फ्रांस की सड़कों पर जनता का गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा है। 21 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतेय स्थित सेंट‑एक्सुपेरी हाईस्कूल से शुरू हुए इस आंदोलन में एक महीने से अधिक समय में लाखों छात्र, अभिभावक, शिक्षक और श्रमिक संगठन शामिल हो गए।
शिक्षकों के पदों के खाली रहने और स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण छात्रों ने बेहतर पढ़ाई की मांग की। धीरे‑धीरे अन्य स्कूलों के विद्यार्थी भी इस विरोध में शामिल हुए और प्रदर्शन तेज़ी से बढ़े। 1 अक्टूबर तक 1,020 से अधिक हाईस्कूल हड़ताल या विरोध से प्रभावित हुए, जिनमें 222 स्कूलों में नाकेबंदी की गई।
कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए – कूड़ेदान जलाना, स्कूल परिसरों को नुकसान पहुंचाना और पुलिस के साथ झड़पें। नांत के नेल्सन‑मंडेला हाईस्कूल के प्रवेश क्षेत्र में आग लगने की घटना भी हुई। सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ भी अस्थायी रूप से प्रभावित हुईं।
इस दौरान करीब 1,950 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सरकार ने कहा कि कुछ हिंसक समूह छात्रों के विरोध का फायदा उठा रहे हैं।
अक्टूबर के पहले हफ्ते तक आंदोलन केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहा। अभिभावक, शिक्षक, श्रमिक संगठन और अन्य नागरिक भी सड़कों पर उतरने लगे। मांगों में शिक्षा व्यवस्था सुधार के साथ महंगाई, जीवनयापन का बढ़ता खर्च और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए।
8 अक्टूबर को देशभर में बड़े प्रदर्शन हुए। लगभग 71,500 लोग मार्च में शामिल हुए, जिनमें 24,500 पेरिस में थे। इसके अलावा 55,000 युवा स्कूलों के बाहर विरोध में भाग लिया।
कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, पर कुछ स्थानों पर झड़पें हुईं। स्कूलों को नुकसान, शिक्षकों और प्रबंधन पर निशाना, तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटनाएँ सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने ठोस कदम उठाने की मांग की।
रॉयटर्स के अनुसार, फ्रांस का राजनीतिक और आर्थिक संकट भी चर्चा में है। 2024 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संसदीय चुनाव कराने का फैसला लिया, जिसके बाद संसद में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला। बजट जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनाना मुश्किल हो गया। रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 करने का निर्णय भी लंबे समय से विरोध का मुद्दा रहा है।
आर्थिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। 2025 में बजट घाटा जीडीपी का 5.1 % था, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के 115.6 % तक पहुँच गया। सरकार कर्ज को कम करने की कोशिश कर रही है, पर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। कई निवेशक फ्रांस के सरकारी बॉन्ड बेच रहे हैं, जिससे उधार लागत बढ़ रही है। विदेशी कर्जदाता भी अधिक सावधानी बरत रहे हैं।
अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में आंदोलन और बढ़ गया। 17 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन हुए। गृह मंत्री लॉरां नुनेज के अनुसार करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि श्रमिक संगठनों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई।
कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, पर कुछ शहरों में हिंसक समूहों ने दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया। लिमोज के नगर भवन में आग, मार्सेई में नगर भवन पर तोड़फोड़ और लियोन में पर्यटन कार्यालय को आग लगना जैसी घटनाएँ हुईं। तीन हजार से अधिक दुकानों को नुकसान या लूटपाट का सामना करना पड़ा।
राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने हिंसा और लूटपाट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह हिंसा के आगे नहीं झुकेगी। 17 अक्टूबर की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और कई शहरों में आंशिक कर्फ्यू लगाए गए।
गृह मंत्री नुनेज ने सुरक्षा व्यवस्था में चूक स्वीकार करते हुए इस्तीफे की पेशकश की, पर राष्ट्रपति मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। सरकार ने अगले प्रदर्शनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए। सरकार के कुछ नेताओं ने वामपंथी दल ला फ्रांस इंसूमिस पर हिंसा बढ़ाने का आरोप लगाया, जबकि पार्टी ने खुद को अलग बताया और सरकार पर आंदोलन को बदनाम करने का आरोप लगाया।
संसदीय जांच समिति बनाने की पहल भी हुई, जो प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की कार्रवाई की जांच करेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हिंसा को आव्रजन और इस्लाम से जोड़ते हुए बयानबाजी की, जबकि मैक्रों ने विदेशी नेताओं की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई, एआई से बने फर्जी वीडियो के जरिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
24 अक्टूबर तक फ्रांस में विरोध प्रदर्शन एक महीने से अधिक चल रहे हैं। छात्रों की शिक्षा से जुड़ी मांगों से शुरू हुआ आंदोलन अब महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं, सरकारी खर्च और पुलिस की कार्रवाई जैसे मुद्दों से जुड़ गया है।
रॉयटर्स के अनुसार, सरकार ने 24 अक्टूबर को देशभर में 70 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती की, जो 17 अक्टूबर की तुलना में 10 हज़ार अधिक थी। पुलिस को हिंसा और लूटपाट से निपटने के लिए विशेष इकाइयाँ, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले वाहन तैयार रखने का निर्देश दिया गया।
पेरिस में लौवर, म्यूज़े द’ऑर्से, पिकासो संग्रहालय और ओपेरा भवन समेत कई प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान बंद रखे गए। 20 से अधिक मेट्रो स्टेशन भी बंद किए गए।
पेरिस के पश्चिम में हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत और चार अन्य घायल हुए, जिनमें 12‑साल की एक बच्ची भी शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्टों में इसे संभावित इस्लाम‑विरोधी हमला बताया गया।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले नाबालिगों के माता‑पिता की जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा भी चर्चा में है। फ्रांस के नागरिक कानून की धारा 1242 के तहत माता‑पिता अपने नाबालिग बच्चों की ओर से हुए नुकसान के लिए नागरिक रूप से जिम्मेदार हो सकते हैं। 2025 में कानून में संशोधन कर इस जिम्मेदारी को मजबूत किया गया।
अब सरकार हिंसक प्रदर्शनों के दौरान हुई तोड़फोड़ के लिए हर्जाना वसूलने के नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके तहत नुकसान की भरपाई के लिए 10 हज़ार यूरो तक की रकम वसूलने और सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी तय करने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं। 27 अक्टूबर को सीनेट में इस पर चर्चा का प्रस्ताव है।
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