एशियन गेम्स में भारत की शूटिंग से अक्सर पदकों की गारंटी जैसी उम्मीद रहती है, लेकिन नागोया में अब तक एक भी गोल्ड नहीं आया है। पाँच दिन में 4 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज तो मिल चुके हैं, पर उस खेल से जहाँ भारत को सबसे अधिक पदक मिलने की आशा थी, अब सवाल ज्यादा और जवाब कम दिख रहे हैं।
गुरुवार को पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल टीम ने निराशा जताई। कमलजीत, आकाश भारद्वाज और केदारलिंग उचागनवे के तीनों ने आठ निशानेबाजों वाले फाइनल में जगह नहीं बनाई। कमलजीत केवल एक अंक से फाइनल से चूके, उन्होंने 580 अंक बनाए और नौवें स्थान पर रहे। भारद्वाज 579 अंक के साथ 11वें और केदारलिंग 568 अंक पर 35वें स्थान पर रहे। टीम का कुल स्कोर 1727 रहा, जिससे भारत चौथे स्थान पर रहा, लेकिन सिर्फ तीन अंक से कांस्य पदक से दूर। जापान ने 1730 अंक कर भारत को पीछे छोड़ दिया।
यह सिर्फ फाइनल में जगह न बन पाने की बात नहीं है, बल्कि छोटे अंतर ने टीम को मेडल से भी वंचित कर दिया।
उसी दिन मिश्रित स्कीट इवेंट में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। परिनाज धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका की जोड़ी ने 44 अंक पर तीसरा स्थान हासिल किया। लेकिन 44 अंक पर चीन के साथ बराबरी के बावजूद भारत को ब्रॉन्ज क्यों मिला, इसका कारण टाई‑ब्रेकर नियम था। बराबरी में क्वालिफिकेशन राउंड के स्कोर को टाई‑ब्रेकर माना जाता है, और इस दौर में चीन का स्कोर भारत से बेहतर रहा, इसलिए चीन को सिल्वर मिला और भारत को ब्रॉन्ज।
पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल में भारतीय महिला टीम भी फाइनल में जगह नहीं बना सकी। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, वर्ल्ड कप गोल्ड मेडलिस्ट ईशा सिंह और सुरुचि सिंह के साथ टीम ने उम्मीदें बढ़ा रखी थीं, पर फाइनल की तस्वीर में भारत नहीं था।
2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शूटिंग में रिकॉर्ड 22 पदक (7 गोल्ड) जीते थे। वही स्तर नागोया में दोहराने की आशा थी, लेकिन अब तक कोई गोल्ड नहीं मिला।
कमलजीत एक अंक से फाइनल की दहलीज पर रहे, जबकि केदारलिंग की स्थिति और भी खराब रही। लगातार अंक घटते रहने के बाद उन्होंने पिस्टल की सेटिंग बदलने की कोशिश की, पर स्कोर में सुधार नहीं हुआ। कोचों के चेहरों पर चिंता साफ़ दिख रही थी।
जापानी कोचिंग स्टाफ के एक सदस्य ने केदारलिंग के अंतिम शॉट को करीब से देखा। जापान के लिए कांस्य पदक का रास्ता खुल रहा था, और केदारलिंग ने आखिरी 10 शॉट में एक आठ अंक का स्कोर किया, जिससे भारत की उम्मीदें भी धूमिल हो गईं। जापान 1730 अंक के साथ तीसरा, भारत 1727 पर चौथा रहा।
चीन ने 1743 अंक कर गोल्ड जीता, जबकि इंडोनेशिया का भी स्कोर 1743 रहा, पर चीन ने इनर‑10 के आधार पर जीत हासिल की (चीन के निशानेबाजों ने 70 इनर‑10, इंडोनेशिया ने 57)।
व्यक्तिगत क्वालिफिकेशन में इंडोनेशिया के मुहामद इकबाल ने 589 अंक कर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि भारतीय निशानेबाजों के स्कोर इससे नीचे रहे।
हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर पियरे ब्यूशां ने अभी तक कोई विश्लेषण नहीं दिया, उन्होंने कहा कि पूरी प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद ही इस पर चर्चा करेंगे।
पाँच दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारत के पास अभी भी कई इवेंट बचे हैं। अभी तक का आंकड़ा साफ़ है – एक भी गोल्ड नहीं, 4 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज। हांगझोउ की 22 पदकों की यादें अब नागोया में उम्मीदों के साथ टकरा रही हैं, और सवाल यही बना है कि क्यों भारत के निशाने बार‑बार फाइनल के बाहर रह रहे हैं।
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