मिडटर्म चुनाव के परिणामों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को गंभीर झटका दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर लिया, जिससे कांग्रेस में पावर बैलेंस पूरी तरह बदल गया।
रिपब्लिकन के भीतर अब हार के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषकर उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने ईरान युद्ध को पार्टी की हार की प्रमुख वजह बताया, जबकि ट्रम्प ने इस बयान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। इस कारण दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
दोनों सदनों में रिपब्लिकन को बड़ा झटका
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स ने 228 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन को केवल 139 सीटें मिलीं। बहुमत के लिये 218 सीटें चाहिए थीं। सीनेट में भी डेमोक्रेट्स ने 54 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, जबकि रिपब्लिकन के पास 44 सीटें बचीं। इन परिणामों के बाद ट्रम्प के एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले से कहीं कठिन हो सकता है।
ईरान युद्ध को पार्टी की हार की वजह?
उपराष्ट्रपति वेंस ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट में कहा कि ईरान युद्ध ने रिपब्लिकन को वोटों से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस युद्ध को अगले छह साल तक सीनेट में बहुमत खोने के लिये उचित समझता है, तो वह तर्कसंगत नहीं हो सकता। ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में इस युद्ध को लगातार सही ठहराया और परिणामस्वरूप वेंस के बयान को सार्वजनिक रूप से चुनौती नहीं दी।
ट्रम्प का जवाब
वेंस के बयान के बाद ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति से बात की और उनके विचारों को समझा। ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्हें पता था ईरान युद्ध का चुनाव पर असर पड़ेगा, फिर भी उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। इस तरह दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी में स्पष्ट अंतर दिखा।
सर्वे के आंकड़े
एक लाख से अधिक मतदाताओं पर किए गए सर्वे में 10 में से 6 ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को गलत फैसला माना। लगभग एक‑तिहाई मतदाताओं ने इसे अपने वोट के लिए सबसे अहम मुद्दा बताया, जबकि आधे ने महंगाई और भ्रष्टाचार को प्राथमिकता दी। डेमोक्रेटिक वोटरों ने युद्ध को अधिकांशतः गलत माना, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में 8 में से 10 ने इसे सही ठहराया।
वेंस का भविष्य‑रुख
वेंस ने लंबे समय से अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के प्रति सतर्क रुख अपनाया है। इराक युद्ध में मरीन के रूप में सेवा करने के बाद उन्होंने कई बार लंबे युद्धों की आलोचना की। अब चुनावी हार के बाद उन्होंने महंगाई, इज़राइल के साथ रिश्ते और इमीग्रेशन नीति को हार के कारणों में गिना। उन्होंने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अभी तय नहीं किया, लेकिन इस हार से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर नया सन्देश मिलने की संभावना है।
गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स आगे
गवर्नर पदों के लिए हुए चुनाव में 36 में से 34 राज्यों के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिनमें डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने 22 जीत हासिल की और रिपब्लिकन ने 12। दो राज्यों में मतगणना जारी है। ये परिणाम ट्रम्प के सामने राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा रहे हैं, और यह देखना बाकी है कि रिपब्लिकन पार्टी अपनी हार से क्या सीख लेती है और ट्रम्प‑वेंस के बीच का अंतराल कितना गहरा होता है।
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