महंगाई के चरम पर रहने और कई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज‑दरें लगातार बढ़ाने के बीच, सोना‑चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों की कीमतें लगातार नीचे जा रही हैं। जनवरी 2026 में सोने का रिकॉर्ड 1.91 लाख ₹ प्रति 10 ग्राम और चांदी का 4.20 लाख ₹ प्रति किलोग्राम था, लेकिन आज सोना लगभग 1.42 लाख ₹ और चांदी 1.91 लाख ₹ के आसपास ट्रेड हो रहा है।
पिछले साल सोने‑चांदी में एकतरफा रैली देखी गई थी, परन्तु पिछले 10 महीनों की तीव्र गिरावट ने कई निवेशकों को हिचकिचा दिया है। इतिहास बताता है कि आर्थिक संकट के दौर में कीमती धातुएँ पोर्टफोलियो को स्थिर करती हैं – 2008 के वित्तीय संकट में सोने ने तीन साल में 100 % से अधिक रिटर्न दिया, और 2020 में कोविड‑19 के बाद भी सोना‑चांदी ने अपनी मजबूती साबित की।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति – महंगाई को काबू में रखने के लिए वैश्विक स्तर पर ब्याज‑दरें बढ़ाई जा रही हैं। जब बॉन्ड यील्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न बढ़ता है, तो ब्याज‑रहित धातुओं की मांग में अस्थायी ठहराव आता है, विशेषकर अमेरिका और यूरोप में।
2. मुनाफावसूली – अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना‑चांदी का व्यापार डॉलर में होता है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं में धातुओं की कीमत महंगी हो जाती है, जिससे मांग घटती है। जनवरी 2026 में जब कीमतें अपने शिखर पर थीं, तब बड़े संस्थागत निवेशकों ने भारी मुनाफा बुक किया, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।
क्या यह खरीदारी का मौका है?
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट कोई संकट नहीं, बल्कि तकनीकी करेक्शन है। चांदी में लगभग 54 % तक का सुधार हुआ है, और वर्तमान में बाजार अत्यधिक बिकवाली की स्थिति में है। चांदी केवल गहना नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ भी है, इसलिए दीर्घकालिक मांग मजबूत रहने की संभावना है।
निवेशकों के लिए रणनीति
कीमतों में बॉटम पकड़ना लगभग असंभव है, इसलिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित योजना अपनाएँ। पोर्टफोलियो में 15 % तक कीमती धातुओं को रखें, जिसमें 70 % सोना और 30 % चांदी का अनुपात संतुलित माना जाता है। एक बार में पूरी राशि निवेश करने के बजाय सिल्वर ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में SIP के माध्यम से हर महीने या हर बड़ी गिरावट पर खरीदारी करें। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास 1 लाख ₹ हैं, तो अभी 25 % लगाएँ और बाकी 75 % को 6‑8 महीनों में किस्तों में विभाजित करें।
भविष्य में सोना‑चांदी की भूमिका
इतिहास दोहराता है – जब शेयर बाजार और कागजी मुद्रा अस्थिर होती है, तो निवेशक सोना‑चांदी की ओर रुख करते हैं। चीन सहित कई बड़े देश अभी भी सोना खरीद रहे हैं, क्योंकि वे इसे आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ हेज मानते हैं। जबकि सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता देगा, चांदी की संरचनात्मक मांग ग्रीन एनर्जी और EV के बढ़ते उपयोग से दीर्घकालिक रिटर्न की संभावना बनाती है।
हालाँकि गिरावट से डर कर होल्डिंग बेच देना जोखिमभरा है, लेकिन धैर्य और सही रणनीति के साथ निवेश करने से इस दौर को अवसर में बदला जा सकता है।
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