ब्रिटिश बेस्टसेलर लेखक जेफ्री आर्चर, जिनकी कई किताबें भारत में बड़ी धूमधाम से पढ़ी जाती थीं, का हाल ही में निधन हो गया। उनका अंतिम लेखन प्रोजेक्ट, ‘एडम और ईव’, लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन उनका अचानक निधन हो गया।
लगभग पाँच दशकों के लेखन करियर में आर्चर ने लाखों पाठकों को जोड़े रखा। भारतीय संस्कृति और साहित्य से प्रभावित होकर वह अक्सर भारत आते‑जाते रहे, पर बॉलीवुड के साथ उनका अनुभव काफ़ी नकारात्मक रहा। एक बार उन्होंने बॉलीवुड को ‘चोरों का गिरोह’ कहा था।
2015 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड ने उनकी कई कहानियों को बिना अनुमति के चुराया है। उन्होंने विशेष रूप से ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ और ‘खुदगर्ज’ जैसी फिल्मों का नाम लिया, जहाँ उन्होंने कहा कि उनके उपन्यासों के अधिकार को नजरअंदाज़ किया गया।
आर्चर ने बताया कि हॉलीवुड की कई कंपनियां उनके उपन्यासों के अधिकार खरीदने में रुचि रखती थीं और वह भारत में भी एक प्रोडक्शन पार्टनर ढूँढ रहे थे, पर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को लेकर उनका भरोसा कम था। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे द्वितीय श्रेणी के बॉलीवुड बेवकूफ नहीं चाहता, जो खुद को स्टार‑प्रोड्यूसर बताता हो, जबकि वास्तविकता में वह ऐसा नहीं है।”
आर्चर का दावा था कि 2011 की फिल्म ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ उनकी 1976 की किताब ‘Not a Penny More, Not a Penny Less’ पर आधारित थी। फिल्म में मूल कहानी के पुरुष पात्रों को महिलाओं में बदल दिया गया, जहाँ रणवीर सिंह ने रिकी बहल का किरदार निभाया और अनुष्का शर्मा, दीपान्निता शर्मा, परिणीति चोपड़ा ने महिला भूमिकाएँ संभालीं। यह परिणीति चोपड़ा की पहली फिल्म भी थी।
यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म में रणवीर सिंह‑अनुष्का शर्मा की जोड़ी फिर से साथ आई, जो पहले 2010 की फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ में देखी गई थी।
आर्चर ने 1987 की फिल्म ‘खुदगर्ज’ को भी अपनी 1979 की बेस्टसेलिंग ‘Kane and Abel’ से प्रेरित बताकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि फिल्म ने उनके उपन्यास के मूल तत्वों को ठीक से नहीं अपनाया।
बॉलीवुड के साथ टकराव के बावजूद आर्चर का भारत से मोह बना रहा। बाद में उन्होंने कुछ उपन्यासों के आधिकारिक फिल्म और टीवी रूपांतरण के अधिकार भारतीय निर्माताओं को सौंपे। प्रोड्यूसर शीतल तलवार ने 1984 के ‘First Among Equals’ और 1988 के कहानी संग्रह ‘A Twist in the Tale’ के अधिकार लगभग 1.5 करोड़ रुपये में खरीदे।
फ़िल्ममेकर हंसल मेहता भी ‘Kane and Abel’ के अधिकार खरीदने के लिए आर्चर से बातचीत कर चुके थे, पर वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
2015 में आर्चर ने भारत पर एक नई किताब लिखने की योजना बनाई, जिसमें कहानी का केंद्र बॉलीवुड की एक अभिनेत्री होगी। आठ अध्यायों में बँटी इस किताब की कथा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की दुनिया के इर्द‑गिर्द घूमनी थी, पर यह प्रोजेक्ट भी कभी पूरा नहीं हो पाया।
इन सभी विवादों के बावजूद भारत में आर्चर की लोकप्रियता बहुत अधिक थी। उनकी किताबों की पायरेसी भी काफी हुई, जिससे उन्हें “Lord of the Paperback” का उपनाम मिला।
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