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इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक स्वतंत्र भारद्वाज नाम खूब चर्चा में है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय कुमार को चोट लगने के मामले में उनका नाम सामने आया है। एक वायरल पॉडकास्ट, उसमें किए गए राजनीतिक कनेक्शन के दावे और पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।
मामला सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर चले एक महीने लंबे प्रदर्शन और अनशन से जुड़ा है। इस दौरान 23 जून को गाजियाबाद निवासी संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। संजय कुमार, एक्टिविस्ट और कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद के पिता हैं। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}
स्वतंत्र भारद्वाज बिहार के दरभंगा के रहने वाले बताए जाते हैं। वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आए और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। विभिन्न पॉडकास्ट में वह खुद को दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़ा बताते रहे हैं और हिंदूवादी संगठनों से अपने संबंधों की बात करते रहे हैं। उनसे जुड़े पुराने वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। एक तस्वीर में वह कथित तौर पर पुलिस के जूते पहने दिखाई दे रहे हैं। उनके कुछ पुराने पॉडकास्ट में जेल, आपराधिक धाराओं और हिंसा से जुड़े विषयों पर बातचीत भी सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है।
मामले ने सबसे ज्यादा तब तूल पकड़ा, जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल हुआ। वायरल वीडियो में वह 23 जून को जंतर-मंतर पर हुई घटना का जिक्र करते हुए संजय कुमार के सिर पर चोट लगने की बात करते दिखाई देते हैं। वीडियो में उनके बारे में दावा किया गया कि उन्होंने संजय कुमार का सिर फोड़ने की बात स्वीकार की। वायरल क्लिप में यह भी दावा किया गया कि संजय कुमार के सिर पर 60 टांके लगे थे। स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ी वायरल बातचीत में यह बात भी सामने आई कि उन्हें इस मामले में सिर्फ एक रात जेल में रहना पड़ा। पॉडकास्ट में जेल और आपराधिक धाराओं को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की। वह कहते दिखाई देते हैं कि जेल में हत्या के मामले में बंद कैदियों को ज्यादा सम्मान मिलता है, जबकि हत्या के प्रयास के मामले में बंद कैदियों को कम सम्मान मिलता है। इसमें पुरानी आईपीसी की धारा 302 और 307 का जिक्र किया गया।
वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज का दावा सामने आया कि उन्हें एक दिन में जेल से बाहर आने में राजनीतिक संपर्कों का फायदा मिला। वीडियो में उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई बताया और उनके प्रभाव की बात कही। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना बड़ा भाई बताते हुए बात की। इसी बयान के बाद यह सवाल उठा कि क्या स्वतंत्र भारद्वाज को राजनीतिक संरक्षण मिला था। वायरल वीडियो के सामने आने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत के दौरान कपिल मिश्रा से फोन करवाकर रिहाई की गुहार लगाई गई और पुरानी आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज न करने के लिए दबाव बनाया गया। सीजेपी ने इसे पुलिस जांच में कथित हस्तक्षेप बताया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया। पुलिस का कहना है कि मामले में किसी तरह का अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप नहीं हुआ और पूरी कार्रवाई कानून और तय प्रक्रिया के अनुसार की गई।
वायरल पॉडकास्ट के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सफाई दी। उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर जो हुआ, वह हमला नहीं बल्कि सेल्फ डिफेंस था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 10-15 लोगों ने घेर लिया था और अगर उन्होंने खुद का बचाव नहीं किया होता तो उन्हें भीड़ पीट सकती थी या उनकी जान जा सकती थी। उनके मुताबिक, इसी दौरान संजय कुमार के सिर में चोट लगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास घटना का वीडियो सबूत के तौर पर मौजूद है। स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय कुमार की चोट को लेकर भी पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया। उनका कहना है कि संजय को कोई बड़ी चोट नहीं लगी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही पॉडकास्ट क्लिप को फर्जी बताया। साथ ही कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को बड़ा भाई कहने वाली बात पर कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि यह बात व्यंग्य में कही गई थी।
इस मामले में सबसे बड़ा अंतर स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े वायरल वीडियो में किए गए दावों और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान में दिखाई देता है। वायरल वीडियो में संजय कुमार के सिर पर गंभीर चोट और 60 टांके लगने की बात कही गई। वहीं दिल्ली पुलिस ने कहा कि संजय की चोट साधारण प्रकृति की थी। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा के मुताबिक, चोट किसी हथियार से नहीं बल्कि कड़े से लगी थी। पुलिस ने सिर की हड्डी टूटने यानी स्कल क्रैक से जुड़े दावे को भी मेडिकल रिपोर्ट और एमएलसी के आधार पर खारिज किया। पुलिस ने कहा कि मामले में एफआईआर पहले से दर्ज थी। स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को कानून के मुताबिक नोटिस दिया गया और उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने कहा कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
