बाराबंकी केवल अवध के एक प्रशासनिक जिले के रूप में नहीं, बल्कि सूफ़ी संस्कृति, धार्मिक आस्था, स्वतंत्रता संग्राम और राजनीतिक इतिहास का समृद्ध केंद्र है। देवा शरीफ में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह, रामनगर के लोधेश्वर महादेव मंदिर और किंतूर के पारिजात वृक्ष इस विविध पहचान के प्रमुख प्रतीक हैं।
जिला उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में स्थित है, मुख्यालय बाराबंकी शहर में है और यहाँ हिंदी के साथ अवधी भाषा का भी प्रचलन है। जिला प्रशासन के अनुसार, कुल क्षेत्रफल 3,891.5 वर्ग किलोमीटर है, और कृषि, ऐतिहासिक स्थल एवं सांस्कृतिक परम्पराएँ इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं।
बाराबंकी नाम की उत्पत्ति पर कई कहानियाँ प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, भगवान बाराह से जुड़ी कथा के कारण इस स्थान को पहले ‘बान्हन्या’ कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर बाराबंकी बना। प्रशासनिक इतिहास बताता है कि मूल रूप से जिला मुख्यालय दरियाबाद में था, जिसे 1859 में नवाबगंज (आज का बाराबंकी) स्थानांतरित किया गया।
देवा शरीफ, बाराबंकी के देवा कस्बे में स्थित, हाजी वारिस अली शाह की दरगाह के कारण सूफ़ी एकता का प्रतीक बन गया है। उनकी शिक्षाएँ धर्मों के बीच भाईचारे और मानवता पर जोर देती हैं, जिससे विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ श्रद्धा के साथ आते हैं। वार्षिक देवा मेला भी इस सांस्कृतिक एकता को उजागर करता है।
रामनगर में स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर, विशेषकर सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ आकर्षित करता है। यह मंदिर स्थानीय धार्मिक परम्पराओं का प्रमुख केंद्र है। इसी प्रकार किंतूर का पारिजात वृक्ष प्राकृतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहाँ कई मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं।
बाराबंकी ने 1857 के विद्रोह से लेकर 1920‑30 के असहयोग, खिलाफत, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन तक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। राजा बलभद्र सिंह छेहलारी, राजा गुरु बख्श सिंह आदि स्थानीय नायकों ने अंग्रेज़ शासन के खिलाफ संघर्ष किया और कई बार जेल भी गए।
राजनीति में बाराबंकी ने कई उल्लेखनीय व्यक्तियों को जन्म दिया। रफ़ी अहमद किदवई, जो मसौली क्षेत्र के मूल निवासी थे, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के शुरुआती संचार मंत्री रहे। मोहसिना किदवई भी सामाजिक‑राजनीतिक क्षेत्र में प्रमुख हस्ती थीं। आज बाराबंकी लोकसभा सीट अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है; 2024 के चुनाव में कांग्रेस के तनुज पुनिया इस सीट से निर्वाचित हुए।
जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं: बाराबंकी, दरियाबाद, हैदरगढ़, कुर्सी, रामनगर और जैदपुर। इनमें से पाँच क्षेत्र बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है। रुदौली विधानसभा के कुछ बूथ भी बाराबंकी की सीमा में आते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में परिणाम इस प्रकार रहे: बाराबंकी में सपा के धर्मराज सिंह यादव ने बीजेपी की राजकुमारी मौर्या को हराया; दरियाबाद में भाजपा के सतीश शर्मा ने जीत हासिल की; हैदरगढ़ में बीजेपी के दिनेश रावत ने सपा के राम मगन को पराजित किया; कुर्सी में बीजेपी के सकेंद्र प्रताप ने सपा के राकेश कुमार को नजदीकी अंतर से मात दी; रामनगर में सपा गठबंधन के फरीद महफूज किदवई ने भाजपा के शरद अवस्थी को 261 वोटों से हराया; जैदपुर में सपा के गौरव रावत ने बीजेपी के अंबरीश रावत को 2,982 वोटों से मात दी।
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