भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में आठ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें बरेली के आंवला से पांच बार के विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह भी शामिल हैं। 16 अक्तूबर को प्रस्तावित चुनाव के लिए भाजपा ने इस बार कई नए चेहरों के साथ संगठन और सरकार में सक्रिय नेताओं को भी मौका दिया है। धर्मपाल सिंह को मंत्री पद पर रहते राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने से बरेली-रुहेलखंड की राजनीति में इसके निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं।
लोधी समाज के प्रमुख भाजपा चेहरों में शुमार धर्मपाल सिंह की राजनीति में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्हें बरेली मंडल में लोधी समाज के प्रमुख भाजपा नेताओं में माना जाता है। यही वजह है कि राज्यसभा की मौजूदा सूची में उनका चयन केवल बरेली जिले तक सीमित राजनीतिक संदेश के बजाय व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भाजपा की घोषित सूची में ओबीसी, दलित, महिला और सामान्य वर्ग से जुड़े अलग-अलग सामाजिक आधार वाले चेहरों को जगह मिली है। धर्मपाल सिंह का चयन इसी व्यापक सामाजिक संतुलन का एक हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को आधिकारिक कारण के रूप में नहीं बताया है।
2027 से पहले संगठन के लिए भी संदेश उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय धर्मपाल सिंह जैसे लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय नेता को राज्यसभा प्रत्याशी बनाना संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। राज्यसभा भेजे जाने की स्थिति में आंवला में पार्टी को नया चेहरा तलाशना होगा। इसके साथ ही धर्मपाल सिंह का अनुभव विधानसभा क्षेत्र तक सीमित न रहकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के काम आ सकता है। इसे 2027 की सीधी चुनावी रणनीति कहना अभी उचित नहीं होगा, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उनका उच्च सदन के लिए चयन भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों में बदलाव का संकेत जरूर देता है।
मंत्री पद का क्या होगा? राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होते ही धर्मपाल सिंह का कैबिनेट मंत्री पद समाप्त नहीं होता। अभी वह राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार हैं। नामांकन, चुनाव और निर्वाचन के बाद ही उनकी आगे की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होगी। भाजपा ने मौजूदा कैबिनेट मंत्री और पांच बार के विधायक को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनके निर्वाचित होने की स्थिति में आगे मंत्रिमंडल में बदलाव या विभागीय पुनर्व्यवस्था का फैसला पार्टी और सरकार को करना होगा।
बरेली को एक साथ दो राज्यसभा चेहरे भाजपा ने इस बार बरेली से जुड़े दो अलग राजनीतिक चेहरों को राज्यसभा के लिए चुना है। श्रुति गंगवार की पहचान उद्यमिता, बैंकिंग और सामाजिक गतिविधियों के साथ संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी है, जबकि धर्मपाल सिंह की पहचान लंबी चुनावी राजनीति, मंत्री पद और लोधी समाज के प्रमुख भाजपा चेहरे के रूप में रही है। यानी एक ही सूची में बरेली को नई पीढ़ी की महिला और उद्यमी चेहरे के साथ लंबे जमीनी राजनीतिक अनुभव वाले नेता का प्रतिनिधित्व मिला है। रूहेलखंड की राजनीति के लिहाज से यह भाजपा के लिए दो अलग सामाजिक और राजनीतिक आधारों को उच्च सदन तक पहुंचाने वाला फैसला है।
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