सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में किया। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाला यह कार्यक्रम 600 से अधिक कंपनियों, 52 देशों के प्रतिनिधियों और 150 से अधिक वक्ताओं को एक मंच पर लाया।
कार्यक्रम की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण” के तहत प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन, 12 स्टेट बूथ, स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन शामिल थे।
सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्री नहीं है; यह डिजाइन, वेफर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और संबंधित उपकरण, गैस, रसायन, सामग्री तक की पूरी वैल्यू चेन को समेटे हुए है। ईडीए टूल्स, आईपी, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और प्रशिक्षित इंजीनियर इस श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने तेज़ी पकड़ी है। जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47.96 अरब डॉलर रहा और यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया। मोबाइल फोन, जो 2014‑15 में 153वें स्थान पर थे, अब सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है।
देश में बेचे जाने वाले मोबाइल फोन का 99.2 % भारत में ही निर्मित होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से लगभग 25 लाख नौकरियाँ उत्पन्न हुई हैं, जिनमें से 12 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों में 70 % महिलाएँ हैं।
घरेलू वैल्यू एडिशन 15 % से बढ़कर 23 % हो गया है। 40 से अधिक प्रमुख घटक निर्माता ने भारत में अपनी फैक्ट्रियाँ स्थापित या विस्तारित कर दी हैं।
दिसंबर 2021 में मंजूरी प्राप्त सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 का बजट ₹76,000 करोड़ था। इसका लक्ष्य फैब, डिस्प्ले फैब, पैकेजिंग और चिप डिजाइन को घरेलू इकोसिस्टम में लाना था। तब से 12 मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिनमें कुल ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इन परियोजनाओं से उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी। जुलाई 2026 तक माइक्रोन, कायन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, और एक और कंपनी 2026 में संचालन शुरू करने की उम्मीद है।
भारत की डिजाइन क्षमताएँ विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं। सरकार ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसका बजट ₹1,27,500 करोड़ है। इस चरण में फैब के साथ-साथ चिप डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, मशीनरी, गैस, सामग्री और टैलेंट विकास पर बल दिया गया है।
सेमीकॉन 2.0 के प्रमुख लक्ष्यों में भारतीय डिजाइन वाली चिप, सेमीकंडक्टर आईपी, सिस्टम‑ऑन‑चिप, उन्नत पैकेजिंग, फोटोनिक्स, सेंसर, एमईएमएस, डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना शामिल है।
इस व्यापक इकोसिस्टम से 50 000 से 60 000 प्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा होने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 200 स्टार्टअप और कंपनियों को भारत में चिप डिजाइन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ा है, भारत की सेमीकंडक्टर मांग का 90 – 95 % अभी भी आयात पर निर्भर है। नीति आयोग की रिपोर्ट में आत्मनिर्भरता को चरणबद्ध बढ़ाने की बात कही गई है, जिसमें डिजाइन, आईपी, पैकेजिंग और सामग्री की वैल्यू भी भारत में रहनी चाहिए।
रोडमैप में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाई‑परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए उन्नत चिप डिजाइन पर जोर दिया गया है, और 2035 तक 100 से अधिक ब्रेकथ्रू सेमीकंडक्टर आईपी विकसित करने की महत्वाकांक्षा रखी गई है।
“चिप्स टू स्टार्टअप” कार्यक्रम के तहत 332 शैक्षणिक संस्थानों को अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका 240 लाख घंटे से अधिक उपयोग हुआ है और 68 000 लोगों को प्रशिक्षण मिला है। एनआईईएलआईटी कालीकट और गुवाहाटी में भी प्रशिक्षण लैब स्थापित की गई हैं, जिनका लक्ष्य 10 वर्ष में 60 000 कुशल इंजीनियर तैयार करना है।
फ्यूचरस्किल्स प्राइम और अन्य पहल के माध्यम से 5 हज़ार प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसमें प्रमाणन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और इंटर्नशिप शामिल हैं। आईबीएम के साथ समझौते के तहत भारत में सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो नवाचार और आईपी साझा करने पर केंद्रित होगा।
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