भारत की ओर से सभी सेक्टरों में सेना की तैनाती को मजबूत, संतुलित और किसी भी स्थिति से निपटने के लिये तैयार बताया गया है। अरुणाचल प्रदेश में जुलाई 2026 से कई जगहों पर भारत‑चीन आमने‑सामने की स्थिति बनी हुई है, जहाँ चीनी सैनिक असफिला और तकसिंग के पास भारत की समझ वाली एलएसी से 6‑7 किमी दूर तंबू लगा चुके हैं।
आईटीबीपी की नई तैयारियां
इंडियन ट्रांसहिमालयन बोरडर पुलिस (आईटीबीपी) लगभग 95,000 जवानों का बल है, जो विशेष रूप से पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित है। महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा विरोधी है और पारम्परिक तरीकों से मुकाबला अब पर्याप्त नहीं। इसलिए हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून स्थापित कर ली गई है। सरकार से प्राप्त 400 करोड़ रुपये में से 70 % ड्रोन क्षमताओं पर खर्च हो रहा है। गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसमें 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी‑ड्रोन सिस्टम के लिये earmark किए गए हैं। आईटीबीपी स्वयं ड्रोन का निर्माण कर रहा है और पायलटों की प्रशिक्षण प्रक्रिया चल रही है।
‘शौर्य कमांडो’ नई लड़ाकू टीम है, जिसे गलवान जैसी स्थितियों के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। 2020 में गलवान में चीनी सैनिकों ने पत्थर, नाखून लगे डंडे और लोहे की छड़ें से हमला किया, जिससे 20 भारतीय जवान शहीद हुए। अब ये कमांडो हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे और ‘स्ट्राइक’ कोर्स तैयार किया गया है। अब तक 10,000 जवानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, 330 मास्टर ट्रेनर तैयार हैं और 2027 के अंत तक पूरा बल इस प्रशिक्षण से गुज़रने की योजना है।
भू‑तली बंकरों का निर्माण बड़े पैमाने पर चल रहा है, क्योंकि आधुनिक युद्ध में ऊपर की इमारतें आसान लक्ष्य बन जाती हैं। सब‑जीरो तापमान वाले क्षेत्रों में 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया गया है, 141 जनरेटर और सोलर वॉटर हीटर लगाए गए हैं। नई ऑल‑ट्रेन वाहन और कोल्ड‑स्टार्ट किट से बर्फीले मौसम में तेज़ पहुंच संभव हो रही है।
सेना के हथियार, मिसाइल और ड्रोन सिस्टम
भारतीय सेना ने स्वदेशी नागस्त्र‑2 एंटी‑टैंक लोइटिरिंग म्यूनिशन प्राप्त किया है। नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षण के बाद इसे दिया। इस म्यूनिशन में दिन‑रात कैमरा, 4 किग्रा वारहेड (650 mm कवच भेदने वाला), 50 km रेंज (फायर‑एंड‑फॉरगेट मोड) और 60 मिनट की सहनशक्ति है। ईसीसीएम‑सूट जैमिंग का विरोध करता है और 80 % से अधिक सामग्री स्वदेशी है।
एस‑400 एअर डिफेंस सिस्टम 400 km तक के लक्ष्य (विमान, ड्रोन, क्रूज़ और कुछ बैलिस्टिक मिसाइल) को रोक सकता है। भारत ने रूस से पाँच स्क्वॉड्रन खरीदे हैं, जिनमें से दो सिक्किम‑सिलीगुड़ी कॉरिडोर और उत्तरी क्षेत्रों (चीन सीमा) में तैनात हैं, जबकि शेष पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) के निकट स्थित हैं। चौथा स्क्वॉड्रन 2026 में पहुंचा और पाँचवां जल्द ही आएगा।
आकाश मिसाइल सिस्टम 25‑30 km रेंज वाला स्वदेशी एंटी‑एयर सिस्टम है, जो विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को रोकता है। एमआरएसएएम (बराक‑8) 70‑100 km तक कार्य करता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की रेंज लगभग 800 km है और यह मोबाइल लॉन्चर पर तैनात है। पिनाका रॉकेट सिस्टम 120 km तक गाइडेड फायर कर सकता है। ये सभी सिस्टम लद्दाख, अरुणाचल, सिक्किम और सिलीगुड़ी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात या तैनाती की प्रक्रिया में हैं।
चीन की तैनाती बनाम भारत
2020 में चीन की पीएलए ने लद्दाख में लगभग 60,000 सैनिक तैनात किए थे। 2025 में संख्या घटने के बाद भी 10 संयुक्त शस्त्र ब्रिगेड (40‑50 हजार) एलएसी पर मौजूद हैं। पूर्वी लद्दाख में अतिरिक्त डिवीजन और टैंक‑BMP वाहन भी रिपोर्ट हुए हैं। चीन की बुनियादी ढाँचा, विशेषकर सड़कें, तेज़ लॉजिस्टिक्स को संभव बनाती हैं। भारत की सटीक सैनिक संख्या सार्वजनिक नहीं है, पर रिपोर्टों के अनुसार तैनाती मजबूत और तैयार है। आईटीबीपी और सेना मिलकर गश्त, ड्रोन निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर दे रहे हैं। भारत को ऊँचाई वाले इलाकों का अनुभव, स्वदेशी हथियार और निरंतर आधुनिकीकरण लाभ देता है, जबकि चीन को बड़ी संख्या, आधुनिक पीएलए और तेज़ लॉजिस्टिक्स का फायदा है।
ड्रोन, एंटी‑ड्रोन, भूमिगत सुरक्षा और शौर्य कमांडो जैसी नई क्षमताओं से भारत चीन के साथ शक्ति अंतर को पाटने की कोशिश कर रहा है। अरुणाचल में जारी फेस‑ऑफ और आईटीबीपी‑सेना की तैयारियां दर्शाती हैं कि कूटनीतिक बातचीत के बावजूद जमीन पर सतर्कता अनिवार्य है।
भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध (ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध) के लिये तैयार हो रहा है। एस‑400 जैसी लंबी दूरी की रक्षा, नागस्त्र जैसी सटीक एंटी‑टैंक डिश और शौर्य कमांडो जैसी विशेष इकाइयाँ सीमा सुरक्षा को मजबूत बना रही हैं। जवानों की सुविधाएं, प्रशिक्षण और मनोबल पर विशेष ध्यान देने से ऑपरेशनल क्षमता में सुधार हो रहा है। कुल मिलाकर, एलएसी पर भारत की तैयारियां बहुआयामी हैं – सैनिक संख्या, हथियार, तकनीक और बुनियादी ढाँचा तीनों स्तर पर। यह चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी के खिलाफ विश्वसनीय प्रतिरोध बनाने का प्रयास है।
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