कांग्रेस और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की अगुवाई में बनायी गई डेमोग्राफी कमीशन ने राज्यों से जन्म, प्रॉपर्टी लेन‑देनों, वाहन खरीद और जमीन‑स्वामित्व से जुड़ी धर्म‑आधारित जानकारी मांगी है। कांग्रेस ने इस पैनल के एजेंडे को "साफ़ तौर पर खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण" कहा।
कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज एवं महासचिव जयराम रमेश ने "द हिंदू" की एक रिपोर्ट साझा की, जिसमें बताया गया है कि हाई‑लेवल कमेटी (HLCDC) ने पिछले 15 वर्षों के जन्म, वाहन पंजीकरण, स्कूल में दाखिले और प्रॉपर्टी लेन‑देनों के साथ‑साथ धार्मिक ढांचों की जिलेवार जानकारी, आधार, वोटर‑ID और राशन‑कार्ड पंजीकरण में असामान्य वृद्धि का विवरण भी मांगा है।
रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने अनुसूचित जनजाति समुदायों में धर्म‑परिवर्तन पर खुफिया जानकारी, चल रहे डिटेंशन सेंटरों की सूची और अन्य विवरण भी माँगे हैं।
डेमोग्राफी कमीशन क्या है? हाई‑लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज (HLCDC) का गठन केंद्र सरकार ने 26 May 2026 को किया था। इसे आम भाषा में डेमोग्राफी कमीशन कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में "High‑powered Demography Mission" की घोषणा की थी। इस पैनल का अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं। सदस्य में जनगणना आयुक्त, दुर्गा शंकर मिश्रा, बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं।
समिति का मुख्य काम अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना है। यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों में आबादी के परिवर्तन के पैटर्न, कारणों और प्रभाव का विश्लेषण करेगी, साथ ही सीमा‑प्रबंधन, अवैध प्रवासियों की पहचान और केंद्र‑राज्य समन्वय पर नीति‑सुझाव देगी। रिपोर्ट एक साल के भीतर प्रस्तुत करनी है।
ओवैसी ने कहा, "जब हम मोदी सरकार से मुस्लिम समुदाय की तालीमी, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर आँकड़े माँगते थे, तो सरकार झट से अपना मुंह फेर लेती थी। अब अमित शाह का डेमोग्राफी कमीशन राज्य‑स्तर पर यह पूछ रहा है कि किस धर्म के लोगों ने कितनी गाड़ियां खरीदीं, किसके पास कितनी जमीन है, वगैरह।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कमीशन का उद्देश्य आंकड़ों को इस तरह मोड़‑मरोड़ कर पेश करना है कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा सके और उनके अधिकार छीन लिए जाएँ।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कई राज्य सरकारें इस पैनल के सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, क्योंकि सरकारी विभागों के पास धर्म‑आधारित डेटा का विस्तृत रिकॉर्ड नहीं होता।
कमीशन ने 1 July को गृह मंत्री अमित शाह को बताया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जानकारी जुटाने के लिए प्रश्नावली तैयार कर ली गई है और जल्द ही ग्राउंड‑लेवल अध्ययन के लिए दौरे शुरू किए जाएंगे।
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