पाकिस्तान में रबी (ऑक्टोबर‑मार्च) सीजन में पंजाब और सिंध के खेतों को 22% पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा, जैसा कि सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने बताया है। यह कमी मुख्य फसल गेहूं के साथ जौ, सरसों, चना आदि पर भी असर डालेगी।
पाकिस्तान की 80% से अधिक कृषि सिंधु बेसिन के जल पर निर्भर है। पिछले साल गेहूं उत्पादन लक्ष्य से कम रहा, दो मिलियन टन की कमी और एक मिलियन टन आयात का आदेश देना पड़ा। इस साल जलभंडारण में और गिरावट के कारण स्थिति और बिगड़ सकती है।
IRSA ने बताया कि जल प्रवाह अनुमान से 8% कम और पिछले साल से 22% घटा है। 30 सितंबर को जलाशयों में 9.343 मिलियन एकड़‑फीट पानी था, जबकि अनुमान 12.014 मिलियन एकड़‑फीट था।
तरबेला बांध पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण जलाशय पूरी तरह से भर नहीं सका, जिससे तीन मिलियन एकड़‑फीट से अधिक पानी जमा नहीं हो पाया। टनल‑4 और टनल‑5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी देरी से चल रहे हैं; इन्हें मार्च‑2025 तक पूरा होना था, पर अभी तक नहीं हुआ। परिणामस्वरूप खरीफ़ सीजन में भी पानी की कमी रही।
तरबेला से कम पानी छोड़ने के कारण मंगला बांध को अधिक जल देना पड़ा, जिससे वह भी पूरी तरह नहीं भर सका। अक्टूबर की बैठक में पंजाब‑सिंध के लिए 22% कमी मंजूर हुई, जबकि बलूचिस्तान और खैबर‑पख्तूनख्वा को छूट दी गई।
पाकिस्तानी नेता अक्सर भारत पर सिंधु जल रोकने का आरोप लगाते हैं; प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे “युद्ध की घोषणा” कहा और विदेश मंत्री इशाक डार ने चेतावनी दी। लेकिन IRSA ने स्पष्ट किया कि पानी का प्रवाह अभी भी पाकिस्तान की ओर बह रहा है; केवल जल‑संधि के आंकड़े‑बंटवारे और अग्रिम सूचना के नियमों में बदलाव आया है। भारत ने अप्रैल‑2025 में पहलगाम हमले के बाद संधि को स्थगित किया, पर इसका मतलब पानी रोकना नहीं है।
IRSA की रिपोर्ट में भारत का कोई उल्लेख नहीं है; कमी के मुख्य कारण घरेलू बुनियादी ढाँचा, जलभंडारण की कमी और प्रोजेक्ट्स की देरी हैं।
पानी की कमी से गेहूं की बुआई और पैदावार दोनों घटेंगे, जिससे आयात बढ़ेगा और महंगाई पर दबाव पड़ेगा। चना, मसूर, तंबाकू, जौ जैसी फसलें भी प्रभावित होंगी, और लाखों किसानों की आय घटेगी, जिससे खाद्य सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है।
दीर्घकालिक समस्या का मूल कारण बुनियादी ढाँचे की खराबी, बांध‑नहरों का रख‑रखाव, ग्लेशियर पिघलाव और वर्षा‑निर्भर प्रवाह में गिरावट, तथा जलवायु परिवर्तन है। राजनीतिक नेताओं का दोषारोपण समस्या का समाधान नहीं कर सकता।
यदि पाकिस्तान समय पर जल‑प्रोजेक्ट्स पूरा करे और भंडारण क्षमता बढ़ाए, तो भविष्य में कमी को नियंत्रित किया जा सकता है। भारत पर आरोप लगाना समाधान नहीं देगा; किसानों को सही जानकारी और समय पर तैयारी की जरूरत है। जलवायु और प्रबंधन दोनों पर दीर्घकालिक ध्यान देना आवश्यक है।
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