वंदे भारत जैसी सेमी हाईस्पीड ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की तैयारी के बीच रेलवे अब पटरियों के नीचे छिपी खामियों का भी पता लगाएगा। इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से ट्रैक की अंदरूनी स्थिति की जांच कराने के लिए 26.91 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। जीपीआर तकनीक पटरियों का डिजिटल ‘एक्स-रे’ करेगी।
इसमें ट्रैक के नीचे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें भेजकर बैलास्ट बेड और जमीन की विभिन्न परतों की स्थिति का पता लगाया जाएगा। खास बात यह है कि जांच के लिए पटरियों की गिट्टी हटाने या बड़े पैमाने पर खुदाई करने की जरूरत नहीं होगी। रडार की मदद से ट्रैक के नीचे पानी जमा होने, गिट्टी में मिट्टी और महीन कण भरने, बैलास्ट के खराब होने तथा जमीन की निचली परत कमजोर होने जैसी खामियों को चिह्नित किया जा सकेगा। इससे उन स्थानों की पहचान पहले ही हो जाएगी, जहां तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के लिए ट्रैक को मजबूत करने की जरूरत है।
दरअसल, 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चलने वाली वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए ट्रैक की मजबूती और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। सामान्य गति की तुलना में तेज रफ्तार पर ट्रैक की छोटी खामी भी कंपन और झटके को बढ़ा सकती है। ऐसे में रेलवे अब सिर्फ पटरी और स्लीपर की ऊपर से होने वाली जांच पर निर्भर रहने के बजाय उसके नीचे के पूरे ढांचे का डिजिटल डेटा तैयार करेगा।
वहीं प्रयागराज के रामबाग रेलवे स्टेशन से जल्द ही 24 बोगी वाली ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए रेलवे ने प्लेटफॉर्म नंबर एक को ऊंचा करने के साथ उसकी लंबाई बढ़ाने का सर्वे शुरू कर दिया है। प्लेटफॉर्म छोटा होने की वजह से अभी यहां से 17 बोगी तक की ट्रेनों का ही संचालन हो पा रहा है। प्लेटफॉर्म का विस्तार होने के बाद लंबी दूरी की 24 बोगी वाली ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा। हाल ही में हुई तेज बारिश के बाद रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर पानी भर गया। जलभराव के कारण यहां से चलने वाली पैसेंजर और मेमू ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। इसके बाद रेलवे के अफसरों ने स्टेशन की व्यवस्थाओं को देखा गया।
इसके साथ ही उत्तर मध्य रेलवे से जुड़ी एक और गुड न्यूज है। प्रयागराज जंक्शन पर यात्रियों को जल्द ही खाने-पीने की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज जंक्शन पर रेल कोच रेस्टोरेंट शुरू करने के लिए फिर से टेंडर जारी किया है। प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहले फूड प्लाजा संचालित होता था। इसके बंद होने के बाद यात्रियों के लिए खाने-पीने के विकल्प काफी सीमित हो गए हैं। सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को सस्ते भोजन की होती है। जंक्शन पर 15 रुपये में मिलने वाला जनता खाना भी अब उपलब्ध नहीं है। फिलहाल प्लेटफॉर्म नंबर एक पर कुछ जगहों पर नाश्ता और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें ही मिल रही हैं। महाकुम्भ 2025 के दौरान प्रयागराज जंक्शन पर रेल कोच रेस्टोरेंट शुरू किया गया था। पुराने रेल कोच को रेस्टोरेंट के रूप में तैयार कर भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, यह रेस्टोरेंट कुछ महीने चलने के बाद बंद हो गया। इसके बाद से जंक्शन पर दोबारा रेल कोच रेस्टोरेंट शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। मंडल पीआरओ अमित सिंह ने बताया कि सूबेदारगंज स्टेशन पर रेल कोच रेस्टोरेंट चल रहा है।
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