खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पटना में बाढ़ का खतरा सबसे पहले उन इलाकों को सताने लगता है, जो नदी के बेहद करीब और निचले हिस्सों में बसे हैं। ऐसे समय में शहर की सुरक्षा के लिए करीब पांच दशक पहले तैयार की गई पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल (पीटीपी वॉल) एक बार फिर चर्चा में है। फिलहाल पटना जिला प्रशासन ने प्रोटेक्शन वॉल पर बने सभी 108 रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जहां लीकेज था, उसे भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा कुर्जी इलाके में नालों को भी बंद कर दिया गया है। इसके जरिए गंगा का पानी घुसने का खतरा था। यह वही सुरक्षा व्यवस्था है, जिसे 1975 की भयावह बाढ़ के बाद तैयार किया गया था। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इसका निर्माण 1976 में हुआ था और इसका मकसद गंगा के बाढ़ के पानी से पटना शहर को सुरक्षा देना था।
1975 की बाढ़ के बाद लिया गया था बड़ा फैसला
साल 1975 में पटना ने बाढ़ का बेहद गंभीर रूप देखा था। इसके बाद शहर को गंगा के संभावित उफान से बचाने के लिए स्थायी सुरक्षा संरचना तैयार करने पर जोर दिया गया। इसी क्रम में पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण कराया गया। बाद की रिपोर्टों में इस सुरक्षा व्यवस्था को 1975-76 में तैयार पटना के प्रमुख बाढ़ सुरक्षा उपायों में शामिल किया गया है। करीब पांच दशक बाद भी यह दीवार पटना के लिए महत्वपूर्ण बाढ़ सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनी हुई है।
दानापुर से रानी घाट तक सुरक्षा घेरा
विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा नदी में आने वाली बाढ़ से बचने के लिए बनाई गई यह सुरक्षा व्यवस्था गंगा किनारे राजधानी के के बड़े हिस्से को कवर करती है। जानकारी के अनुसार, रिपोर्टों में इसकी लंबाई करीब 24 किलोमीटर है। इसका विस्तार दानापुर से रानी घाट तक है। 2013 में गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान भी इस 24 किलोमीटर लंबे फ्लड प्रोटेक्शन वॉल के बाहर बसे लोगों को लेकर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती थी। इसका अर्थ यह है कि गंगा किनारे के सभी इलाके एक जैसी सुरक्षा स्थिति में नहीं हैं। दीवार के बाहर और निचले क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को नदी के बढ़ते जलस्तर का सीधा खतरा बना रहता है।
सिर्फ दीवार ही नहीं, कटाव से बचाव भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा का पानी बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बाढ़ का पानी नहीं, बल्कि कटाव भी है। नदी की धारा अगर सुरक्षा संरचना के आसपास की जमीन को कमजोर करती है तो उसका असर पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से समय-समय पर प्रोटेक्शन वॉल के आसपास कटावरोधी और बैंक प्रोटेक्शन के काम कराए गए हैं। 2014 में जल संसाधन विभाग ने नासरीगंज (रामजीचक) घाट से दीघा नहर तक 1.12 किलोमीटर हिस्से में गंगा के किनारे ढलान और बैंक को मजबूत करने का काम शुरू किया था। इस परियोजना का उद्देश्य सीधे तौर पर प्रोटेक्शन वॉल को सुरक्षित करना था। उस समय इस काम की अनुमानित लागत करीब छह करोड़ रुपये बताई गई थी।
जब गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंचती है तो बढ़ जाती है चिंता
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी बताते हैं कि पटना में बाढ़ सुरक्षा केवल एक दीवार पर निर्भर नहीं है। नदी किनारे कटावरोधी कार्य, तट संरक्षण, स्लुइस गेट और शहर के ड्रेनेज सिस्टम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड में पटना क्षेत्र में अलग-अलग वर्षों में कटावरोधी काम दर्ज हैं। प्रोटेक्शन वॉल ने पटना के बड़े हिस्से को गंगा के सीधे बाढ़ प्रभाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसे शहर के लिए पूर्ण सुरक्षा कवच मानना सही नहीं होगा। नदी के किनारे और दीवार के बाहर बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। 2013 में गंगा के ऊंचे जलस्तर के दौरान भी प्रशासन ने प्रोटेक्शन वॉल के बाहर रहने वाले लोगों को सतर्क किया था। इसके अलावा पटना के अंदर जमा होने वाले बारिश के पानी की निकासी भी एक अलग चुनौती है। जब गंगा का जलस्तर काफी बढ़ जाता है तो शहर के ड्रेनेज सिस्टम और नदी के बीच पानी की निकासी को लेकर दबाव बढ़ जाता है।
पांच दशक पुरानी दीवार के सामने नई चुनौतियां
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी बताते हैं कि 1976 में बनी टाउन प्रोटेक्शन वॉल ने अपने समय में पटना को बाढ़ से बचाने के लिए बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन करीब 50 साल बाद नदी की धारा, शहरी विस्तार, गंगा किनारे बढ़ता निर्माण और बदलती बाढ़ परिस्थितियां नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
पटना प्रशासन ने फिलाहल क्या उपाय किया है?
पटना में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा और नगर आयुक्त यशपाल मीणा समेत वरीय अधिकारियों की टीम ने गुरुवार को दीघा घाट से बिंद टोली, एलसीटी घाट, गोसाईं टोला और पूरे पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम ने निर्देश दिया कि शहर में गंगा का पानी प्रवेश न करे, इसके लिए सभी जरूरी सुरक्षात्मक उपाय तत्काल पूरे किए जाएं। उन्होंने टाउन प्रोटेक्शन वॉल में बने सभी 108 रास्तों को बंद करने का निर्देश दिया। वहीं, सलूईस गेटों के निरीक्षण में कुछ जगह सीपेज मिलने पर सभी 13 सलूईस गेटों के लीकेज को बंद कराया गया। अधिकारियों को इनकी लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए।
गंगा की ओर जाने वाले सभी नालों को बंद करने का आदेश
डीएम ने सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों (डीपीएस) को पूरी तरह चालू रखने और जरूरत पड़ने पर शहर से पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करने को कहा। पाटलिपुत्र कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों में पानी के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए भी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए। सदाकत आश्रम के पास नाले के रास्ते शहर में पानी आने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम को रातभर में नाला बंद करने को कहा गया। नगर निगम, जल संसाधन विभाग और बुडको के अधिकारियों को सभी बाढ़ निरोधक कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर रातभर में पूरा करने तथा संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। डीएम ने स्पष्ट किया कि शहर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पटना में गंगा कहां पर खतरे के निशान से कितना ऊपर बह रही?
जल संसाधन विभाग की ओर से मिली रिपोर्ट के अनुसार, मनेर में गंगा खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर, दीघा घाट पर 1.23 मीटर, गांधी घाट पर 1.76 मीटर, हाथीदह में 1.48 मीटर और श्रीपालपुर में पुनपुन नदी 2.56 मीटर ऊपर बह रही है। पटना के निचले इलाके में नदियों में पानी घुस गया है। इन सभी जगहों पर जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी दस्तक दे चुका है। पटना के दीघा घाट पर गंगा अंडरपास के नीचे तक आ गई है। गायघाट-दीदारगंज सड़क डूब चुकी है। इसके अलावा बिंद टोली, एलसीटी घाट, गांधी घाट, महावीर घाट, पटना सिटी में कई जगह गंगा का पानी घुसने से लोग परेशान हैं। कई जगह तो कमर भर पानी भर गया है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!