गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से लखनऊ के निचले इलाकों और धार्मिक स्थलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।
हनुमान मंदिर परिसर में भी पानी प्रवेश कर चुका है, जिससे मंदिर के चरणों तक पहुंच गया है।
फैजुल्लागंज से लेकर बीकेटी के ग्रामीण इलाकों तक कई जगहों पर पानी भरने के कारण सड़कों और गलियों में चलना मुश्किल हो गया है।
राहत पहुँचाने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
रविवार को जिलाधिकारी विशाख और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार स्वयं प्रभावित इलाकों में पहुंचे।
सड़क और नाव से निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से बातचीत की।
गोमती का जलस्तर 108.14 मीटर तक पहुंचा, जो सामान्य स्तर से लगभग आठ फीट ऊपर है।
निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है।
हनुमान मंदिर के मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी ने बताया कि पानी मंदिर के चरणों तक पहुंच गया है और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना बाहर से की जाती है।
उन्हें याद है कि पहले भी इसी तरह की स्थिति कई बार देखी गई है।
फैजुल्लागंज में DM और JCP ने नाव पर सवार होकर निरीक्षण किया।
जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त ने प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया और राहत सामग्री की उपलब्धता की जाँच की।
प्रशासन ने राहत कार्यों में ढिलाई न होने का निर्देश दिया और जलस्तर पर निरंतर नजर रखने का कहा।
नगर निगम की टीम ने पंपसेट लगाकर जलनिकासी और साफ-सफाई का कार्य किया।
गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
10 नावों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई ताकि जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच बनाई जा सके।
राहत शिविरों और सहायता केंद्रों में भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं और मेडिकल किट तैयार रखने के निर्देश दिए और जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीम भेजी जा रही है।
पशुओं के लिए भूसा और चारा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया गया और रात में पुलिस गश्त बढ़ाई गई।
रात्रिकालीन निगरानी से जलस्तर बढ़ने या मदद की जरूरत पड़ने पर राहत टीम तुरंत पहुँच सके।
लखनऊ और ग्रामीण इलाकों में गोमती के बढ़े जलस्तर का असर जारी है, बख्शी का तालाब, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में पानी का असर बना हुआ है।
कुछ इलाकों में जलस्तर में हल्की गिरावट के बावजूद लोगों की कठिनाइयाँ जारी हैं।
नावों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और विस्थापित परिवारों के लिए भोजन व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग मच्छरों और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए पंपसेट से पानी निकालने के साथ फॉगिंग कर रहा है और ड्रोन से एंटी-लार्वा का छिड़काव कर रहा है।
फूड वैली को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और लोगों से जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की जा रही है।
गोमती के बढ़े जलस्तर ने 2006-07 के बाद के गंभीर बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं और प्रशासन ने राजस्व, स्वास्थ्य, नगर निगम, पुलिस और पशुपालन विभाग की टीमों को अलर्ट पर रखा है।
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