नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस महीने काठमांडू में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की, जबकि छह महीने पहले उन्होंने इसी पदाधिकारी के साथ बैठक से इनकार कर दिया था। यह मुलाकात भारत‑नेपाल संबंधों में बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है, क्योंकि बालेन शाह इस महीने के अंत में पहली बार भारत का दौरा करेंगे।
विक्रम मिस्री 4‑5 नवंबर को नेपाल के आधिकारिक दौरे पर थे। उन्होंने विदेश सचिव अमृत बहादुर राय, वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल, ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ और बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल सहित कई उच्च‑स्तरीय अधिकारियों से बातचीत की। दौरे के अंतिम दिन उन्होंने बालेन शाह से भी मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ दीं।
पहले बालेन शाह ने अपने कार्यकाल के पहले साल में विदेश यात्राओं को टालने का निर्णय लिया था। उन्होंने अपने स्तर से नीचे के विदेश अधिकारियों के साथ वन‑टू‑वन बैठकें नहीं करने का प्रोटोकॉल अपनाया था, जिससे अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से भी मुलाकात नहीं हुई थी। अब इस प्रोटोकॉल को छोड़कर उन्होंने मिस्री से मुलाकात की, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ दिख रहा है।
मिस्री के साथ चर्चा जल संसाधन, ऊर्जा और व्यापार पर केंद्रित रही। साथ ही दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी, विकास परियोजनाओं और बाढ़ राहत के सहयोग पर भी बात की। नेपाल ने रासुवा‑भोटेकोशी में बाढ़ के बाद भारत की त्वरित सहायता, आपातकालीन सामग्री और तकनीकी समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
हालिया सीमा विवादों के बीच यह मुलाकात और बाढ़ राहत का सहयोग दोनों देशों के संबंधों को पुनर्जीवित करने के संकेत हैं। लिपुलेख‑कालापानी और लिम्पियाधुरा पर भारत‑नेपाल के बीच विवाद जारी है; नेपाल 1816 की सुगौली संधि के आधार पर इन क्षेत्रों को अपना दावा करता है, जबकि भारत इन्हें उत्तराखंड का हिस्सा मानता है। दोनों पक्षों ने इस मुद्दे को कूटनीतिक तौर पर सुलझाने की इच्छा जताई है।
बाढ़ के बाद भारत ने 140 टन से अधिक राहत सामग्री, बेली ब्रिज और टनलिंग विशेषज्ञों सहित कई सहायता संसाधन भेजे। इस मदद ने नेपाल में भारत की भरोसेमंद छवि को मजबूत किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बालेन शाह ने भारत की सराहना की और हिमालयन क्लाइमेट रेज़िलिएंस मैकेनिज्म के प्रस्ताव पर भी चर्चा की।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी बदलाव स्पष्ट है। दक्षिण एशिया विशेषज्ञ कॉन्स्टेंटिनो ज़ेवियर का मानना है कि वैश्विक मंदी के दौर में नेपाल भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करना चाहता है। उन्होंने बताया कि नेपाल ने भारत से 2 बिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक पैकेज मांगा है, जिसमें लाइन‑ऑफ़‑क्रेडिट और अनुदान शामिल हैं। इस पैकेज पर बालेन शाह और मिस्री के बीच चर्चा हुई, और संभव है कि यह घोषणा उनके भारत दौरे के दौरान की जाए।
इन सभी कारकों को देखते हुए बालेन शाह ने चीन के बजाय भारत को अपनी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए चुना है, जो नई दिल्ली के साथ संबंधों को नई दिशा देने की उनकी इच्छा को दर्शाता है। इस महीने के अंत में होने वाली बालेन शाह की नई दिल्ली यात्रा पर सभी की नज़र टिकी है, जो तीन साल में पहली बार किसी नेपाली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा होगी।
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