दुनिया भर में कई देशों में सड़कों पर प्रदर्शन तेज़ी से बढ़ रहा है। फ्रांस में हिंसक विरोधों की खबरें प्रमुख हैं, लेकिन अल्बानिया, इटली, स्पेन, बेल्जियम और ब्राज़ील में भी समान माहौल देखी जा रही है। इन सभी आंदोलनों के कारण अलग‑अलग हैं, फिर भी महंगाई, रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक असंतोष ने इन्हें एक साथ जोड़ा है।
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार के खिलाफ छात्र और नागरिक सड़कों पर उतर रहे हैं। वे भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई, बेहतर रोजगार के अवसर और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। दक्षिणी तट पर लक्ज़री रिसॉर्ट बनाने की विवादित योजना ने भी जनता का गुस्सा बढ़ा दिया है। कई शहरों में प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहा, और पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं।
इटली में महंगाई, बढ़ती ईंधन कीमतों और आर्थिक बोझ के खिलाफ व्यापक विरोध चल रहा है। उत्तर में छात्र मुख्य रूप से सड़कों पर उतरते हैं, जबकि दक्षिण में किसान, मछुआरे और ट्रक ड्राइवर ईंधन की कीमतों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। वे बेहतर वेतन, शिक्षा में निवेश और सार्वजनिक सेवाओं की मजबूती की मांग कर रहे हैं। मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या जैसे शहरों में कुछ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव भी हुए।
स्पेन में मुख्य मुद्दा महंगे किराए और बढ़ते हाउसिंग संकट पर केंद्रित है। मैड्रिड में 87‑वर्षीय मारिया डेल कार्मेन अबास्काल को उनके लंबे समय से रहने वाले घर से बेदखल कर दिया गया, जिससे किरायेदारों के अधिकारों के लिए बड़े पैमाने पर विरोध हुआ। छात्र, किरायेदार संगठनों और आवास अधिकार कार्यकर्ता किराए पर नियंत्रण और बेदखली रोकने की मांग कर रहे हैं।
बेल्जियम में ट्रेड यूनियन, शिक्षक, छात्र, सरकारी कर्मचारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। बजट में कटौती, सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च घटाने और सामाजिक सुरक्षा में बदलाव के खिलाफ लोग आवाज़ उठा रहे हैं। अक्टूबर में ब्रसेल्स में हजारों लोगों ने रैली निकाली, और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं।
फ्रांस में विरोध की शुरुआत स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षक की कमी और भीड़भाड़ वाली कक्षाओं से हुई। छात्र संगठनों के साथ शिक्षक, ट्रेड यूनियन और अन्य समूह भी जुड़ गए। अब महंगाई, पेट्रोल‑डीजल की बढ़ती कीमतें, वेतन की गिरावट और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति प्रमुख मुद्दे बन चुके हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें वाहनों में आग लगाना, सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचाना और पुलिस के साथ टकराव शामिल है।
ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर से पहले छात्र संगठनों और वामपंथी समर्थकों ने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ प्रदर्शन किया। वे लोकतंत्र और सार्वजनिक शिक्षा पर दक्षिणपंथ के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, साथ ही मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की नीतियों के समर्थन में भी सड़कों पर उतर रहे हैं। चुनाव का दूसरा दौर 25 अक्टूबर को निर्धारित है।
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