बंद नाक, खांसी या रात को सांस लेने में परेशानी होना काफी आम समस्या है। मौसम बदलते ही ज्यादातर लोगों को ये दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कुछ लोगों को धूल-एलर्जी के कारण भी इस तरह के लक्षणों का अनुभव हो सकता है। ये दिक्कतें आमतौर पर 5-7 दिनों में अपने आप या हल्के-फुल्के उपचार के साथ ठीक भी हो जाती हैं। पर क्या हो अगर यही समस्याएं महीनों नहीं, बल्कि साल भर से ज्यादा समय तक बनी रहें? दवाओं से राहत मिलने के बाद कुछ समय में वही तकलीफ फिर लौट आए? ऐसी स्थिति में इसे सिर्फ धूल या संक्रमण का लक्षण मान लेना सही नहीं है।
बंद नाक-सांस की समस्या ने बढ़ा दी मुश्किल ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट में 56 वर्षीय रोजर की समस्या का जिक्र मिलता है। रोजर बताते हैं, बंद नाक के साथ दर्द और सांस लेने में तकलीफ ने धीरे-धीरे मेरी पूरी जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। रात में दर्द इतना ज्यादा होता था कि मुझे मुंह से सांस लेनी पड़ती थी। डॉक्टर को शुरू से साइनोसाइटिस का शक था। इसे बोलचाल की भाषा में साइनस की समस्या भी कहा जाता है। साइनोसाइटिस में नाक, माथे और गालों के पीछे मौजूद हवा से भरी छोटी-छोटी जगहों में सूजन आ जाती है। साइनोसाइटिस के कई कारण हो सकते हैं जैसे बैक्टीरिया, एलर्जी, फंगस और वायरस का संक्रमण।
डॉक्टरों ने आखिरकार पकड़ ली असली वजह अपनी पत्नी की जिद पर इस समस्या को लेकर रोजर न्यूट्रिशनिस्ट के पास भी गए। रोजर कहते हैं, मैंने न तो कभी धूम्रपान किया, न ही शराब पीता था। मैं काफी फिट था और संतुलित खाना खाता भी खाता था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि नाक की इस समस्या में न्यूट्रिशनिस्ट मेरी क्या मदद कर सकता है? लेकिन उनसे अपॉइंटमेंट के दौरान यह संभावना सामने आई कि शायद रोजाना के खान-पान में मौजूद कोई चीज उनकी दिक्कतों को बढ़ा रही हो सकती है। इसमें डेयरी को संभावित ट्रिगर माना गया।
आज रोजर को ये दिक्कतें बिल्कुल भी नहीं होती हैं, खास बात यह है कि इसके लिए उन्हें कोई नई दवा नहीं लेनी पड़ी। उन्होंने सिर्फ अपनी डाइट में एक छोटा-सा बदलाव किया और इसका परिणाम काफी चौंकाने वाला रहा।
साइनोसाइटिस के पीछे छिपा था ये कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रोजर की तरह हर व्यक्ति में साइनोसाइटिस की वजह डेयरी वाली चीजें ही नहीं होतीं, हालांकि कुछ लोगों में दूध जैसी चीजें समस्या को ट्रिगर करने वाली जरूरी मानी जाती रही हैं।
2011 में अमेरिकन जर्नल ऑफ राइनोलॉजी एंड एलर्जी में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया था कि कुछ लोगों में छिपी हुई दूध की एलर्जी, क्रॉनिक साइनस की बीमारी का कारण बन सकती है। मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय से साइनोसाइटिस से जूझ रहे मरीजों में से करीब सात में से एक को गाय के दूध से एलर्जी थी, जिसका पहले पता नहीं चला था। ईएनटी सर्जन और यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया में राइनोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. कार्ल फिलपॉट कहते हैं, मेरे क्लिनिक में साइनस वाले बहुत से लोग मुझसे डेयरी वाली चीजों के खान-पान के बारे में पूछते हैं। मैं आमतौर पर एलिमिनेशन डाइट की सलाह देता हूं। इसमें मरीज करीब एक सप्ताह तक डेयरी पूरी तरह बंद करते हैं और देखते हैं कि उनके लक्षणों में कोई सुधार आता है या नहीं?
डेयरी वाली चीजें बढ़ाती हैं खतरा? साल 2026 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी पाया गया कि साइनस जैसी समस्याओं में सूजन कम करने वाले खाद्य पदार्थों पर आधारित डाइट लाभ दे सकती सकती है। वहीं ज्यादा फैट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से साइनस से लक्षण और बिगड़ने का खतरा हो सकता है। डॉ. फिलपॉट बताते हैं कि कोरोना महामारी के बाद से ऐसे मरीज ज्यादा सामने आ रहे हैं, जिनमें साइनस की बीमारी काफी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी है। ऐसे मामलों को नियंत्रित करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है। अगर किसी को लंबे समय से साइनस की समस्या है, तो उसे दिन में दो बार नियमित रूप से नाक की सफाई करनी चाहिए। अगर तीन महीने तक ऐसा करने के बावजूद परेशानी बनी रहती है, तो ईएनटी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।
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