निशु आजाद ने कहा कि उनके पिता संजय कुमार पर जंतर-मंतर पर हमला किया गया और उनके सिर में चोट लगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज उनके पिता पर हमला करने की बात स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं। निशु के मुताबिक, उनके पिता को चोट के बाद टांके लगवाने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की और मेडिकल जांच के नाम पर मामला टलता रहा। निशु ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें ऑनलाइन अभद्र टिप्पणियों और दुष्कर्म की धमकियों का सामना करना पड़ा। 4 सितंबर को निशु ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद की अपील की। साथ ही पुलिस के सामने उन्होंने कहा कि इन धमकियों को लेकर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि निशु को छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। गांधी ने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी आरोपी को राजनीतिक संरक्षण हासिल है तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
4 सितंबर को पॉडकास्ट के वायरल होने बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका समर्थकों के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। उनके साथ आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस से जुड़े लोग भी मौजूद थे। सीजेपी ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वायरल वीडियो में हमले की बात सामने आने के बाद पुलिस को गंभीर धाराओं में कार्रवाई करनी चाहिए। सीजेपी ने हत्या के प्रयास यानी 307, एससी/एसटी एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं लगाने की मांग की। पुलिस के साथ करीब दो घंटे की बातचीत के बाद प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का आश्वासन मिला। पुलिस ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएंगी और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हत्या के प्रयास की धारा पर भी विचार किया जा सकता है। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि हमें भरोसा है कि दिल्ली पुलिस जिसे पूरे देश में एक प्रमुख एजेंसी माना जाता है, वह अपनी प्रतिबद्धता को निभाएगी। जो गुंडे देश में और देश की राजधानी में इतने खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें इस तरह खुलेआम घूमने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस अपने आश्वासन पर कार्रवाई नहीं करती है तो वह दोबारा थाने के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी की ओर से शेयर किया गया जंतर-मंतर के प्रदर्शन का वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने पर सवाल उठाया और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। शिवसेना यूबीटी नेता आनंद दुबे ने निशु आजाद की शिकायत सुने जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निशु के साथ अन्याय न हो। उन्होंने राहुल गांधी के रुख का समर्थन किया और मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही।
वायरल पॉडकास्ट में चिराग पासवान का नाम आने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास की ओर से प्रतिक्रिया आई। पार्टी ने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज ने केंद्रीय मंत्री और पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान का नाम कथित राजनीतिक संरक्षण का दावा करने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और पार्टी ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एक नाबालिग की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत नई एफआईआर दर्ज की गई। जंतर-मंतर से जुड़े पुराने मामले में एससी/एसटी की धाराएं भी जोड़ी गईं। शुक्रवार की शाम स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया। पुलिस को उसके बुलंदशहर में होने की इनपुट मिली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम ने उसे पकड़ने के लिए खास प्लान बनाया और सभी लोग सादे कपड़ों में पहुंचे और उसे दबोच लिया। इससे पहले ये खबर भी आ रही थी कि स्वतंत्र भारद्वाज मौके से फरार हो गया है। उसके हेलमेट पहनकर बाइक से भागने की खबर आ रही थी।
स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर उनके समर्थन में भी प्रदर्शन हुआ। हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने उनकी हिरासत का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों की ओर से कहा गया कि स्वतंत्र पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने निशु आजाद पर हिंदू देवी-देवताओं के अपमान का भी आरोप लगाया। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद शनिवार को स्वतंत्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
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