बेगूसराय में गंगा की अविरल धारा, संतों की साधना और सनातन परंपरा की जीवंत विरासत को समेटे सिमरिया धाम एक बार फिर कार्तिक कल्पवास मेले के लिए तैयार हो रहा है। गंगा तट पर लगने वाले राजकीय कार्तिक कल्पवास मेले को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों का आगमन शुरू हो चुका है।
22 एकड़ में बसने जा रही आस्था की नगरी, आठ सेक्टरों में होगी व्यवस्था औटा-सिमरिया सिक्सलेन सड़क पुल के पूरब स्थित मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, जमीन के समतलीकरण, सेक्टर निर्धारण और खालसा निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पूरे क्षेत्र को आठ सेक्टरों और 100 से अधिक ब्लॉक में विभाजित किया जा रहा है। बिहार सरकार की ओर से प्रत्येक खालसा के महंत को 90 गुणा 90 फीट जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसी परिसर में संत-महात्माओं और कल्पवासियों के ठहरने की व्यवस्था होगी।
जिला प्रशासन के निर्देश पर खालसा जनसेवा समिति के अध्यक्ष तन तुलसी विष्णुदेवाचार्य की देखरेख में पिछले दो दिनों से तैयारियां जारी हैं। लक्ष्य है कि मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से पहले मेला क्षेत्र को व्यवस्थित किया जा सके।
वृंदावन से अयोध्या तक संतों का आगमन, गंगा तट पर बढ़ी रौनक कल्पवास मेले की आहट के साथ सिमरिया धाम में धार्मिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। वृंदावन के महंत लाडली दास, मधुबनी के महंत मिथिलेश दास उर्फ बौआ हनुमान, खखड़ बाबा खालसा के महंत विष्णुदेवाचार्य, लक्ष्मी नारायण कथाकुंज आश्रम के महंत हरिकांत शास्त्री, श्रीमन नारायण खालसा की महंत गंगा देवी और अयोध्या मिथिला नगर खालसा के महंत किशोरी शरण सहित कई संत यहां पहुंच चुके हैं।
संत-महात्मा अपने-अपने खालसा तैयार करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ गंगा तट पर पूजा-पाठ, जप, तप, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल और व्यापक होने की उम्मीद है।
आस्था के आयोजन में सुविधाओं की दरकार, संतों ने उठाई आवाज मेले की तैयारियों के बीच पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था को लेकर संतों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। महंत मिथिलेश दास उर्फ बौआ हनुमान और महंत हरिकांत शास्त्री ने मांग की है कि कल्पवासियों के पहुंचने से पहले जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। मेला क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल के लिए चापाकल लगाने, पर्याप्त शौचालयों का निर्माण कराने, नियमित साफ-सफाई और जमीन का समतलीकरण करने की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा, क्षेत्र में लगी पांचों हाईमास्ट लाइटों को जल्द चालू कराने तथा संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए समुचित प्रबंध करने की मांग की गई है।
संतों का कहना है कि कल्पवास के दौरान श्रद्धालु लंबे समय तक गंगा तट पर रहकर धार्मिक साधना करते हैं। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता उनकी सुविधा और स्वास्थ्य, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
मेला क्षेत्र में रिफाइनरी के दो संयंत्र, हटाने की मांग तेज कल्पवास मेले की तैयारियों के बीच रिफाइनरी के दो बड़े संयंत्रों का मेला क्षेत्र में रखा होना भी चिंता का विषय बताया गया है। महंत हरिकांत शास्त्री ने इन्हें एक-दो दिनों के भीतर हटाने की मांग की है। उनके मुताबिक, खालसा निर्माण और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था पूरी होने के बाद भारी संयंत्रों को वहां से हटाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए मेला शुरू होने से पहले इन्हें हटाना जरूरी है, ताकि उपलब्ध जमीन का इस्तेमाल व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। ये भी पढ़ें- इंडिगो फ्लाइट : पायलट ने क्यों रोक दी कोलकाता की उड़ान? दुबई तक जाने वाले वाले विमान में किस बात पर मची रार
अब प्रशासनिक तत्परता की बारी, श्रद्धालुओं को सुविधाओं का इंतजार सिमरिया धाम का कार्तिक कल्पवास मेला धार्मिक आस्था और संत परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे आयोजन में विशाल मेला क्षेत्र तैयार करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है कि वहां आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षा की सुविधाएं समय पर मिलें। एक तरफ 22 एकड़ में आठ सेक्टर और 100 से अधिक ब्लॉक तैयार करने की कवायद चल रही है, तो दूसरी तरफ संतों की मांगें प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने की चुनौती रख रही हैं। सिमरिया धाम में आस्था के महापर्व की तैयारी शुरू हो चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि श्रद्धालुओं के आगमन से पहले प्रशासन बुनियादी सुविधाओं और मेला क्षेत्र से जुड़े लंबित मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!