सारण में बाढ़ से मची तबाही के बीच पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने रविवार को जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित लोगों के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की।
मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ ने केवल छपरा या सारण को ही नहीं, बल्कि बिहार के बड़े हिस्से को प्रभावित किया है। ऐसे में राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र से बड़े स्तर पर सहायता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों की गन्ना, मक्का और धान सहित विभिन्न फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ फसल का नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर कृषि ऋण चुकाने का दबाव है। उन्होंने किसानों का ऋण माफ करने और फसल क्षति का उचित मुआवजा देने की मांग की।
सांसद ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों और पशुधन के लिए भी विशेष मुआवजे की मांग की। उन्होंने कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने पर दो लाख रुपये और पक्के मकान के लिए 10 लाख रुपये की सहायता देने की मांग की। बाढ़ में मारे गए या प्रभावित पशुओं के लिए भी मुआवजा देने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि नासा के लोग यहां बांध बनाने नहीं आए थे। बांधों का निर्माण स्थानीय स्तर पर संबंधित विभाग, अधिकारियों और एजेंसियों की निगरानी में हुआ है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर फ्लड फाइटिंग के नाम पर मानकों की अनदेखी की गई और बालू की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। पप्पू यादव ने इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता की आशंका जताते हुए बांध निर्माण और फ्लड फाइटिंग से जुड़े कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। ठेकेदारों और एजेंसियों की भूमिका की जांच की मांग सांसद ने बांध निर्माण और फ्लड फाइटिंग से जुड़े ठेकेदारों, अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की। उन्होंने श्रीराम और एसपी सिंघला जैसी एजेंसियों को बार-बार टेंडर मिलने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उनका कहना था कि बाढ़ से हुई तबाही के लिए केवल प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार ठहराकर जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।
उन्होंने उच्चस्तरीय जांच कराकर बाढ़ से हुई क्षति और बांधों की स्थिति की समीक्षा कराने की मांग की। सांसद ने कहा कि सरकार में बैठे लोग हों या अधिकारी, यदि कहीं लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुई तबाही के बाद जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में लोगों को इस तरह की तबाही का सामना न करना पड़े।
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