गोमती नदी का पानी कई दिनों से बढ़ता जा रहा है, फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में घरों तक पानी पहुंच चुका है।
बढ़ते जलस्तर के कारण गोमतीनगर में लामार्टिनियर कॉलेज के पीछे निर्माणाधीन फ्लाईओवर की 30 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री बहा ली गई।
पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के पास दस्तावेज़ भी समेटने का समय नहीं रहा।
सेज क्रिकेट स्टेडियम भी पानी में डूब गया, मैदान लबालब रहा, सेज क्रिकेट एकेडमी बंद, खिलाड़ियों का अभ्यास रुक गया और अगले दिनों मैच नहीं होंगे। तीन पंप सेट लगाए गए, पर मैदान के खराब होने की चिंता बनी हुई है।
इकाना स्टेडियम प्रांगण के बाहर भी पानी पहुंचा, नाले को मिट्टी से बंद करके अंदर जाने से रोका गया।
पानी एमार गोमती ग्रींस की ओर बढ़ा, सड़क पर भर गया। रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, नगर निगम और बिजली निगम से जलस्तर निगरानी, बिजली उपकेंद्र सुरक्षा और आपदा प्रबंधन टीमों के संपर्क विवरण की मांग की।
जलस्तर 108.14 मीटर, यानी 2.44 मीटर ऊपर, 8 फीट तक पहुंच गया। हनुमत धाम मंदिर परिसर, शनि देव मंदिर व लक्ष्मण मेला मैदान में भी पानी भर गया, और रिवरफ्रंट फूड वैली अस्थायी रूप से बंद कर दी गई।
फैजुल्लागंज में 200 से अधिक घर प्रभावित हैं। बैराज के सभी 10 गेट खुले हैं ताकि पानी डाउनस्ट्रीम में तेजी से निकल सके। 48 आउटलेट बंद कर दिए गए हैं ताकि नदी का पानी शहर के ड्रेनेज नेटवर्क में न घुसे।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और सीतापुर से आने वाला पानी लखनऊ पहुंच रहा है, जिससे बारिश रुकने के बावजूद जलस्तर बढ़ा हुआ है। उम्मीद है कि सोमवार से गोमती के जलस्तर में गिरावट शुरू होगी।
बीकेटी तहसील के आसपास के गांवों में पानी थोड़ा कम हुआ है, पर पीड़ितों की मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं। 30 नावें, चार राहत शिविर और सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां भोजन, राहत किट, दवाएं, क्लोरीन गोलियां और पशुओं के लिए हरा चारा एवं भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने शिविरों और भंडारण केंद्र का निरीक्षण किया, राजस्व, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों से राहत कार्यों की जानकारी ली और अतिरिक्त नाव व संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हीरापुरवा, लासा के बाद अकड़रिया गांव की सड़क पर भी पानी भरने लगा है। फसल पांच से दस फिट तक पानी में डूब चुकी है, और भैंसों को रस्सी से बाँधकर बचाने की कहानी ग्रामीणों ने सुनाई।
बसहरी और बहरौरा गांव में धान, उड़द, सब्जी और चारे के खेत पानी में डूबे हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सतीश, रमेश और बसंत जैसे निवासियों के घर भी पानी में डूबे हुए हैं।
दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड में सैथा समेत आसपास के गांवों में बिगड़े हालात की खबर आई, नगर निगम प्रशासन ने तीन राहत‑बचाव कैंप और तीन नावें लगवाईं, जिससे पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। सैंथा, दौलतखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा, उमरावखेड़ा और जेहटा रोड के हयातनगर मोड़ गांव में भी ग्रामीणों को सहायता मिल रही है।
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