सऊदी अरब और यमन के बीच चल रहे संघर्ष ने 15 अक्टूबर को एक नया मोड़ ले लिया, जब हूती विद्रोहियों ने यमन के अदन में राष्ट्रपति भवन पर मिसाइल हमला किया, जिसमें पाँच लोग मारे गए। इसके बाद सऊदी ने रियाद के हवाई अड्डे और तेल सुविधाओं पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।
16 अक्टूबर को पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी हैं और अमेरिकी दूतावास ने सऊदी के हवाई अड्डों पर संभावित हमलों की चेतावनी दी। इस तनाव ने भारत की उड़ानों पर भी असर डाला; एअर इंडिया ने सुरक्षा कारणों से रियाद, दम्माम और जेद्दा के लिए सभी उड़ानें 20 अक्टूबर तक रद्द कर दीं।
हूती विद्रोहियों की उत्पत्ति और उनका सऊदी अरब को निशाना बनाना समझना जरूरी है। 2014 में उन्होंने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के साथ संघर्ष तेज हो गया। मार्च 2015 में सऊदी ने कई देशों के साथ मिलकर एक सैन्य गठबंधन बनाया और यमन में हस्तक्षेप शुरू किया, जिसका मकसद मान्य सरकार को फिर सत्ता में लाना और हूती की बढ़ती ताकत को रोकना था।
हूती आंदोलन मुख्यतः यमन के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है और इसकी जड़ें ज़ैदी शिया समुदाय में हैं। वे सऊदी पर आरोप लगाते हैं कि उसकी सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों से यमन के लोगों को नुकसान पहुंचा है, जबकि सऊदी अरब उन्हें अपनी सीमा, हवाई अड्डे और तेल सुविधाओं के लिए खतरा मानता है।
ईरान इस संघर्ष में एक प्रमुख बाहरी खिलाड़ी है। वह हूती को हथियार, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे उनकी मिसाइल और ड्रोन क्षमताएँ बढ़ी हैं। हालांकि, हूती अपने राजनीतिक हितों को भी प्राथमिकता देते हैं और पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में नहीं हैं। ईरान‑सऊदी प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्रीय टकराव को और जटिल बनाती है।
यमन के बाब‑अल‑मंदेब जलडमरूमध्य की रणनीतिक महत्ता को देखते हुए, इस संघर्ष का असर लाल सागर में जहाज़ों की आवाज़ाही और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
2022 में संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थता से एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था, लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ा और स्थायी समझौता नहीं बन सका। सत्ता, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर नियंत्रण, तथा युद्ध के नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे अभी भी विवाद का कारण हैं।
यमन में आम नागरिकों को सबसे बड़ा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, जिनमें 1.83 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं और 22 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। अस्पताल, स्कूल और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा है, जबकि दवाइयों, भोजन और साफ पानी की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
सऊदी अरब पर लगातार हुए हमलों ने हवाई यात्रा और तेल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई एयरलाइनों ने रूट बदलें या उड़ानें रद्द कीं, और एअर इंडिया ने 20 अक्टूबर तक रियाद, दम्माम और जेद्दा की सभी उड़ानें बंद कर दीं। यह कदम भारतीय प्रवासियों और व्यापारिक हितों पर सीधे असर डालता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय कामगार सऊदी में रहते हैं।
सऊदी‑हूती संघर्ष सिर्फ दो देशों का टकराव नहीं, बल्कि यमन के गृहयुद्ध, क्षेत्रीय शक्ति प्रतिद्वंद्विता और ईरान‑सऊदी प्रतिस्पर्धा का मिश्रण है। इस जटिल परिदृश्य में शांति की राह अभी भी कठिन दिख रही है।
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