पश्चिम बंगाल सरकार ने 30 अक्टूबर को अधिसूचित की योजना के तहत राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के एक पात्र सदस्य को ग्रुप डी की नौकरी मिलेगी। यह योजना 1 जनवरी 2001 से हुई घटनाओं को कवर करेगी और इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों को वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
नियुक्तियाँ मौजूदा भर्ती प्रक्रिया के लिए एकमुश्त अपवाद के रूप में की जाएंगी, और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं। सरकार ने परिवारों की असाधारण कठिनाई को लेकर गंभीर रूप से चिंतित होने का उल्लेख किया है।
केवल एक आश्रित परिवार सदस्य को नियुक्ति के लिए माना जाएगा। पात्र आश्रितों में मृतक का जीवनसाथी, पुत्र, पुत्री या तीसरा लिंग का बच्चा शामिल है। यदि पीड़ित अविवाहित था, तो भाई या बहन भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते माता‑पिता और सभी भाई‑बहन मृतक पर पूरी तरह आश्रित रहे हों। आवेदक को मृत्यु के समय पीड़ित पर पूरी तरह आश्रित होना चाहिए और उसे आवेदन के समय तथा मामले पर विचार करते समय तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता होनी चाहिए। यदि परिवार के किसी सदस्य को पहले ही उसी घटना के संबंध में अनुकंपा नियुक्ति या सरकारी रोजगार मिल चुका है, तो कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।
पात्रता शर्तों में यह भी शामिल है कि जिन परिवारों की मासिक आय 50 000 रुपये से अधिक है, वे पात्र नहीं होंगे। यदि परिवार का कोई सदस्य नियमित सरकारी सेवा में है या आयकर देता है, तो आवेदन अस्वीकार कर दिया जाएगा। आवेदक को भारतीय नागरिक और पश्चिम बंगाल का निवासी होना अनिवार्य है। ग्रुप डी पदों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा 8 पास या समकक्ष होनी चाहिए, और आवेदक की आयु 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन की तिथि पर ग्रुप डी भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार नहीं करनी चाहिए। जांच समिति प्रभावित परिवार की परिस्थितियों के आधार पर शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा में छूट की सिफारिश कर सकती है।
मृत्यु राजनीतिक हिंसा के कारण हुई, इसका प्रमाण जिला‑स्तरीय जांच समिति द्वारा दिया जाएगा, जो प्रथम सूचना रिपोर्ट, आरोप पत्र और अदालत द्वारा तय आरोपों पर आधारित होगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला‑स्तरीय जांच समिति आवेदनों की जांच करेगी, जिसमें पुलिस अधीक्षक या कोलकाता के उप पुलिस आयुक्त और गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग के अभियोजन विंग से नामित एक अधिकारी सदस्य होंगे।
पात्र आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन उस जिले के जिलाधिकारी को जमा करना होगा, जहाँ घटना हुई थी। इसके साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक से संबंध का प्रमाण, एफआईआर, आरोप पत्र, अदालती दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात संलग्न करने होंगे। जिला‑स्तरीय समिति को आवेदन प्राप्त होने के 90 दिन के भीतर उन्हें निपटाना होगा।
समिति अपनी सिफारिशें आगे की प्रक्रिया के लिए गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग को भेजेगी। यदि कोई आवेदक जिला‑स्तरीय समिति के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह संचार प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर अपील दायर कर सकता है। ऐसी अपीलों पर गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य‑स्तरीय समिति विचार करेगी।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि आवेदन की पात्रता स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं देती। नियुक्ति जांच समिति की सिफारिश, पदों की उपलब्धता, पुलिस सत्यापन और चिकित्सा जांच पर निर्भर करेगी। यह योजना आधिकारिक राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से लागू होगी।
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