कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज दिल्ली में एक हाई‑टी मीटिंग आयोजित की, जिसमें ‘INDIA’ ब्लॉक के प्रमुख नेता, सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता और युवा प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के अगले चरण की विस्तृत योजना बनायी गयी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों को एक ही छतरी के नीचे लाना और कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़कों पर राजनीतिक संघर्ष को जारी रखना था। राहुल गांधी ने कहा कि अदालतों में लड़ाई चलती रहेगी, पर असली मुकाबला जनता के सामने होना चाहिए।
‘INDIA’ गठबंधन के कई प्रमुख दल – कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, सीपीआई (ML), सीपीआई (M), झारखंड मुक्ति मोर्चा, IUML, जम्मू‑कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, NCP‑SP, शिवसेना (UBT), TVK, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, केरल कांग्रेस (M) एवं (J) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी – सभी के शीर्ष नेता एक ही टेबल पर बैठे। प्रियंका गांधी वाड्रा ने सभी मेहमानों से मिलकर फीडबैक लिया।
सिविल सोसाइटी और युवा समूहों के प्रतिनिधियों, जैसे योगेंद्र यादव, नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, AISF के विराज देवांग, ‘Youth for Swaraaj’ के संदीप और बालाजी, आयुषी घोष, कुंकी चौधरी और प्रो. एन.एस.यू. कुमार ने भी भाग लिया। राहुल गांधी ने टेबल‑टू‑टेबल बातचीत कर भविष्य की रणनीति और आंदोलन की दिशा पर चर्चा की। सोनिया गांधी भी उपस्थित लोगों के साथ बातचीत करती रहीं।
जंतर‑मंत्री को फिर से जनता के लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के केंद्र के रूप में पुनः प्राप्त करने की मांग बैठक में प्रमुख थी। शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने कहा, “हम जंतर‑मंत्री वापस लेंगे, इसके लिए योजना बन रही है।” इस दिशा में सभी ने एकजुटता का संकल्प लिया।
बैठक का एक और लक्ष्य उन समूहों तक पहुंचना था जो पिछले ‘दिल्ली चलो’ आह्वान से बाहर रह गए थे। CJP (सिविल जस्टिस पर्सन) से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई और सभी ने आंदोलन के दायरे को विस्तारित करने की जरूरत पर बल दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इस सभा को आंदोलन का “टर्निंग पॉइंट” कहा, यह कहते हुए कि सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों के साथ मिलकर एक विशाल जन‑आंदोलन बनना संभव है। उन्होंने इस मीटिंग की गर्मजोशी की भी सराहना की।
भविष्य के बड़े प्रदर्शनों की टाइमिंग को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि जश्न‑उत्सव (जैसे दुर्गा पूजा, दशहरा) के दौरान आंदोलन को व्यवस्थित रूप से चलाना चाहिए, ताकि कोई बाधा न बने। सभी ने एक समग्र कैलेंडर बनाने की सहमति जताई।
सीपीआई (ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने दोहराया कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आराम नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “यह एक लंबी लड़ाई है और हम मिलकर लड़ने के लिए तैयार हैं।” यह बयान चुनाव आयोग पर दबाव बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हाई‑टी का कुल संदेश स्पष्ट था: विपक्ष इस विरोध को केवल संसद या अदालतों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों को मुख्य साझेदार बनाकर इसे सड़कों पर ले जाना चाहता है। अब चुनौती यह है कि इस एकजुटता को जमीन पर एक बड़े जन‑आंदोलन में बदल दिया जाए।
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