उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सुप्रीमॉ मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को सभी पदों से हटाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आकाश आनंद को बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से मुक्त कर दिया गया और उन्हें "पैदल" कहा गया।
इस पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने बड़ा बयान देते हुए आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दिया। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी में आएँ, मिलकर लड़ेंगे लड़ाई।"
डॉ. निषाद ने मायावती के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवा नेताओं को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन बीएसपी में नई सोच और युवाओं के लिए जगह नहीं बच रही। उन्होंने आकाश आनंद को आश्वासन दिया कि यदि वह निषाद पार्टी में आते हैं तो उन्हें पूर्ण सम्मान और उचित भूमिका दी जाएगी, और साथ मिलकर शोषित, वंचित और युवाओं के हक की आवाज़ को मजबूत किया जाएगा।
मायावती द्वारा आकाश आनंद को "अपरिपक्व" कहे जाने पर निषाद पार्टी के प्रमुख ने तंज किया, "जब किसी युवा को काम करने का मौका ही नहीं दिया जाता, तो वह परिपक्व कैसे हो सकता है?" उन्होंने बीएसपी की निर्णय‑प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी लगातार अपने जनाधार को खो रही है क्योंकि कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह मोड़ दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मायावती अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में आगे लाने के संकेत दे रही हैं, जबकि विपक्षी और सहयोगी दलों के नेता आकाश आनंद को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
डॉ. संजय निषाद के इस खुले ऑफर के बाद यूपी की राजनीति में कई अटकलें चलने लगी हैं कि आकाश आनंद बीएसपी में ही साधारण कार्यकर्ता बने रहेंगे या नई राजनीतिक राह अपनाएंगे।
आकाश आनंद पहले बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक थे और मायावती ने उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार सूची तैयार करने का जिम्मा भी सौंपा था। 10 अगस्त को उन्होंने हाथरस के सादाबाद में पहली सभा कर चुनावी अभियान की घोषणा की थी।
आकाश आनंद को 2017 में मायावती ने पहली बार राजनीतिक मंच पर साथ ले गए थे, जब उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर सहारनपुर का दौरा किया था। तब से उन्हें मायावती का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा।
सीतापुर की रैली में आकाश ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को "अंकल" कहकर संबोधित किया, यह बताते हुए कि उनका खुद का उम्र 30 साल है जबकि अखिलेश यादव लगभग 50 के हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई अनादर नहीं है।
आकाश की शादी बीएसपी के दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुई। शादी के बाद मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी के काम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाकर उन्हें बीएसपी से निकाल दिया, और साथ ही आकाश को भी किनारे कर दिया। कुछ समय बाद दोनों ने माफी माँग कर बीएसपी में वापसी की, लेकिन अब फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
निषाद पार्टी ने आकाश आनंद को शोषित वर्गों और युवाओं के हितों को मिलकर उठाने की प्रतिबद्धता के साथ आमंत्रित किया है, जबकि बीएसपी के भीतर की आंतरिक टकराव और नेतृत्व के बदलाव राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं।
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