गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन सहित कई नदियों की बाढ़ ने बिहार के 13 जिलों में लगभग 1 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद कर दीं। कृषि विभाग ने प्रारंभिक आकलन जारी किया है और जिलों से विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है।
सबसे अधिक क्षति पटना, भागलपुर, वैशाली और खगड़िया में हुई, जहाँ धान, मक्का, सब्ज़ी और उद्यानिक फसलें नष्ट हो गईं।
पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल के 77 प्रखंडों में बाढ़ से फसल क्षति की रिपोर्ट मिली है। दियारा इलाकों में मक्का, सब्ज़ी और केला की खेती पर विशेष असर पड़ा।
कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल ने बताया कि अब तक लगभग 1 लाख हेक्टेयर में क्षति अनुमानित है। पानी उतरने के बाद अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा और किसानों को अनुदान दिया जाएगा।
गंगा ने मंगलवार को पटना के पंडारक और भागलपुर के सुल्तानगंज में उच्चतम स्तर को पार कर लिया। घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और सोन भी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं।
14 जिलों की 491 ग्राम पंचायतों की 35.89 लाख आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है। एनएच 80 पर भागलपुर में पानी तीन फीट तक पहुंच गया है, जिससे आवागमन बंद है।
ग्रामीण सड़कों को भी भारी क्षति हुई है; 14 जिलों में 600 से अधिक सड़कें पानी में डूबी हैं। पटना में 90 सड़कों पर पानी है, जिनमें 44 दानापुर की हैं; वैशाली में 80 सड़कों पर बाढ़ है; सारण में 78 सड़कें पानी में डूबी हैं।
बाढ़ के बाद भी पानी घटने के बावजूद लोगों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भागलपुर में गंगा का पानी कई मोहल्लों में घुसा है, जिससे दूध‑सब्ज़ी जैसी रोज़मर्रा की जरूरतों में कमी हो रही है। समस्तीपुर के दियारा इलाकों में पानी घटने के बावजूद चार‑पाँच फीट तक जलजमाव रह रहा है।
पश्चिम चंपारण के योगापट्टी में गंडक के पानी से कटाव और कीचड़ की बाढ़ ने फसलों और घरों को नुकसान पहुँचाया है। लंबे समय तक पानी में रहने से दुर्गंध और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
मुंगेर नगर निगम के वार्ड 41 में बाढ़ पीड़ितों के सब्र का बांध टूट गया। 15 दिनों से जमा पानी और प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने राहत मांगते हुए मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
पश्चिम चंपारण के योगापट्टी में सिसवा मंगलपुर पंचायत के ग्रामीणों ने दो महीने से जलजमाव और कटाव की समस्या झेली है। उन्होंने बड़हरवा से मंगलपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर जल सत्याग्रह किया और एक दिवसीय धरना‑प्रदर्शन किया।
पटना में बाढ़ पीड़ितों के आवागमन के लिए 1,876 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। 432 सामुदायिक रसोई के जरिए दस लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा रहा है। 14 राहत शिविरों में 12,068 शरणार्थियों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!