अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को दोनोँ सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट – में डेमोक्रेटिक बहुमत का सामना करना पड़ा। यह परिणाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों पर व्यापक सवाल उठाता है।
रिपब्लिकन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह बताया, पर सर्वेक्षण से पता चलता है कि मतदाता सिर्फ युद्ध से ही नहीं, बल्कि महंगाई, ईंधन की ऊँची कीमत और सरकार के कामकाज से भी असंतुष्ट थे।
वेंस ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर ट्रम्प की ईरान नीति पर सवाल उठाए और कहा कि भविष्य में वह इस दिशा से दूर रहने की संभावना देखता है। यह बयान ट्रम्प से दूरी बनाने के इरादे को भी दर्शाता है, खासकर 2028 के संभावित राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए।
महंगाई और रोज़मर्रा के खर्च ने अमेरिकी वोटरों की नाराज़गी को बढ़ा दिया। पेट्रोल‑डीजल से लेकर किराने के सामान तक की कीमतों में लगातार उछाल ने आम परिवारों के बजट को बर्बाद कर दिया। Reuters/Ipsos के एक सर्वे में 47 % रजिस्टर्ड वोटरों ने कहा कि जीवनयापन का खर्च उनका सबसे बड़ा मतदान कारण है, जबकि 71 % ने ट्रम्प के आर्थिक प्रबंधन पर असंतोष जताया।
इसी तरह ABC News के एक प्रारंभिक सर्वे में 49 % वोटरों ने कहा कि जीवनयापन का खर्च उनके कांग्रेस वोट को तय करने वाला प्रमुख मुद्दा है, जबकि 55 % ने सरकारी भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। केवल 34 % ने ईरान युद्ध को अपने वोट के लिए अहम बताया, जिससे स्पष्ट होता है कि आर्थिक समस्याएँ चुनावी परिणाम में अधिक प्रभावी रही।
ईरान के साथ युद्ध ने तेल बाजार को भी हिला दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज़ों की आवाज़ाही बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे अमेरिकी पेट्रोल‑डीजल की कीमतें आसमान छू गईं। ट्रम्प ने इस संघर्ष को ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत उचित बताया, पर चुनाव से पहले यह नीति आर्थिक असंतोष को और बढ़ा गई।
परिणामस्वरूप, तेल की कीमतें मध्यावधि चुनाव के बाद घटकर WTI के 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, लेकिन इस गिरावट का मतलब युद्ध का अंत नहीं है; बाजार अभी भी अमेरिका‑ईरान रिश्तों और होर्मुज की स्थिति पर निर्भर है।
ट्रम्प की अलोकप्रियता ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी असर डाला। एक NORC सर्वे में बताया गया कि आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दे वोटरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण थे, और ट्रम्प की नीतियों को नुकसानदेह मानने वाले मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
हिस्पैनिक और अफ्रीकी‑अमेरिकी वोटरों का रुख भी बदल गया। पहले कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन को समर्थन मिलता था, पर इस बार कई पारंपरिक रिपब्लिकन जिलों में डेमोक्रेट्स ने जीत हासिल की। इमिग्रेशन नीति और महंगाई ने इन समुदायों की राय को प्रभावित किया। जेडी वेंस ने भी चुनाव के बाद इमिग्रेशन कानूनों पर पुनर्विचार करने की संभावना जताई।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की रणनीति भी प्रमुख रही। उन्होंने महंगाई, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लगातार उठाया और स्थानीय समस्याओं को चुनावी एजेण्डा का हिस्सा बनाया, जिससे पारंपरिक रिपब्लिकन क्षेत्रों में भी उनका समर्थन बढ़ा।
कुल मिलाकर, मध्यावधि चुनाव ने दिखा दिया कि विदेश नीति और युद्ध जैसे बड़े मुद्दे तभी राजनीतिक कीमत वसूलते हैं जब उनका असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। ट्रम्प की ‘इज़राइल‑पहला’ और ‘ईरान‑विरोधी’ नीति ने चुनावी परिणाम को प्रभावित किया, पर अंत में मतदाताओं ने रोज़मर्रा की आर्थिक चुनौतियों, सरकार की जवाबदेही और सामाजिक नीतियों को प्राथमिकता दी।
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