
शोहरत से दूर, लेकिन काम के पक्के थे विक्रम
फीनिक्स के फ्रंटमैन विवेक शर्मा ने विक्रम सिंह को याद करते हुए बताया कि वह ऐसे संगीतकार थे जिन्हें लाइमलाइट की ज्यादा परवाह नहीं थी. वह पर्दे के पीछे रहकर काम को बेहतर बनाने में यकीन रखते थे.
विवेक शर्मा के मुताबिक, जब भी किसी काम में सटीकता, परफेक्शन और चीजों को सही तरीके से पूरा कराने की जरूरत होती थी, विक्रम सबसे आगे खड़े मिलते थे. वह बिना किसी पहचान या तारीफ की उम्मीद के अपना काम करते थे. यही वजह थी कि उनके साथी उन्हें सिर्फ एक शानदार संगीतकार नहीं, बल्कि एक करीबी दोस्त और बड़े भाई जैसा मानते थे.
दिल्ली आए तो संगीत सिखाने में जुट गए
बाद में विक्रम सिंह दिल्ली आ गए. बताया जाता है कि उन्होंने राजधानी में करीब 17 साल बिताए. यहां उन्होंने अपना म्यूजिक स्कूल शुरू किया और नई पीढ़ी के कलाकारों को संगीत सिखाने लगे. वह घर से भी छात्रों को म्यूजिक की ट्रेनिंग देते थे और दिल्ली स्कूल ऑफ म्यूजिक में भी पढ़ाते थे.
उनका काम सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं था. वह रॉक एंड रूट्स प्रोजेक्ट से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने मामे खान के साथ काम किया. इसके अलावा अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कॉन्सर्ट और म्यूजिक शोज में भी उन्होंने परफॉर्म किया.
संगीत उनके परिवार की रगों में था
विक्रम सिंह का परिवार भी संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ है. उनकी मां चोंगथम कमला मणिपुर की जानी-मानी शास्त्रीय और प्लेबैक सिंगर हैं. कमला ने 1972 में आई 'मतामगी मणिपुर' में अपनी आवाज दी थी, जिसे मणिपुर की पहली फीचर फिल्म माना जाता है. वह ऑल इंडिया रेडियो, इम्फाल की अप्रूव्ड ब्रॉडकास्ट सिंगर भी रही हैं. मणिपुरी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा रही कि उन्हें कई बार 'मणिपुरी फिल्म इंडस्ट्री की लता मंगेशकर' तक कहा गया.
विक्रम सिंह के परिवार का कनेक्शन फिल्मों से भी रहा. उनकी कजिन लक्ष्मीप्रिया देवी फिल्म Boong की निर्देशक हैं, जिसे BAFTA अवॉर्ड जीतने वाली भारतीय फिल्मों में ऐतिहासिक पहचान मिली. विक्रम सिंह के परिवार में उनकी पत्नी ज्योत्सना और 20 साल का बेटा याइफाबा है, जो लॉ की पढ़ाई कर रहा है.
आखिर उस रात हुआ क्या था?
विक्रम सिंह की मौत से जुड़ी घटना रविवार देर रात दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी इलाके किलोकरी में उनके घर के बाहर हुई. पुलिस और परिवार के मुताबिक, उनके घर के आसपास कुछ लोग काफी शोर कर रहे थे. इनमें डिलीवरी वर्कर्स और आसपास के कुछ खाने-पीने के ठिकानों से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं.
रिपोर्ट्स हैं कि शोर से परेशान होकर विक्रम नीचे गए और लोगों से शोर बंद करने को कहा. इसके बाद विवाद बढ़ गया और उन पर हमला कर दिया गया. पुलिस द्वारा देखे गए CCTV फुटेज में कथित आरोपियों को घटना के बाद बिल्डिंग से बाहर जाते देखा गया. करीब 10 मिनट बाद परिवार के लोग विक्रम को अस्पताल ले जाते नजर आए.
उनके बेटे याइफाबा ने उन्हें तुरंत होली फैमिली अस्पताल पहुंचाया, लेकिन हालत बेहद गंभीर थी. अस्पताल की रिपोर्ट में मौत की वजह ब्लंट फोर्स ट्रॉमा से हुआ haemorrhagic shock बताया गया. पुलिस ने इस मामले में सात वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है. इस घटना के बाद दिल्ली में रह रहे नॉर्थईस्ट समुदाय के लोगों ने भी निष्पक्ष और तेजी से जांच की मांग की है.
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